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इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में बजट सुधारों के कार्यान्वयन के लिए हितधारकों के साथ परामर्श

आरंभ करने की तिथि :
Feb 16, 2021
अंतिम तिथि :
Mar 31, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में केंद्रीय बजट 2021-22 के प्रावधानों के प्रभावी कर्यान्वयन के लिए रोडमैप हेतु एक वेबिनार को संबोधित किया। वेबिनार के पैनेलिस्टों ने इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार से संबंधित अपने विचार साझा किए जिसमें एडवांस्ड टेक्नालॉजी के माध्यम से विकास को गति देना तथा इस सेक्टर में अधिक निवेश के लिए आकर्षण शामिल है।

हम इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की अंतिम रणनीति के कार्यान्वयन पर जनता और अन्य हितधारकों से विचार और सुझाव आमंत्रित करते हैं।

भेजने की अंतिम तिथि 31st March 2021 है।

फिर से कायम कर देना
964 सबमिशन दिखा रहा है
chandan kumar singh
chandan kumar singh 5 साल 6 महीने पहले
मेरे विचार से सरकार का दायित्व सरकारी संस्था के कमजोर पक्ष को दूर करना है ना कि सरकारी संस्था को निजी हाथों में बेचना है नहीं तो सरकार का नियंत्रण लोकतंत्र पर धीरे धीरे खत्म हो जाएगा निजी संस्था होने पर सिर्फ मुनाफा खोरी होगी जोकि जनहित में खतरनाक है इसलिए इन को मजबूत करने के लिए इनका विलय करना बहुत ही आवश्यक है ना कि निजी करण की नीति लाकर इनसे अपनी जिम्मेदारी से दूर करना भारत के विकास में सरकारी बैंकों का योगदान जनधन खाते खोलने से लेकर कोरोना काल तक जिन्होंने मुश्किल समय में सरकार का साथ दिया
chandan kumar singh
chandan kumar singh 5 साल 6 महीने पहले
मेरे विचार से जितना कि सरकारी बैंकों ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अग्रिम योगदान दिया है उतना किसी ने ने नहीं किया है सरकारी बैंकों ने अपने निजी हितों को छोड़कर देश के सामाजिक तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है इनको निजी हित में देना देश के लोकतंत्र के साथ धोखा है क्योंकि इससे लोकतंत्र कमजोर तथा साहूकारी व्यवस्था की ओर बढ़ेगा लोग के पास बैंकिंग सुविधा अधिक महंगे दर पर पहुंचेगी जिससे आम व्यक्ति आर्थिक योजनाओं तथा आर्थिक गतिविधियां कम होगी इसलिए बैंकों का निजीकरण ना करके विलय कर देना चाह
chandan kumar singh
chandan kumar singh 5 साल 6 महीने पहले
मेरे विचार से भारत में बैंकों का निजीकरण एक प्रकार से लोक हित में नहीं है क्योंकि सरकारी बैंक के द्वारा लोग विभिन्न योजनाओं तथा आर्थिक गति को प्राप्त होते हैं और सरकारी बैंक लोकतंत्र के विकास तथा उसको गति प्रदान करने में बहुत बड़ा योगदान है जिससे नोट बंदी या जनधन खाते के समय हम देख सकते हैं सरकारी बैंकों ने अपने लाभ कमाने के उद्देश्य को छोड़कर जन जन तक सरकारी योजना तथा सामाजिक आर्थिक विकास मैं बहुत बड़ा योगदान दिया है और इनको निजी हाथों में देना एक प्रकार से लोकतंत्र की हत्या होगी इनका विलय होना
Nemai Basu
Nemai Basu 5 साल 6 महीने पहले
Encroachment and illegal dwellings of migrants give rise to growth of slums. There exist no means to regulate this flow. Small townships of prefabricated units need to be built ‘outside’ the boundaries of major cities. Migrants housed here will be ‘time bound’ and will be obligated to share the upkeep of the facilities.