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ग्रामीण भारत में एमएसएमई और कुटीर उद्योग को पंचायत के माध्यम से सहायता

ग्रामीण भारत में एमएसएमई और कुटीर उद्योग को  पंचायत के माध्यम से सहायता
आरंभ करने की तिथि :
Apr 24, 2022
अंतिम तिथि :
Apr 30, 2022
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

24 अप्रैल को प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले पंचायती राज दिवस के अवसर पर सतत ...

24 अप्रैल को प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले पंचायती राज दिवस के अवसर पर सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के विभिन्न आर्थिक पहलुओं को पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शामिल किया जाता है। आज़ादी का अमृत महोत्सव, पंचायती राज मंत्रालय और MyGov सभी देशवासियों से उनके अमूल्य विचार एवं सुझाव आमंत्रित करता हैं जो कि पंचायती राज प्रणाली के माध्यम से ग्रामीण भारत में एमएसएमई और कुटीर उद्योग को सहायता प्रदान कर सकता हैं।

एक सुव्यवस्थित शासन, विशेष रूप से स्थानीय स्तर पर पूरे देश के लिए लाभकारी साबित होता है। भारत 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के माध्यम से समावेशी और जन-केंद्रित सतत विकास हासिल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र 2030 एजेंडा का एक आवश्यक भागीदार भी है। इस प्रकार, भारतीय नागरिकों के सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन की दिशा में भारत सरकार और स्थानीय निकायों के प्रयासों से पंचायती राज दिवस का उत्सव सही मायनों में मनाया जा सकेगा।

हम आपके विचारों और सुझावों का महत्व समझते हैं जो कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में देश की पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।

सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2022 है

फिर से कायम कर देना
317 सबमिशन दिखा रहा है
C K Mansoor Rahman
C K Mansoor Rahman 4 साल 4 महीने पहले
Our ancient and historical country India is the majority of "HINDU"S" brothers and sisters. But Non Hindu's and Brahmins are comes under "MINORITY CATEGORY" therefore provide more loan facilities for msme loans for further development of cottage industries all over our country India 🇮🇳.
AyurMart
AyurMart 4 साल 4 महीने पहले
Click Here रोजगार के जरिए युवाओं को बेरोजगारी से उबारने में कुटीर उद्योग मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए गांव-गांव में कुटीर उद्योग विकसित करने की जरुरत है। तस्वीर-तकदीर बदलने को गांव-गांव कुटीर उद्योगों को जाल बिछाने की जरुरत है। अधिक से अधिक उद्यमी तैयार करने के लिए प्रत्येक जिले में स्किल डेवलपमेंट केन्द्र खोले जाने चाहिए। बंद पड़े कुटीर उद्योगों को फिर से चालू कराने की कोशिश की जानी चाहिए। नए उद्योग लगाने के लिए प्रक्रिया के सरलीकरण जोर दिया जाना चाहिए है।