RAJEEV KUMAR_9
4 साल 1 महीना पहले
नमस्कार सर जी, ग्रामीण स्तर पर सरकार का कामकाज सराहनीय है। गांव में शौचालय या सरकारी आवास यदि किसी ग्रामीण को उपलब्ध हुआ है और सरकारी पैसा ग्रामीण के ही खाते में ही गया है, फिर भी ग्राम प्रधान ग्रामीणों से कुछ प्रतिशत पैसा वसूलता है। यदि गांव में रास्ता बनता है, नाला बनता है या कोई भी अन्य कार्य ग्रामीण हित में होता है, तो सबसे पहले वरीयता उच्च जाति के मोहल्ले को दी जाती है, सफाई कर्मी भी काम उसी मोहल्ले मेंं ज्यादा करता है। इसी तरह, मनरेगा के कार्य में भी लोग काम पर नहीं जाते और उनकी हाजिरी दर्ज की जाती है, बाद में जब पैसा ग्रामीण के खाते में जाता है, तो अधिकारी पैसे का 50 प्रतिशत वह ग्रामीण को दे देता है और 50 प्रतिशत अपने पास रखता है। इसमें ग्रामीण को कार्य किए बिना ही पैसा मिल जाता है। पोर्टल पर अपडेट ग्राम में चल रहे काम जैसे नलकूप मरम्मत, पंचायत घर मरम्मत अर्थात् ग्राम सुधार के नाम पर आया पैसा ग्राम प्रधान स्वयं निगल जाता है, जबकि गांव में कोई सुधार होता ही नहीं है और कोई निरीक्षण करने भी नहीं आता। कृपया प्लांनिंग पोर्टल पर संपूर्ण ब्यौरा प्रदर्शित करें।
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