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फरवरी 2015 में प्रसारित होने वाले “मन की बात” के लिए अपने सुझाव दें

आरंभ करने की तिथि :
Feb 06, 2015
अंतिम तिथि :
Feb 22, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
इस महीने होने वाले “मन की बात” कार्यक्रम के दौरान माननीय ...
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Vijay Dani
11 साल 4 महीने पहले
when I was teaching MBA students, I asked them why they want to do MBA. Some said good job, some for business to prosper, some said for good value in marriage proposals. But all of them wanted me to tell them what questions are expected and what should be the answer.I am sure all of us who have gone through exams have studied only for passing the exam. What is the use of such exams? Even I challenge those who have done IAS, IFS exams. get fresh brains to think on this
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Priyank Sheth
11 साल 4 महीने पहले
I passed my board exams just in the pervious year. Prior to board exam it always gives a feeling of tensions. Even I felt the same. But then I thought upon one thing that I just need to give my best without any kind of tensions and fear and God will take care of the rest to give us the best. So I would just give only one advice to my friends appearing for board exams that work hard and smart and give the best efforts that you can give and have faith in God.
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lalit yadav
11 साल 4 महीने पहले
मा. प्र.मंत्रीजी सरकार गरीब बच्चों की पढाई के लिए मददगार राशि देती है जिसे असली गरीब बच्चे जिनके माता पिता अनपढ है या कम पढे लिखे हैं उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं होती यह सुविधा विद्यालय द्वारा निश्चित तौर पर उपलब्ध करायी जानी चाहिए इसके लिए भी सरकार द्वारा मिशन शिक्षा कार्यक्रम को पुरजोर तरीके पर चलाया जाना चाहिए।अच्छे शिक्षकों को समय समय पर सरकार द्वारा पुरस्कृत किया जाना चाहिए क्योंकि वह शिक्षक ही है जो अच्छे संस्कार वाला शिक्षित वर्ग देश सेवा के लिए देते हैं उनको प्रप्रशिक्षण देना चाहिए
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vijay Dixit
11 साल 4 महीने पहले
Sir my son is in X std I am worried about clashing of world cup cricket & IPL every time during exams.can we avoid such events during exam period.
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Sanjay Chaturvedi
11 साल 4 महीने पहले
1979 मेरी हाईस्कूल परीक्षा, केंद्र बजरंग विद्यालय, बाँदा, जो नक़ल और debar के लिए कुख्यात, हमारे विद्यालय का परीक्षा केंद्र था| नक़ल का आतंक अच्छे विद्यार्थिओं के लिए अभिशाप है| पहले ही दिन छत पर नक़ल देने में तत्पर लोगों के दौड़ने की आवाज, चपरासी के हाथ में नक़ल का बोरा, अचानक ही खलबली में भागना और सूचना देना कि नक़ल पकड़ने वाला दल है, किसी भी गंभीर बच्चे के मन में आतंक पैदा कर सकता है|आज भी नक़ल माफिया की बात होने पर यह वाकया मुझे परेशान करता है| बहुत बच्चे अभिशप्त हैं इस यंत्रणा को झेलने के लिए है|
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HIREN PATEL
11 साल 4 महीने पहले
Blind IAS ASPIRANTS of gujarat have to go Mumbai to appear in UPSC Exam. UPSC should provide exam center in all state for blind examiner. We should be sensitive for people with special needs. How can we imagine blind students will travel from BHUJ TO MUMBAI in train for exam?
sir I think you will do something for these blind people.
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vanshita bhatia
11 साल 4 महीने पहले
Boards is not much burden to the students now as it was 10 years back but still a disadvantage arises now boards papers are noy set according to the NCERT books.n number of books are added for an examination all the books are to be studied even the material in yhese reference books is not according to the NCERT. Now it it upto just these reference books no space for NCERT in the question papers . No use from studying grom the NCERT. SHOULD WE consider NCERT for boards or these reference books?
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lalit yadav
11 साल 4 महीने पहले
मा. प्र.मंत्रीजी सीमित शब्दों मे पूरी बात बताना संभव नहीं है अतः संक्षेप में है हमारी वत॔मान शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है कि बच्चों में छिपी प्रतिभा को हमारे शिक्षक निकाले क्यो न कक्षा का हरेक बच्चा अच्छा विधार्थी अच्छा खिलाडी अच्छा वक्ता अच्छा गायक व अच्छा नागरिक बने हर मां-बाप बच्चे के विधालय नही जा पाते हरेक अपने बच्चों को महंगे विधालयो मे नही पढा सकते अधिकतर बच्चे भी माध्यमिक कक्षा तक दिशा हीन केवल अगली कक्षा मे जाने के लिए पढ़ते है उनमें छुपी प्रतिभा को जागृत करने की आवश्यकता है
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deepak goyal
11 साल 4 महीने पहले
जब से आर टी इ कानून के तेहत अध्यापकों पर अपने छात्रों की गलतियों को सुधारने के लिए किसी भी दंडात्मक कार्यवाही पर रोक लगी है तभी से बच्चे ज्यादा निरंकुश हो गए हैं मेरा अनुभव कहता है कोई भी संस्था , परिवार, दफ्तर बगैर सख्ती के नहीं चल सकता अत: गुरु जी के हाथ में डंडा जरुरी है | हरियाणा में तो 9वीं कक्षा तक पास होना जरुरी ही नहीं है , जैसे हमारे देश में ज्यादातर राजनितिक कम पढ़े हैं ऐसा ही ये हमारे बच्चों को बनाना चाहते हैं
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vanshita bhatia
11 साल 4 महीने पहले
Sir, I agree that today class 10 boards do bot burden us as much than it was afew years ago., where the whole of the NCERT book of all the subkects with allbthe chapters came up in borads this time boars is centered to the 2nd half of the book. But now books have increased 'n'
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