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देश में और विश्वभर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपनाई गई सर्वश्रेष्ठ पद्धतियाँ

Best Practices for Tourism by State Governments and Across the World
आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jul 17, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों द्वारा एवं विश्व भर में ...

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों द्वारा एवं विश्व भर में किये गए सर्वोत्तम उपायों पर चर्चा करें।

फिर से कायम कर देना
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Devesh Tomar
Devesh Tomar 11 साल 6 महीने पहले
When we go through the hurdles in our development 1 point which we cannot neglect is our huge population. So it becomes very important for us to make policy for controlling the population of our country. For this purpose it becomes necessary for us to make family planning compulsory in India. It will help us to control the population explosion in our country. Make policies accordingly and execute them in a much better way. It will lay a foundation for the better developed generation of India.
Trilok Sindhwani
Trilok Sindhwani 11 साल 6 महीने पहले
To be development oriented - we need to develop development oriented cooperative organisations like Amul. Each organisation, especially educational institutes should aspire to be best in their area. Identify the best in the world, try to learn their ways, develop best practices with local context and relevance. Practice and share learning and knowledge.
Joginder Pathania
Joginder Pathania 11 साल 6 महीने पहले
maaniye prime minister ji..............hum yeh chahte hai ki jitne bhi govt school hai un sabhi main cbse syllabus ho taki har garib ka bacha padh sake isse aamdani bhi bahot hogi kyuki jitne bhi private schoolon main garib ke bache padhte hai bo sabhi govt school main aa jayenge............
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 साल 6 महीने पहले
और प्रशासनिक अधिकारियों को लोक सेवक कहा जाने लगा, लेकिन अपने चाल, चरित्र और स्वभाव में वह सेवा पहले की भांति ही बनी रही। आजाद हिन्दुस्तान के प्रभावी जिम्मेदारों ने इन्हे ताकतवर बना दिया है। वे इतने गुरूर में होते हैं कि मत पूछिए। वे ऐसा करने का साहस केवल इसलिए कर पाते हैं कि उनके पास अधिकार हैं, जिन्हें हमारे ही विकलांग-से लोकतंत्र ने दिया है। हमारे राजनीतिज्ञ करना चाहें, तो पांच साल में व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है,
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 साल 6 महीने पहले
, जो अधिकांशत: अंग्रेज अफसर होते थे। भारतीय लोग मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों के रूप में सरकारी सेवा में भर्ती किए जाते थे, लॉर्ड मैकाले द्वारा तैयार किए गए शिक्षा के मॉडल का उद्देश्य ही अंग्रेजों की हुकूमत को भारत में मजबूत करने और उसे चलाने के लिए ऐसे भारतीय बाबू तैयार करना था, जो खुद अपने देशवासियों का ही शोषण करके ब्रिटेन के हितों का पोषण कर सकें। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद भारत में अंग्रेजो की जगह सरकार ने ले ली और भारतीय सिविल सर्विस का नाम बदलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा कर दिया गया और प्र
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 साल 6 महीने पहले
और आज वर्त्तमान सरकार इसी शब्द का जबरदस्त प्रयोग कर रही है लेकिन आज जो हालत है, उसे देख कर कहना पड़ता है कि अपना राज है कहां? उस लोक का तंत्र कहां नजर आता है, जिस लोक ने अपने ही तंत्र की स्थापना की? आज चतुर्दिक अफसरशाही का जाल है। लोकतंत्र की छाती पर सवार यह अफसरशाही हमारे सपनों को चूर-चूर कर रही है। ब्रिटिश हुकूमत के समय जनता के हित, उसकी जरूरतें और उसकी अपेक्षाएं दूर-दूर तक उसके सरोकारों में नहीं थे। नौकरशाही के शीर्ष स्तर पर इंडियन सिविल सर्विस के अधिकारी थे,
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 साल 6 महीने पहले
यह सर्वविदित है कि भारत में नौकरशाही का मौजूदा स्वरूप ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की देन है। इसके कारण यह वर्ग आज भी अपने को आम भारतीयों से अलग, उनके ऊपर, उनका शासक और स्वामी समझता है। अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए यह वर्ग जितना सचेष्ट रहता है, आम जनता के हितों, जरूरतों और अपेक्षाओं के प्रति उतना ही उदासीन रहता है।और पूरी तरह से देश के विकास को रोके हुए है. भारत जब गुलाम था, तब महात्मा गांधी ने विश्वास जताया था कि आजादी के बाद अपना राज यानी स्वराज्य होगा,