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भारत के अनोखे, उपयुक्त लेकिन कम जाने जाने वाले उत्सवों/मेलों/संस्कृति के संरक्षण के लिए नवीन कदम तथा उपाय और वैश्विक स्तर पर उनके प्रसार के तरीके

भारत के अनोखे, उपयुक्त लेकिन कम जाने जाने वाले उत्सवों/मेलों/संस्कृति के संरक्षण के लिए नवीन कदम तथा उपाय और वैश्विक स्तर पर उनके प्रसार के तरीके
आरंभ करने की तिथि :
Aug 24, 2022
अंतिम तिथि :
Dec 31, 2022
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

“देश के उत्सव”पर्यटन मंत्रालय द्वारा भारत सरकार के सहयोग से आपके ...

“देश के उत्सव”पर्यटन मंत्रालय द्वारा भारत सरकार के सहयोग से आपके लिए शुरू किया गया एक अभियान है। पर्यटन मंत्रालय द्वारा विकसित और शुरू की गई डिजिटल पहल उत्सव पोर्टल वेबसाइट का लक्ष्य दुनिया भर में देश के विभिन्न क्षेत्रों और लोकप्रिय पर्यटक गंतव्यों के संवर्धन के लिए पूरे भारत में होने वाले समारोहों, उत्सवों और लाइव दर्शनों का प्रदर्शन है। यह पोर्टल उत्सवों, समारोहों और ऑनलाइन पूजा/आरती के बारे में माह-वार तथा राज्य-वार कैलेंडर विषय वस्तु दर्शाता है। पर्यटन मंत्रालय भारतीय नागरिकों से ऐसे नवीन तरीकों के बारे में सुझाव आमंत्रित करता है जिनसे हम विलुप्त होते अपने उत्सवों/संस्कृति को बचा सकें और दुनिया भर में उनका प्रचार कर सकें। पर्यटन मंत्रालय  सभी यूजर्स को उत्सव प्लेटफॉर्म/वेबसाइट पर जाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जहां माईगव साथी देश भर में हो रहे विभिन्न आयोजन, त्योहारों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं एवं कहीं से भी उक्त कार्यक्रम को लाइव देख सकते हैं। https://utsav.gov.in/ मंत्रालय द्वारा नागारियों से प्राप्त सर्वोत्कृष्ट प्रविष्टियाँ चुनकर उन्हें MyGov पेज पर दर्शाया जाएगा। जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2022 है|
फिर से कायम कर देना
1070 सबमिशन दिखा रहा है
praveen soni
praveen soni 4 साल 3 सप्ताह पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी प्रणाम हमारे छत्तीसगढ़ में भी बहुत से ऐसे प्राचीन स्थल है ऐतिहासिक पुरातात्विक प्राकृतिक इन क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर इन स्थलों को पर्यटन ने क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है सिरपुर मल्हार सरगुजा मैनपाट क़ोटाडोल, रामगढ़ सीता बंगरा, लक्ष्मण बंगरा ऐतिहासिक और धार्मिक पुरातात्विक क्षेत्रों के लिए जाने जाती है इन 22 वर्षों में छत्तीसगढ़ में भी बहुत से प्राकृतिक ऐतिहासिक पुरातात्विक धार्मिक स्थल है जहां सर्वे कर इन क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से उन्नत विकास कर आगे बढ़ाया जा सकता है मैं अपने इन विचारों के साथ आपको प्रणाम करता हूं
Kislay kant Singh
Kislay kant Singh 4 साल 3 सप्ताह पहले
