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गुणवत्ता के लिए अभिशासन सुधार

Governance reforms for quality
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

इस विषय पर राज्य विश्वविद्यालयों और केन्द्र वित्तपोषित संस्थाओं ...

इस विषय पर राज्य विश्वविद्यालयों और केन्द्र वित्तपोषित संस्थाओं में बेहतर अभिशासन ढांचा बनाने हेतु विभिन्न प्रकार के अपेक्षित सुधारों, जो उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हों, के लिए सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं।

फिर से कायम कर देना
918 सबमिशन दिखा रहा है
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
११- नयी शिक्षा नीति ऐसी हो कि समाज का शिक्षकों के प्रति साकारात्मक नजरिया हो l आज मीडिया ने इस विषय पर बहुत बुरा प्रभाव छोड़ा है l गलती एक व्यक्ति करता है हेय दृष्टि की मार समस्त शिक्षक समुदाय को झेलनी पड़ती है l शिक्षक योग्य, आर्थिक रूप से संपन्न और सबके आदर के पात्र होने चाहिए, तभी वे देश के रोल मॉडल हो सकते हैं l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
१२- शिक्षा में पुरानी महत्वपूर्ण बातों के साथ-साथ नयी प्रगतिवादी सोच विकसित करने की आवश्यकता है l १३- हॉस्टल सुविधा वाली शिक्षा व्यवस्था को समाप्त कर हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली 'गुरुकुल शिक्षा प्रणाली' का पुनरुद्धार किया जाना चाहिए l जिसमें हमारी स्कूल प्रणाली का ही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाना चाहिए l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
१४- नयी शिक्षा नीति में प्राचीन विषयों को प्रमुखता से स्थान मिलना चाहिए l जैसे संस्कृत, वेद, दर्शन और उपनिषदों का ज्ञान l १५- बाबा रामदेव, डॉ कुलवंत भूत्पूर्व डायरेक्टर डी ए वी वर्तमान में सी ई ओ डी वी एम ग्रुप और ऐसे ही उच्च शिक्षित अनुभवी देशी विदेशी शिक्षाविदों की सलाह नई शिक्षा नीति के निर्माण में सहायक साबित होगी l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
नई शिक्षा नीति के लिए सन २०१५ में मैं १५ फॉर्मूले भेज रहा हूँ l देखना यह है कि कब तक इस पर काम शुरू होता है, अब तो आशंका यह होने लगी है कि स्वप्न देखना और दिखाना तो बहुत आसान है पर करना बहुत मुश्किल l न केवल आम जनता के लिए अपितु उच्च ओहदे वाले मुख्य मंत्री और प्रधान मंत्रियों के लिए भी l जैसा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से भारत की स्थिति देख रहे हैं l राज वीर सिंह शिक्षक डी ए वी गुआ झारखंड मो० - 9430774737 9771616977
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
......है अनीश्वरवाद बिलकुल न कभी बकवास करना ll न कभी विश्वास करना ll जन-जातियों के वंश के हम लोग हैं ऐसा लिखा l इक 'भरत' जनजाति थी इस देश में कैसा लिखा ! भारत पड़ा है नाम उस जनजाति के ही नाम पर, खुद पर घृणा पढ़ हो रही इतिहास में जैसा लिखा l षड़यंत्र है परदेश का यह पढ़ कभी ऐहसास करना ll न कभी विश्वास करना ll कवि किंकर राज वीर सिंह डी ए वी गुआ झारखंड
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
है संस्कृति का ह्रास मित्रों न कभी इतिहास पढ़ना l न कभी विश्वास करना ll न देश का न जाति का न धर्म का अभिमान जगता l निज संस्कृति व सभ्यता का न कदापि मान जगता l इस देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा पर बड़ा विश्वास था पर, क्यों नहीं इतिहास पढ़कर देश पर स्वाभिमान जगता l प्राचीन गौरव आर्यों का बन गया उपहास करना l न कभी विश्वास करना न कभी पैदा हुए थे कृष्ण ही न राम ही न कभी ऋषि मुनि हुए यह देश था बदनाम ही वेद की तो हैं उड़ा दी धज्जियाँ दुख है बहुत, पर निरा यह व्यर्थ है क्योंकि पढ़ी आवाम है