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Inviting comments and suggestions on the Draft Accessibility Standards for the Products Sector

Inviting comments and suggestions on the Draft Accessibility Standards for the Products Sector
Start Date :
Aug 14, 2025
Last Date :
Sep 14, 2025
17:30 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

The Department of Empowerment of Persons with Disabilities (DEPwD), Ministry of Social Justice & Empowerment (MSJE), in collaboration with MyGov, invites comments and suggestions ...

The Department of Empowerment of Persons with Disabilities (DEPwD), Ministry of Social Justice & Empowerment (MSJE), in collaboration with MyGov, invites comments and suggestions from stakeholders and the general public on the draft accessibility standards for the Products Sector. These draft standards, which identify non-negotiable rules, have been prepared to strengthen the creation of barrier-free environments in accordance with the Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 and relevant rules.

The draft document is now available for review. Click here to read.

All interested individuals are requested to carefully examine the proposed standards and submit their feedback, comments, and suggestions on the MyGov platform, ensuring that personal details are entered accurately during registration.

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Showing 713 Submission(s)
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
My post no. 11 विकलांग बच्चे या समान्य बच्चों के लिए स्कूल का बैग बहुत ज्यादा भारी होता है और वह पीठ पर लाद के ले जाते हैं जिससे उनकी पीठ में गर्दन में कमर में काफी दर्द होता है। हल्के ट्रॉली बैग बनाये जा सकते है। मुझसे नए आइडिया के लिए संपर्क करें। B. डिसएबल लोगों खासकर माताओं को अपने छोटे बच्चों को लाने ले जाने में बहुत परेशानी होती है। विदेश में एक पत्नी अपने दोनों पैर कटे हुए पति को पीठ पर लाद कर ले जा रही है रील में :- https://youtu.be/Ry3seUL7ANc?si=a-8juw4Txss4pOap इसतरह की ट्रॉली बनाई जा सकती है। जिससे व्हीलचेयर की जरूरत नहीं पड़ेगी रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर :- https://www.facebook.com/share/r/1aAGXsgtee/ मुझे आयडिया की प्लानिंग के लिए संपर्क कर सकते हैं। I am Change Maker badge holder at mygov.in
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
My post no. 10 विकलांग, बूढ़ों, बच्चों, गर्भवती महिला, बीमार, मोटापे में जूते चप्पल के डिजाइन इस तरह से मैंने प्लान किए हैं जिससे कि उनको मौजे पहनने की जरूरत नहीं पड़े। मुझे टीम चाहिए। मुझसे संपर्क करें। B. चप्पल जूते स्लिप कर जाते हैं फर्श पर या सीढियों पर, जिससे disabled फिसल कर गिर जाते हैं। मुझे टीम चाहिए नए डिजाइन के जूते चप्पल डिजाइन करने के लिए। C. सड़क पर फुटपाथ और सड़क / फुटपाथ पर अतिक्रमण के कारणं भी डिसेबल्ड फ्रेंडली बनाने की जरूरत है मुझसे संपर्क करें नए आयडिया के लिए। D. आरबीआई द्वारा जारी ₹1 ₹2 के सिक्कों में अंतर करना मुश्किल होता है। सुधार करें। I am Change Maker badge holder at mygov.in
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
