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पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल और लागत प्रभावी पद्धति से ई-अपशिष्ट की री-साईक्लिंग

E-waste recycling is an Environmentally-friendly and cost-effective method
आरंभ करने की तिथि :
Feb 04, 2015
अंतिम तिथि :
Feb 11, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

इलेक्‍ट्रॉनिक अपशिष्‍ट (ई-अपशिष्‍ट) से पर्यावरणीय अवक्रमण के कारण ...

इलेक्‍ट्रॉनिक अपशिष्‍ट (ई-अपशिष्‍ट) से पर्यावरणीय अवक्रमण के कारण एक वैश्‍विक संकट उत्‍पन्‍न होता है। भारत एक उभरती हुई अर्थव्‍यस्‍था के रूप में पर्यावरणीय जागरूकता की कमी और सामाजिक आर्थिक मुद्दों के कारण उत्‍पन्‍न होने वाले ई-अपशिष्‍ट की मात्रा और उसके प्रबंधन संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत में ई-अपशिष्‍ट प्रबंधन की प्रमुख समस्‍या इस बात को लेकर है कि इसकी री-साईक्‍लिंग गैर-औपचारिक क्षेत्रों द्वारा की जा रही है, जो स्‍वास्‍थ्‍य और पर्यावरण संबंधी मानदंडों का अनुपालन नहीं करते हैं ।

जहां एक ओर ई-अपशिष्‍ट पर्यावरण के लिए एक समस्‍या उत्‍पन्‍न करता है, वहीं दूसरी ओर यह मूल्‍यवान संसाधनों का एक स्रोत भी है तथा इसमें ऐसी बहुत सी मूल्‍यवान धातुएं और खनिज़ संसाधन निहित होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से बहुत ही सीमित मात्रा में उपलब्‍ध हैं ।

जहां एक ओर पर्यावरण एवं वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ई-अपशिष्‍ट के संदर्भ में कानूनों, दिशा-निर्देशों का अधिनियमन कर रहा है और उसने इलेक्‍ट्रॉनिक अपशिष्‍ट के सुरक्षित रख-रखाव के संदर्भ में ई-अपशिष्‍ट (प्रबंधन और रख-रखाव) नियमावली, 2010 तैयार की है, वहीं दूसरी ओर इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई) ने पर्यावरणीय और स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी मानकों का अनुपालन करते हुए ई-अपशिष्‍ट की री-साईक्‍लिंग और मूल्‍यवान संसाधनों के निष्‍कर्षण के लिए अपने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों के ज़रिए स्‍वदेशी प्रौद्योगिकी विकास का समाधान किया है ।

इस दिशा में डीईआईटीवाई ने मूल्‍यवान धातुओं की प्राप्‍ति के लिए प्रिंटिड सर्कटिक बोर्ड (पीसीबी) के संसाधन हेतु विकसित की गयी प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन हेतु बंगलौर में एक प्रदर्शन प्‍लांट शुरू किया है । डीईआईटीवाई ने अपनी एम-सिप्‍स योजना के अंर्तगत उपलब्‍ध सहायता की भांति ई-अपशिष्‍ट के प्रशंस्‍करण हेतु प्राधिकृत री-साईक्‍लरों को पूंजी सब्‍सीडी प्रदान करने के लिए भी प्रस्‍ताव किया है । इसके अलावा स्‍वदेशी प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल करने वाले री-साईक्‍लरों को अतिरिक्‍त लाभ भी दिया जा सकता है ।

डीईआईटीवाई प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ नीतिगत प्रसासों दोनों के संदर्भ में ई-अपशिष्‍ट संबंधी मुद्दों के समाधान हेतु विचार और सुझाव आमंत्रित करता है ।

आप अपनी टिप्पणियां 10 फ़रवरी 2015 तक भेज सकते हैं।

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Natesh P S
Natesh P S 11 साल 7 महीने पहले
Respected PM, the plastic and e-waste is generated in huge quantities across India. there are technology available, where these plastic bags can be melted and oil taken out. The % output is very less and hence, none is interested to take this forward. The technology available is not financially viable. support from the government in terms of technology being used abroad, know how and finance will help this activity to mature and save environment.
ashish dabas
ashish dabas 11 साल 7 महीने पहले
In villages of India we can see that nearby all homes have huge e waste and they don't know the harmfull effects of that e- waste and throw it in garbage. So we have to awake peoples in rural areas about the effects and must have small e-waste recycling plants near to villagees.Jai Hind
Dinesh Naik
Dinesh Naik 11 साल 7 महीने पहले
Show Strength. Its like no one is finding a entrepreneurship in this matter of turning e-waste into useful things and making profit as well as service to country. people having interest in starting a entrepreneurship , there needs a teamwork to start a entrepreneurship ,and its you people. I want aspirants to send a email at dineshmk53@gmail.com on feb 25 I have planned to check the strength , if its enough good i would like to start a E-WASTE MANAGEMENT company with your partnership.
MUDIT JOSHI
MUDIT JOSHI 11 साल 7 महीने पहले
जी हा इस प्रकार के तरिको को साकार बनाने के लिये सबसे पहले समस्त उपभोक्ताअो को पुनर्चक्रण की प्रकिया हेतु निकटतम स्थानो पर सुविधाएे प्राप्त होनी चाहिए तथा इस प्रकिया का सामान्य ज्ञान सभी उपभोक्ताअो को होना चाहिए | सरकार भी मुख्य शहरो मे अपने सेवा केन्द्र खोल सकती है |