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उच्चतर शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण

Internationalization of higher education
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

वैश्वीतकरण के परिणामस्वरूप अधिक विदेशी शिक्षा आई है। तथापि एक ...

वैश्वीतकरण के परिणामस्वरूप अधिक विदेशी शिक्षा आई है। तथापि एक अच्छीक नीति की आवश्याकता है जो सहयोग, छात्र संकाय सचलता आदि को प्रोत्साहित करे। उच्त्तर शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ाने के लिए आवश्यक परिवर्तन क्या है।

फिर से कायम कर देना
731 सबमिशन दिखा रहा है
Sakshi_10
Sakshi_10 11 साल 5 महीने पहले
वास्तव में स्वाध्याय वह कारखना है जिसमें अगणित दूषित विचार-भाव-व्यवहार-कर्म वाला मनुष्य आये दिन निर्मल एवं स्वच्छ भाव-व्यवहार-विचार कर्म वाला सही मानव बनता और निकलता रहता है ।" परन्तु अफसोस ! अफसोस पर अफसोस ! कि मनुष्य मानवता स्थापित करने वाले इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को भी बन्द कर करवा दिये हैं तथा यह निकम्मी एवं भ्रष्ट सरकारें भी (विश्व की ही) इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को प्रायः हर पाठशाला एवं विद्यालयों तक में भी खोल-खुलवा कर सबके लिये लिये अनिवार्य नहीं कर करवा रही है।
Sakshi_10
Sakshi_10 11 साल 5 महीने पहले
स्वाध्याय ; Self Realization संसार में आनन्दमय मानव जीवन जीने के लिये स्वाध्याय एक अनिवार्य विधान है जो मानव के अन्तःकरण में मानवता का भाव एवं मानवीय गुणों को विकसित करता हुआ, शैतानियत-असुरता एवं पशुवत् जीवन से ऊपर उठाते हुए, मानवीय जीवन जीने की राह दिखाता है । सही मानव बनाता है। स्वाध्याय विधान से रहित मानव, मानव कहलाने के योग्य नहीं होता। वह या तो बालक या तो पशु या असुर या तो पागल कहलाने योग्य होता है ।
Gautam Prasad
Gautam Prasad 11 साल 5 महीने पहले
स्वाध्याय ; Self Realization संसार में आनन्दमय मानव जीवन जीने के लिये स्वाध्याय एक अनिवार्य विधान है जो मानव के अन्तःकरण में मानवता का भाव एवं मानवीय गुणों को विकसित करता हुआ, शैतानियत-असुरता एवं पशुवत् जीवन से ऊपर उठाते हुए, मानवीय जीवन जीने की राह दिखाता है । सही मानव बनाता है। स्वाध्याय विधान से रहित मानव, मानव कहलाने के योग्य नहीं होता। वह या तो बालक या तो पशु या असुर या तो पागल कहलाने योग्य होता है ।
Gautam Prasad
Gautam Prasad 11 साल 5 महीने पहले
वास्तव में स्वाध्याय वह कारखना है जिसमें अगणित दूषित विचार-भाव-व्यवहार-कर्म वाला मनुष्य आये दिन निर्मल एवं स्वच्छ भाव-व्यवहार-विचार कर्म वाला सही मानव बनता और निकलता रहता है ।" परन्तु अफसोस ! अफसोस पर अफसोस ! कि मनुष्य मानवता स्थापित करने वाले इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को भी बन्द कर करवा दिये हैं तथा यह निकम्मी एवं भ्रष्ट सरकारें भी (विश्व की ही) इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को प्रायः हर पाठशाला एवं विद्यालयों तक में भी खोल-खुलवा कर सबके लिये लिये अनिवार्य नहीं कर करवा रही है।
Gautam Prasad
Gautam Prasad 11 साल 5 महीने पहले
वास्तव में तत्त्वज्ञान वह ज्ञान है जिसके अन्तर्गत पूरे ब्रह्माण्ड के जड़-चेतन तथा दोष-गुण के साथ ही साथ ‘सम्पूर्ण कर्म विधान’ तथा परिपूर्णतः योग-साधना या अध्यात्म विधान के अलावा परमतत्त्वम् रूप आत्मतत्त्वम् शब्दरूप भगवत्तत्त्वम्’ या खुदा-गॉड-भगवान् की यथार्थतः जानकारी, साक्षात् दर्शन एवं स्पष्टतः बात-चीत करते-कराते हुये परिचय-पहचान साक्षात् प्राप्त होता है; साथ ही साथ इसमें अद्वैत्तत्त्वबोध रूप मुक्ति-अमरता का साक्षात् बोध भी समाहित होता है ।
Gautam Prasad
Gautam Prasad 11 साल 5 महीने पहले
parampujya Sant Gyneshwar Swami Sadanand ji Paramhans ke anusar 1 . शिक्षा (Education) 2 . स्वाध्याय (Self Realization) 3 . अध्यात्म (Spiritualization) और 4 .तत्त्वज्ञान ; (True, Supreme & Perfect KNOWLEDGE) अथवा विद्यातत्त्वम् पद्धति । is a super system will improve every areas.Only solution (practical) to all problems. Teach Vidya, not Avidya. Shiksha avidya hai avidya. "Sa Vidya Vimuktaye"
thomas k stanly
thomas k stanly 11 साल 5 महीने पहले
Dear govt, it is high time to remove caste based system of reservation and replace it with a system of reservation based on income.stop encouraging people to become obc and sc/st.if the present policy continues it will lead to people conversation to sc/st so that they can enjoy more privileges
Anil Kumar Yadav_3
Anil Kumar Yadav_3 11 साल 5 महीने पहले
उच्चतर शिक्षा को विदेशी शिक्षा से जोडने के लिये अंग्रेजी शिक्षा बहुत जरुरी है जिससे बच्चों की बुद्धि का विकास होगा और विदेशी शिक्षा के लिये तैयार होगा।