NATIONAL TRIBAL FESTIVAL AS WE KNOW THAT THERE ARE MANY TRIBAL COMMUNITIES IN INDIA AND THERE ARE AS MANY STATE LEVEL TRIBAL FESTIVAL IN INDIA SHUCH AS HORNBILL FESTIVAL OF NAGALAND, NAGOBA JATRA OF TELANGANA BUT THERE IS NON-AT NATIONAL LEVEL WHICH CELEBRATE IT LIKE A WHOLESOME FAIR.MY SUGGESTION IS OF A NATIONAL FESTIVAL FOR THE WHOLE TRIBAL IDENTITES OF THE NATION, THIS WILL GET PEOPLE AN WORLDWIDE ATTENTION. THIS WILL NOT ONLY CREATE A CHANCE FOR INCOME FROM THERE HANDICRAFT SKILLS BUT ALSO HELP THEM SOCIALLY AS IN RECENT TIME WE HAVE SEEN HATE-CRIME AGAINST NORTH EAST INDIANS BECAUSE OF THERE SIMILARITIES TO OTHER ASIAN’S , THIS WAY WE CAN CREATE AWARENESS AMONG OUR NATION PEOPLE THAT THIS PEOPLE ARE ALSO THE PART OF OUR COUNTRY.THIS WILL BE AN ENJOYABLE FESTIVAL FOR WHOLE NATION AND IT WILL CREATE SENSE OF NATIONALISM IN THE WHOLE NATION.AS TRIBAL COMMUNITY CULTURE CAN GIVE A TOOL TO CREATE A STRONG SENSE OF FIGHT AGAINST ENVIROMENTAL DEGRATION.
Lisa Kar
Lisa Kar 4 साल 3 सप्ताह पहले
India is a great country,full of vivid cultures and festivals but the main problem is that many people do not feel proud on this fact.So,the first step in my opinion should be increasing this sense of proudness amongst the people.This can be done starting from the school level itself.The schools should impart knowledge about India's diversity not just through the lessons but through various fun filled activites.Trips to such places should be organised to increase the enthusiasm.Finally, Social media if utilised can also provide a great help in promoting and protecting our culture.As India is a land of cultures and festivals.We should be proud of being born in such a great country. Thank you.
satyam kishore jha
satyam kishore jha 4 साल 3 सप्ताह पहले
है ऐसे में अगर उनके ऊपर ध्यान दिया जाए तो हमारे देश का मुद्रा भंडार मे बहुत ही ज्यादा बढ़ोतरी होगी एवं हमारी संस्कृति पूरी दुनिया में विख्यात होगी इतना ही नहीं दुनिया को यह भी पता चल जाएगा कि हमारी सिविल इंजीनियरिंग कितनी मजबूत हुआ करती थी
satyam kishore jha
satyam kishore jha 4 साल 3 सप्ताह पहले
भारत में हजारों ऐसे मंदिर हैं जो कला और संस्कृति का नायाब नमूना प्रस्तुत करते हैं अगर भारत सरकार उन सभी मंदिरों को जीर्णोद्धार की स्वीकृति प्रदान करें तो भारत में हमारी संस्कृति को पर्यटन के रूप में उचित अवसर प्राप्त हो सकेगा एवं हमारी कला और संस्कृति पूरी दुनिया में विख्यात हो सकेगी हजारों ऐसे गुमनाम मंदिर हैं जिनकी कलाकृति अपने आप में आश्चर्यजनक है मंत्रालय तो है कला और संस्कृति का परंतु उनके जीर्णोद्धार के लिए सरकार के पास समय भी नहीं है और ना ही उस और किसी का ध्यान जाता
Prabhu Narayan Singh
Prabhu Narayan Singh 4 साल 3 सप्ताह पहले
बलिया उत्तरप्रदेश के ददरी मेला और रसड़ा की प्रसिद्ध श्री रामलीला जो पूर्वांचल का बहुत ही मशहूर है इसे वो पहचान नहीं मिल पाई है जितना यह प्रसिद्ध है। ददरी मेला जो एक माह चलता है और यह कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र स्नान से 15 दिन पहले पशुओं के मेले से शुरु हो जाता है। रसड़ा बलिया की श्री राम लीला श्री राम के वनवास से शुरु होकर श्री राम के राज्याभिषेक के बाद श्री सीता जी के कलेवा भेजकर समाप्त होता है इसका प्रचार प्रसार किया जाए।