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Governance reforms for quality

Governance reforms for quality
Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

This theme invites inputs of the various types of reform needed to create better governance structures in State Universities and Centrally Funded institutions that will help in ...

This theme invites inputs of the various types of reform needed to create better governance structures in State Universities and Centrally Funded institutions that will help in improving their academic quality.

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Showing 918 Submission(s)
Rajesh Ranjan_2
Rajesh Ranjan_2 11 years 3 months ago
सुधार के लिए समान शिक्षा व्वयस्था होनी चाहिए। अल्पसंख्क को अलग से राशी की व्वयस्था नही होनी चाहिए। शिक्षा कार्य में लगे पदाधिकारी को प्रवाश विधालय में हो।
Rajesh Ranjan_2
Rajesh Ranjan_2 11 years 3 months ago
शिक्षा-दीक्षा तभी पूर्ण-सम्पूर्ण मानी जायेगी जबकि क्रमशः घर-परिवार-सम्पदा से युक्त संसार की; इन्द्रियों और उसके क्रियाओं-भोगों से युक्त शरीर की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त जीव-रूह-सेल्फ की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त आत्मा-ईश्वर-ब्रम्ह- नूर-सोल-ज्योतिर्बिन्दु रूप शिव की और मुक्ति-अमरता सहित सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया उपलब्धि कराने वाला परमात्मा-परमेश्वर- परमब्रम्ह-खुदा- गाॅड-भगवान् की प्राप्ति-उपलब्धि कराने की बात-चीत सहित साक्षात् दर्शन कराने वाली
Ravindra Nath Patel
Ravindra Nath Patel 11 years 3 months ago
शिक्षा-दीक्षा तभी पूर्ण-सम्पूर्ण मानी जायेगी जबकि क्रमशः घर-परिवार-सम्पदा से युक्त संसार की; इन्द्रियों और उसके क्रियाओं-भोगों से युक्त शरीर की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त जीव-रूह-सेल्फ की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त आत्मा-ईश्वर-ब्रम्ह- नूर-सोल-ज्योतिर्बिन्दु रूप शिव की और मुक्ति-अमरता सहित सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया उपलब्धि कराने वाला परमात्मा-परमेश्वर- परमब्रम्ह-खुदा- गाॅड-भगवान् की प्राप्ति-उपलब्धि कराने की बात-चीत सहित साक्षात् दर्शन कराने वाली
Ravindra Nath Patel
Ravindra Nath Patel 11 years 3 months ago
विद्यार्थी ही भावी समाज का कर्णधार होता है। गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये । http://vidyatattvam-paddhati.blogspot.in/
Mithlesh Sharma
Mithlesh Sharma 11 years 3 months ago
"गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये ।"
Mithlesh Sharma
Mithlesh Sharma 11 years 3 months ago
शिक्षा-दीक्षा तभी पूर्ण-सम्पूर्ण मानी जायेगी जबकि क्रमशः घर-परिवार-सम्पदा से युक्त संसार की; इन्द्रियों और उसके क्रियाओं-भोगों से युक्त शरीर की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त जीव-रूह-सेल्फ की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त आत्मा-ईश्वर-ब्रम्ह- नूर-सोल-ज्योतिर्बिन्दु रूप शिव की और मुक्ति-अमरता सहित सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया उपलब्धि कराने वाला परमात्मा-परमेश्वर- परमब्रम्ह-खुदा- गाॅड-भगवान् की प्राप्ति-उपलब्धि कराने की बात-चीत सहित साक्षात् दर्शन कराने वाली
Manoj Gautam
Manoj Gautam 11 years 3 months ago
"गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये ।"
Manoj Gautam
Manoj Gautam 11 years 3 months ago
शिक्षा-दीक्षा तभी पूर्ण-सम्पूर्ण मानी जायेगी जबकि क्रमशः घर-परिवार-सम्पदा से युक्त संसार की; इन्द्रियों और उसके क्रियाओं-भोगों से युक्त शरीर की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त जीव-रूह-सेल्फ की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त आत्मा-ईश्वर-ब्रम्ह- नूर-सोल-ज्योतिर्बिन्दु रूप शिव की और मुक्ति-अमरता सहित सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया उपलब्धि कराने वाला परमात्मा-परमेश्वर- परमब्रम्ह-खुदा- गाॅड-भगवान् की प्राप्ति-उपलब्धि कराने की बात-चीत सहित साक्षात् दर्शन कराने वाली