My Post 9 Water ladle, चम्मच, कलची, कटोरी, glaas, plate, cup के डिजाइन भी हाइजीन और health friendly नहीं है। जिसने बच्चों, बीमारों, बद्ध और विकलांग लोगों को जल्दी बीमारियां लगती हैं मुझे टीम चाहिय नये डिजाइन बनाने के लिये। मेंने नये आयडिया के बारे मे planning की है। B विकलांग, बूढ़े, बच्चे, महिलाएं, गर्भवती, मोटे, बीमार के लिए वाहनों में सही तरीके से कोई व्यवस्था नहीं बनाई है। चाहे वह टू व्हीलर हो या फोर व्हीलर हो। जिससे दुर्घटना हो रही है और विकलांगों, बूढ़ों, बच्चों, महिलाओं गर्भवतियों को ज्यादा चोट लग रही है गर्भवती महिला का बच्चा भी मरने की सूचना है। मेंने ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय को कुछ साल पहले बहुत से सुझाव भेजे थे। Child safety helmet ड्राफ़्ट पर नवम्बर 2021 में। लेकिन चर्चा के लिये मुझे नहीं बुलाया। और जो विदेशी अंधी नकल का ड्राफ़्ट था वही पास कर दिया। आज तक कोई सुधार नहीं हुआ है। काग़ज़ी कानून बना दिया। C कैरी बैग का डिजाइन भी डिसेबल्ड फ्रेंडली बनाने की जरूरत है। मेंने इसके आइडिया की प्लानिंग की है मुझसे संपर्क करें। टीम चाहीये।
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
Post 8 जो लोग विकलांग है, मोटे हैं, हड्डी टूटी हुई है, बूढ़े बहुत ज्यादा है, हाथ पैर में कंपन है, गंभीर बीमार है, कमजोर दृष्टि है। ICU, वेंटिलेटर या पलंग से उठ नहीं सकते। करवट बदलने में दिक्कत है। बहुत मोटे है। कमजोरी बहुत है। गोद में बच्चा है। ऐसे लोगों को नल की टोटी खोलने या बंद करने में ज्यादा दिक्कत होती है बोतल में पानी भरने में ज्यादा दिक्कत होती है। पानी ज्यादा बर्बाद होता है मैं अलग तरीके से टोटी खोलना या बंद करने के आयडिया के बारे में सोचा है। मुझे अच्छी टीम चाहिय। नए डिजाइन की टोटी के आयडिया के बारे में भी मैंने planning की है मुझे टीम चाहिए। I am Change Maker badge holder at mygov.in
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
My post 7 जो लोग विकलांग है, मोटे हैं, हड्डी टूटी हुई है, बूढ़े बहुत ज्यादा है, हाथ पैर में कंपन है, गंभीर बीमार है, कमजोर दृष्टि है। ICU, वेंटिलेटर या पलंग से उठ नहीं सकते। करवट बदलने में दिक्कत है। बहुत मोटे है। कमजोरी बहुत है। बोतल या पैकेट या cup, glass बहुत चिकने होते हैं जिससे हाथ से फिसल जाते हैं। बोतल गिर पड़ती हैं। इसलिए पैकेट या बोतल को हाथ से छूट न जाए इस हिसाब से डिजाइन करना चाहिए। मुझे उसके आइडिया के लिए संपर्क कर सकते हैं। मुझे एक अच्छी टीम चाहिए। रेस्टोरेंट में खाना खाने जाएं तो उनके चम्मच प्लेट कटोरी गिलास बहुत भारी होते हैं। और चम्मच का साइज बहुत बड़ा होता है उनके हल्का बनाने के लिए और साइज सही करने के लिए मुझसे संपर्क कर सकते हैं नये आयडिया के लिए। मुझे टीम चाहिए। बच्चों को तो भी बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। रेस्टोरेंट की कुर्सी और मेंजे भी बच्चों और disabled friendly नहीं है। मुझसे आयडिया के लिये संपर्क करे I am change maker badge holder at mygov.in
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
My Post 6 जो लोग मोबाइल को अपने pant या कमीज की जेब में रखते हैं उससे रेडिएशन शरीर पर पहुंचता है और खासतौर से स्पर्म, शुक्राणु और महिलाओं के अंडों में विकृति आती है जिससे बच्चे पैदा होने में दिक्कत हो रही है। डिसएबल लोगों को बहुत ज्यादा दिक्कत होती है इससे। मोबाइल को pant की जेब में से चुरा भी लिया जाता है। महिलाओं के कपड़ों में तो जेब भी नहीं होती जिससे उनके मोबाइल को छीनने में बहुत आसानी होती है। पुरुष के पर्स में रुपए, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आईडी प्रूफ होते हैं। जिससे उनका पर्स मोटा हो जाता है और जो pant की पीछे की जेब में रखते हैं। उससे उनका बॉडी पोज बिगड़ जाता है। और कूल्हा में दर्द की समस्या हो जाती है। मेंने इस समस्या के बारे मे आयडिया plan किया था। मुझे टीम चाहिये ताकि नये डिजाइन के कपड़े जारी करने के लिये। I am Change Maker badge holder at mygov.in
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
