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उच्चतर शिक्षा को समाज से जोड़ना

Linking higher education to society
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

उच्चतर शिक्षा संस्थाओं की सामाजिक विकास में भूमिका लगातार ...

उच्चतर शिक्षा संस्थाओं की सामाजिक विकास में भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। हाल के वर्षों में इस शिक्षा ने अपने को समाज से अलग थलग कर लिया है और उच्चतर शिक्षा को समाज के साथ निकटता से पुन:स्थापित एवं मजबूत करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय, सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने तथा सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों में भागीदारी कैसे बना सकता है। कुछ कार्यरत उदाहरण शेयर करना भी एक उपयोगी निवेश होगा।

फिर से कायम कर देना
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SANSKAR SHRIVASTAVA
SANSKAR SHRIVASTAVA 11 साल 6 महीने पहले
शिक्षा नीति राजनीती से पर हो एक ऐसी नीति हो जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को भारतवर्ष की पुरातन गरिमा से अवगत करा सके ..लार्ड मेकाले की नीति बंद हो माता पिता गुरुजनों बड़े बुजुर्गों की सेवा आदर सीखा सके जो प्रकृति से प्रेम और उसके संरक्षण को सीखा सके जो विश्बंधुत्व की हमारी सोच को कारगर बनाये जो किसी प्रकार के भेदभाव को दूर कर सर्वे भवन्तुः सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः के हमारे सूत्र को कारगर बना सके ...भारतीय महापुरुषों की जीवन गाथाओं को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये
Ravindra sharma_3
Ravindra sharma_3 11 साल 6 महीने पहले
Share Your Views. आज उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति अपनी मूल धरती,कार्य और संस्कृति से अलग होता चला जा रहा है। शिक्षा मे कुछ ऐसी व्यवस्था,पाठ्यक्रम हो जिससे व्यक्ति अपनी धरती से जुड़ाव रख सके । उसकी शिक्षा गाँव और समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सके। .
Ramesh chandra Agrawal
Ramesh chandra Agrawal 11 साल 6 महीने पहले
प्राथमिक शिक्षा में जीवन मूल्‍यों की शिक्षा जुड्नी चाहिये। इसके अभाव में बालक भारतीय जीवन मूल्‍यों से अनभिज्ञ रहने के कारण वह संस्‍कृति के साथ नहीं जुड् पाता। इसके अभाव में उसमें संस्‍कारों का बीजारोपण नहीं होता।
shiv bhushan tripathi
shiv bhushan tripathi 11 साल 6 महीने पहले
आज उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति अपनी मूल धरती,कार्य और संस्कृति से अलग होता चला जा रहा है। शिक्षा मे कुछ ऐसी व्यवस्था,पाठ्यक्रम हो जिससे व्यक्ति अपनी धरती से जुड़ाव रख सके । उसकी शिक्षा गाँव और समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सके। आज गाँव का व्यक्ति अपने पढे लिखे बच्चों के लिए कहता है ---धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का ।
vishal sharma_8
vishal sharma_8 11 साल 6 महीने पहले
सर मेरे ख्याल से एक और चीज है जो हमारे देश को आगे बढ़ने से रोकती है वो है आरक्षण वो ऎसे है सर जी के जैसे कोई रेलवे में काम करता है वो फ्री में पुरे इंडिया में सफर करले एक रुपया नही लगता जब की उसकी सैलरी 30000 या 35000 होती है वही दूसरी और जो कम से कम 8000 या 9000 रुपया कमाता है उसकी टिकट लगती है ये डिफरेंस नही होना चाहिए सर साथ में एक बात और सर हमारे पंजाब में sc कोटे वालो को बिजली मुफ्त है जबकि चाहे किसी के घर में सारे के सारे आदमी
vishal sharma_8
vishal sharma_8 11 साल 6 महीने पहले
नमस्ते मोदी सर मुझे आपसे कुछ बात करनी है सर इसलिए मुझे आपसे मिलने के लिए टाइम चाहिए सर प्लीज सर माय फ़ोन नो इस 7508859162
AMBALI NARAYANN KUTTY
AMBALI NARAYANN KUTTY 11 साल 6 महीने पहले
Sir, Each branch/batch of technical students should be detailed to deliver their professional skills to govt hospitals (such as Electrician, painter, welder, plumber,sheet metal, carpenter) as the part of their curriculum. Presently students waste their time to preparing projects in useless subjects.We have many Govt hospitals in India having wards due to minor problems: can be rectified through this students interaction.