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दूरसंचार सेवाओं के शुल्क से संबंधी मुद्दों पर परामर्श पत्र

आरंभ करने की तिथि :
Jan 07, 2020
अंतिम तिथि :
Jan 31, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को ट्राई अधिनियम, 1997 के तहत ...

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को ट्राई अधिनियम, 1997 के तहत दूरसंचार सेवा प्रदाता द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं का शुल्क विनियमित करने के लिए अधिकृत किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत के दूरसंचार क्षेत्र में विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के शुल्क में कई बदलाव देखे गए हैं। इससे न केवल दूरसंचार सेवाओं के उपयोग में तेजी आई है, बल्कि इसके परिणामस्वरूप भारत में दूरसंचार सेवाओं का टैरिफ भी दुनिया में सबसे कम हुआ है।

पिछले कुछ महीनों में, भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की स्थिति बेहतर बनाने और दूरसंचार सेवाओं के लिए न्यूनतम कीमत तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। ट्राई ने अब तक कई कारणों से दूरसंचार टैरिफ के संबंध में नरमी का रूख अपनाया है। इससे सेवा प्रदाताओं को बाजार की मांग के अनुसार अपने टैरिफ को डिजाइन करने की स्वतंत्रता मिली है। पिछले दो दशकों में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में इससे तेजी आई और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है। अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने भी टैरिफ निर्धारण में नियामक के हस्तक्षेप के खिलाफ सलाह दी है।

हालांकि, लगातार बढ़ती डेटा खपत और सेवा की अच्छी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए दूरसंचार के इन्फ्रास्ट्रक्चर के रख-रखाव व सुधार में बहुत अधिक निवेश की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में तेजी से तकनीकी परिवर्तन हेतु बड़े पूंजी निवेश की आवश्यकता है। अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्रों के लिए भी दूरसंचार क्षेत्र इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करता है। इसलिए दूरसंचार क्षेत्र का क्रमिक विकास व स्वास्थ्य बनाए रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

दूरसंचार क्षेत्र की महत्ता को ध्यान में रखते हुए टैरिफ से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सभी हितधारकों से सुझाव व राय हेतु "टेलीकॉम सर्विसेज के टैरिफ इश्यूज" पर एक परामर्श पत्र 17 दिसंबर, 2019 को जारी किया गया है।

ट्राई की वेबसाइट (www.trai.gov.in) पर "टैरिफ इश्यूज ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज " पर परामर्श पत्र अपलोड किया गया है। परामर्श पत्र में उल्लिखित मुद्दों पर हितधारकों से 17 जनवरी, 2020 तक लिखित टिप्पणियां और 31 जनवरी, 2020 तक जवाबी टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं।

"दूरसंचार सेवाओं के टैरिफ से संबंधित मुद्दे " पर परामर्श पत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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AMIT DUBEY
AMIT DUBEY 6 साल 7 महीने पहले
4G के जमाने मे 2G की स्पीड दी जाती है । 3G नेटवर्क कार्य नही करता । कम से कम मिनिमम स्पीड तो तय करे । 49 के अनिवार्य रिचार्ज से लोग अब थक रहे है जल्द ही आपको शटडाउन देखना पड़ेगा । BSNL के भ्रस्ट लोगों की पहचान करे । इन्होंने कितनी बड़ी कंपनियों से घूस खाये है । खुद 4G देता देने वाले अब 4G लांच कर रहे है जो लाभ सरकार को होना चाहिए वो दूसरी कंपनियां सहज प्राप्त कर लेती है । ऑफिस और राजनेताओं , अधिकारियों का फ्री बिल तत्काल प्रभाव से बंद करे । जब मोटा वेतन पा रहे है तो देने में रोते क्यो है ।
THAMESHWAR Sahu
THAMESHWAR Sahu 6 साल 7 महीने पहले
Another significant thing can be done in todays date is, developing that Star link satelite setup , which can be used for internet and voice communication even in those remote areas where today we even do not have mobile calling facilities.... The high revenues coming from the telecom sector can be used for research & developement in setelite internet field.. I am waiting for the day when we will get network from satelite and everyone will use high speed internet connection .
AMIT DUBEY
AMIT DUBEY 6 साल 7 महीने पहले
आप लोगो ने राजस्व वृद्धि के लिए कंपनी पर अधिभार बढ़ाया किन्तु वो बोझ जनता को ही चुकाना पड़ा । क्योंकि कंपनियां तो प्रॉफिट की दलाल है । वे अपना अधिकतम हिस्सा बनाती है । आपको चाहिए उनके द्वारा लगाए गए मूल्य की सही समीक्षा हो । एक तय मूल्य निश्चित किया जाए ताकि कोई चैनल मूल्य उगाही का कार्य न करे । हम सभी जनता पहले 153 रुपये अनिवार्य टैक्स देती है 75 फ्री चैनल के और फिर प्रत्येक 25 चैनल के लिए भी 18% अलग से GST । तो फ्री क्या हुआ और अधिकतम GST क्यों ? सभी चैनल का एक साथ GST लिया जाए ।
Amar Singh Tomar
Amar Singh Tomar 6 साल 7 महीने पहले
बंगलुरु कर्नाटक में मैंने एक ही नंबर से लगभग सभी टेलिकॉम कम्पनियों के प्लान, पोर्टिंक के द्वारा युज़ किया। सबसे अच्छा BSNL है। 4G सेवा भी जल्द ही शुरू करने वाले हैं। उनके प्रीपेड प्लान सस्ते और बेहतर हैं। आजकल टैरिफ प्लान की validity 24 दिनों की है, जो पहले 28 दिनों की थी। इसे 30 दिनों का करना आवश्यक है जिससे उपभोक्ताओं को ज्यादा अवधि मिले। इसलिए अनुरोध है कि सभी टेलिकॉम कम्पनियों को अपने मासिक प्लान की अवधि 30 दिनों का करने का निर्देश दें। साथ ही साथ नेटवर्क कवरेज पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।