Sakshi_10
11 साल 5 महीने पहले
वास्तव में स्वाध्याय वह कारखना है जिसमें अगणित दूषित विचार-भाव-व्यवहार-कर्म वाला मनुष्य आये दिन निर्मल एवं स्वच्छ भाव-व्यवहार-विचार कर्म वाला सही मानव बनता और निकलता रहता है ।"
परन्तु अफसोस ! अफसोस पर अफसोस ! कि मनुष्य मानवता स्थापित करने वाले इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को भी बन्द कर करवा दिये हैं तथा यह निकम्मी एवं भ्रष्ट सरकारें भी (विश्व की ही) इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को प्रायः हर पाठशाला एवं विद्यालयों तक में भी खोल-खुलवा कर सबके लिये लिये अनिवार्य नहीं कर करवा रही है।
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