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अस्वास्थ्यकर शौचालयों से निपटने के लिए क्या उपाय किये जाएँ?

How to tackle insanitary latrines?
आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jul 17, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

मैला ढ़ोने का मुख्य कारण अस्वास्थ्यकर शौचालयों की मौजूदगी है। ...

मैला ढ़ोने का मुख्य कारण अस्वास्थ्यकर शौचालयों की मौजूदगी है। ‘आवास सूचीकरण और गणना के आंकड़े, 2011’ के अनुसार 2011 में देश में लगभग 26 लाख अस्वास्थ्यकर शौचालय थे। सभी मौजूदा अस्वास्थ्यकर शौचालयों की पहचान कर उन्हें एमएस अधिनियम के प्रावधानों के तहत या तो नष्ट कर दिया जाए या स्वच्छ शौचालयों में परिवर्तित कर दिया जाए।

फिर से कायम कर देना
791 सबमिशन दिखा रहा है
Harish Shah
Harish Shah 11 साल 8 महीने पहले
Main cause of Insanitary Toilets are : 1. Insufficient quantity of water 2. non functional flush 3. poor air circulation 4. carelessness of people in using latrines and toilets 5. poor supervision by people manning it If we solve above, it will lead to improvement of sanitation of latrines and toilets
moreshwar chaudhari
moreshwar chaudhari 11 साल 8 महीने पहले
msg continued हाँ ऐसा होने पर पानी बेचने वालो की जरुर छुट्टी हो जाएगी। किसी सरकार ने ऐसा किया नहीं क्योंकि 1 रूपये से भी कम का पानी जब 20 रूपये में बिकता है तो शेयर उपर तक जाता है। क्या इस पानी घोटाले को बंद करवाने के लिए आप हमारे साथ हैं। अगर हाँ तो ये मेसेज इतना शेयर कीजिये की सरकार तक पहुँच जाये।
moreshwar chaudhari
moreshwar chaudhari 11 साल 8 महीने पहले
To , Respected PM आज देश के 80% रेलवे स्टेशन पर खराब पानी मिलता है। और बोतल बँद पानी धड्ले से 20 रूपये लीटर में बिक रहा है। मेरा मानना है की करोड़ो रूपये की लागत से बने रेलवे स्टेशन पर क्या 3-4 लाख रूपये और लगाकर 30-40 RO water फ़िल्टर नहीं लगाये जा सकते। आप कह सकते है की इनका maintenence महंगा हो जायेगा तो मेरा तर्क है की क्या इन RO के पास में दान पात्र रखा जा सकता है। मुझे पूरा विशवास है की मेरे भारत वर्ष की दानवीर जनता 1-2 रूपये करके daily इतना पैसा तो डाल ही देगी की जितने से इन RO का daily maintenence हो सके। इससे न केवल जनता को मज़बूरी में पानी 20 रूपये लीटर खरीदना पड़ेगा बल्कि साथ ही प्लास्टिक बोतलों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से देश को मुक्ति मिल जा
Kailasa Pathi
Kailasa Pathi 11 साल 8 महीने पहले
to suggest our Prime Minister, make tie-up with Australia to improve our Indian educational standards of quality, but, not quantity. most of the engineering students in Indian institutions very poor in soft skills, communication skills, english language exposure, hence, tie-up with Australia to improve training and development of Indian human resources.
annamaneni pradeepbabu
annamaneni pradeepbabu 11 साल 8 महीने पहले
I have been sharing my views on swachh bharat. I even posted regarding lack of wastebins. To my surprise not even central government offices have wastebin in their premises.. Is this swachh bharat program a genuine one?? Or to attract people of haryana and maharastra for state election benifits?? Slowly am loosing faith on Mr Narendra Modi. As charity begins at home. Why cannot cleaness start from centrale government offices??
abhimanyu singh
abhimanyu singh 11 साल 8 महीने पहले
मेरा मानना है कि जितने भी खुले शौचालय है... उन्हें सबसे पहले गांव स्तर पर चिन्हि्त किए जाए.. फिर कुछ घरों यानी आसपास के 30-40 घरों के शौचालयों से निकलने वाले मैले को... किसी एक जगह इकट्ठ्ठा घर उससे गोबर गैस की तरह ही एक अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर उससे बिजली पैदा की जाए... जिससे उससे निकला वेस्टेज भी कम हो जाएगा... और बिजली का भी उत्पादन हो जाएगा... मान लिया जाए कि ऐसे ही... अगर धीरे-धीरे कुछ गांवों में भी इसकी शुरूआत हो गई.. तो रोजगार तो मिलेगा ही मिलेगा.. कितनी बीमारियां दूर हो जाएगी...।