Post 5 जो लोग विकलांग है, मोटे हैं, हड्डी टूटी हुई है, बूढ़े बहुत ज्यादा है, हाथ पैर में कंपन है, गंभीर बीमार है, कमजोर दृष्टि है। ICU, वेंटिलेटर या पलंग से उठ नहीं सकते। करवट बदलने में दिक्कत है। बहुत मोटे है। कमजोरी बहुत है। ऐसे लोगों को अंडरगारमेंट और कपड़े पहनने और उतारने में बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। जिसका एक हाथ काम नहीं कर रहा है या एक हाथ नहीं है वह कैसे अंडरगारमेंट पहने? कैसे कपड़े पहने? कैसे जूते पहने ? ऐसे लोग अपनी सुरक्षा भी नहीं कर पाते हैं। अपने मोबाइल और पर्स की सुरक्षा नहीं कर पाते हैं। तो इन लोगों से लूट बहुत ज्यादा होती है। महिलाओं से भी ज्यादा पर्स छीने जाते हैं। उनके कपड़े मैं जेब नहीं होती है। जो घायल हुए हैं या आग से जल गए हैं उनके कपड़े उतारने में बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। मैंने साल 2000 में ऐसे लोगों के लिए नए तरीके से कपड़े डिजाइन के बारे में planning की थी। मुझे टीम चाहिये नये डिजाइन के कपड़े जारी करने के लिये। I am Change Maker badge holder at mygov.in
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
पोस्ट 4 भारत में प्रत्येक व्यक्ति अपनी कमर को अपनी छाती को इंच में नापता है। और यह मिस वर्ल्ड, मिस यूनिवर्स, मिस्टर इंडिया होते हैं, मॉडलिंग होती है वहां भी सभी लोग इंच में नापते हैं। लेकिन जो अंडरगारमेंट में सेंटीमीटर में size लिखे जाते हैं जिसे समझने में दिक्कत होती है प्रत्येक भारती को कमीज पर भी pant पर भी सब जगह इंच का नाप लिखा होना चाहिए। pant पर तो लिखा होता है इंच में, लेकिन कमीज पर सेंटीमीटर में लिखा होता है। जूते का साइज भी पैरों के तलबे के नाप के हिसाब से होना चाहिए जबकि जूते चप्पल में साइज उन्होंने अपने हिसाब से लिख रखे हैं। मेरे पैर की लंबाई कितनी है उसे हिसाब से जूते चप्पल का साइज लिखा जाना चाहिए। जैसे मेरे पैर के तलवे की लंबाई 10 इंच है तो मुझे 10 इंच का ही जूता चप्पल मिलना चाहिए।
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
पोस्ट 3 पैकिंग में अलग-अलग तरीके से भरी जा रही है। कोई 114 ml की बोतल दे रहा है दवाई की। कोई 100 ml की। कोई पाउंड में लिख रहा है। कोई घी, तेल लीटर में तो कोई किलो में भर रहा हैं और लिख रहा हैं। पांच गोली की एक खुराक दवाई की है। लेकिन पैकिंग में 15 गोलियों दी जा रही है। दुकानदार को दिक्कत होती देने में। उसमें फिर एक्सपायरी डेट और दाम का झगड़ा रहता है। जितने दिन की जितनी खुराक हो उतना pack बनाये। हर दवा की गोली के साथ उसकी एक्सपायरी डेट लिखें। 2. ऑनलाइन shopping वेबसाइट या ऐप पर भी दाम को बहुत छोटे अक्षरों में लिखा जाता है। जिससे कि पढ़ने में दिक्कत होती है। उसमें मैन्युफैक्चरिंग डेट एक्सपायरी डेट नहीं लिखी होती है। और वस्तुओं के आगे पीछे का फोटो नहीं होता। उसको पढ़ने के लिए एक्सपेंड करके नहीं पढ़ सकते ताकि जिसको कम दिखाई देता है वह आसानी से पूरी जानकारी वास्तु के बारे में प्राप्त कर सके।
subodh bansal
subodh bansal 1 year 1 week ago
My post no. 2 वस्तुओं पर दाम, एक्सपायरी दिनाँक, मैन्युफैक्चरिंग दिनाँक, batch no. और मात्रा लिखे जाते हैं वह कभी ऊपर लिख दी जाते हैं कभी नीचे लिख दी जाते हैं। कभी दाएं लिख दी जाते हैं कभी बाएं लिख दी जाते हैं। कभी आगे लिख दिए जाते हैं कभी पीछे लिख दी जाते हैं। इसका एक स्टैंडर्ड हो। मेरे हिसाब से प्रोडक्ट के batch नंबर, मैन्युफैक्चरिंग दिनाँक एक्सपायरी दिनाँक, मात्र और दाम एक बॉक्स में packet/bottle के आगे वाली जगह नीचे लिखे, दाएं तरफ। बड़े और मोटे अक्षर में लिखे हो। एमआरपी लिखी जाती है कहीं पर रुपये पहले लिख दिया आते हैं कहीं पर 35/- लिख दिया जाता है कहीं पर 35.00 लिख दी जाती है। कहीं पर रुपए का चिन्ह बना दिया जाता है। तो एकसा होना चाहिए सब जगह। एक्सपायरी डेट पर भी अलग-अलग लिख दिया जाता है। कोई कोई लिख देता है कि 3 साल बाद एक्सपायर होगी फ्रॉम मैन्युफैक्चर डेट से। कोई तारीख लिख देता है कोई महीना और साल लिख देता है। तो सब चीज का एक स्टैंडर्ड फिक्स करके रखा जाए।