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अस्वास्थ्यकर शौचालयों से निपटने के लिए क्या उपाय किये जाएँ?

How to tackle insanitary latrines?
आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jul 17, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

मैला ढ़ोने का मुख्य कारण अस्वास्थ्यकर शौचालयों की मौजूदगी है। ...

मैला ढ़ोने का मुख्य कारण अस्वास्थ्यकर शौचालयों की मौजूदगी है। ‘आवास सूचीकरण और गणना के आंकड़े, 2011’ के अनुसार 2011 में देश में लगभग 26 लाख अस्वास्थ्यकर शौचालय थे। सभी मौजूदा अस्वास्थ्यकर शौचालयों की पहचान कर उन्हें एमएस अधिनियम के प्रावधानों के तहत या तो नष्ट कर दिया जाए या स्वच्छ शौचालयों में परिवर्तित कर दिया जाए।

फिर से कायम कर देना
791 सबमिशन दिखा रहा है
karan gulati
karan gulati 11 साल 5 महीने पहले
ज़रूर पढ़ें और सयानी होती बेटियों को भी पढ़ायें। क्यों करता है भारतीय समाज बेटियों की इतनी परवाह... एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई। चेहरे पर झलकता आक्रोश संत ने पूछा बोलो बेटी क्या बात है बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में लड़कों को हर प्रकार की आजादी होती है। वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती। इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है। यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ आदि। संत मुस्कुराए और कहा... बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं? ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं। इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी कीमत पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता। लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है समा
karan gulati
karan gulati 11 साल 5 महीने पहले
अब तुम चलो एक ज्वेलरी शॉप में। एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी। उसमें रखी छोटी सुन्दर सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से रखा चमचमाता हीरा। क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे में जरा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत नहीं रहेगी। समाज में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी प्रकार की है। पूरे घर को रोशन करती झिलमिलाते हीरे की तरह। जरा सी खरोंच से उसके और उसके परिवार के पास कुछ नहीं बचता। बस यही अन्तर है लड़कियों और लड़कों में। पूरी सभा में चुप्पी छा गई। उस बेटी के साथ पूरी सभा की आँखों में छाई नमी साफ-साफ बता रही थी लोहे और हीरे में फर्क।।।Ⓜ
karan gulati
karan gulati 11 साल 5 महीने पहले
ज़रूर पढ़ें और सयानी होती बेटियों को भी पढ़ायें। क्यों करता है भारतीय समाज बेटियों की इतनी परवाह... एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई। चेहरे पर झलकता आक्रोश संत ने पूछा बोलो बेटी क्या बात है बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में लड़कों को हर प्रकार की आजादी होती है। वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती। इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है। यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ आदि। संत मुस्कुराए और कहा... बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं? ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं। इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी कीमत पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता। लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है समा
Kshetrapal Sharma
Kshetrapal Sharma 11 साल 5 महीने पहले
Primary & Secondary education quality bad in govt schools due to undisciplined teachers-schools resulting in unskilled youth & high dropouts after grade 8.With poor base education youth becomes unsuitable for higher education/skills.Schools are enough but discipline,monitoring & quality lacking.Involve parents in school-teachers evaluation
pooran jangir
pooran jangir 11 साल 5 महीने पहले
Waste water treatment to be implemented on 'Micro Scale' instead of 'Macro'. A mini machine comprising of a compressor and filter in house to be fitted. This will filter the waste water from toilet, kitchen, bathroom and will form a 'solid cake' of all the 'waste material'. Cake to be burnt for fuel may in power generation. Filtered water can be recycled to gardens
Unang Jani
Unang Jani 11 साल 5 महीने पहले
#AskObamaModi Namaste Modiji and Obamaji.. Its really a historical moment for both country and for world.As we know terror is big issue can you both lead the world on criminal exchange program where we can have a bilateral tie-ups on a global level on the same where one country can ask for the criminals who have made safe hiding face in other country. I think this will not allow terrorist and criminals to move free in any counties and making there unwanted activity. What are your views? do share