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नया ज्ञान

New Knowledge
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

हम एक गतिशील ज्ञान आधारित समाज में रह रहे हैं। नई प्रौद्योगिकीयां और ...

हम एक गतिशील ज्ञान आधारित समाज में रह रहे हैं। नई प्रौद्योगिकीयां और चुनौतियां अध्ययन के नये क्षेत्रों को जन्म देती हुई दिखाई दे रही हैं। हमारे उच्चतर शिक्षा संस्थानों को वैश्विक परिदृश्य में ज्ञान के नये क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए और इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए। हम वैश्विक राष्ट्रमंडल में अपनी शिथिल क्षमता को कैसे बनाकर रख सकते हैं।

फिर से कायम कर देना
3120 सबमिशन दिखा रहा है
Dr Anjoo Sood
Dr Anjoo Sood 10 साल 11 महीने पहले
भाषा ही संस्कृति और संस्कार की वाहक है अतीत से जुड़े रहने का सरल माध्यम है और भाषा व्याकरण के विना अधूरा है हम आग्रह करना चाहते है कि सीबीएसई बोर्ड में क्लास ९ से १२ तक हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी विषय में व्याकरण कि परीक्षा कि अलग व्यवस्था कि जाये व्याकरण में पास होना अनिवार्य किया जाये
Dr Anjoo Sood
Dr Anjoo Sood 10 साल 11 महीने पहले
वर्तमान विद्यार्थी Twitter, Facebook, Whatsapp का प्रयोग सन्देश देने व् विचार व्यक्त करने में कर रहे है I यह पीढ़ी कम शव्दो में विषय को व्यक्त करने में निपुण है, परन्तु सहित्यिक‌ शव्दावली और व्याकरण से बहुत दूर होती जा रहॆ है व्याकरण हर भाषा कि आत्मा है, प्राण है किन्तु वर्तमान विद्यार्थी व्याकरण कि तरफ बहुत उदासीन हो गया है उसे छंद, अलंकार, मुहावरे लोकोक्ति का ज्ञान न के बरावर ही है
MOHD.PURA TONK
MOHD.PURA TONK 10 साल 11 महीने पहले
हम वैश्‍वि‍क राष्‍टमण्‍डल में अपनी क्षमता बढाने हेतु हमारे उच्‍चतर शिक्षा संस्‍थानों में वि‍श्‍व स्‍तरि‍य शैक्षि‍क संस्‍थानों के समान भौति‍क एवं शैक्षणि‍क सुवि‍धाओं का वि‍कास कर सकते है। साथ ही इन संस्‍थानों में दक्ष वि‍श्‍व स्‍तरि‍य फैकल्‍टि‍ नि‍युक्‍त कर सकते है। इससे हमारे संस्‍थान वि‍श्‍व स्‍तरि‍य संस्‍थानों से प्रति‍स्‍पर्दा कर सकते है और हम वैश्‍वि‍क राष्‍टमण्‍डल में उच्‍च शि‍क्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते है।