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भारत में नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव को कैसे कम किया जाए

आरंभ करने की तिथि :
Nov 03, 2014
अंतिम तिथि :
Feb 01, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र ...
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d biswas
11 साल 2 महीने पहले
Dear PM,
Our country needs huge investment on infrastructure, education and health to improve the living standard of the poor. consistent Current Account Deficit(CAD) is one of the reason of not having enough money for Govt. investment as the deficit is generally funded through borrowing, hence increased interest burden. We spend thousands of million to purchase Operating Systems(OS) from Micro Soft etc. The same can easily be made in India and reduce CAD.
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Bhupinder Singh Rana
11 साल 2 महीने पहले
सबसे पहले शिक्षा के माध्यम से नोजवानों को नशीले पद्धार्थो के दुष्प्रभवों के बारे में समझाना जरुरी है । स्कूलों में इस विषय पर शिक्षा जरुरी है ।
दूसरा नशीली दवाओं और पद्धार्थो का काला धंधा करने वालों को सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए । इन की खबर देने वालों को जयदा से जयदा इनाम मिलना चाहिए ।
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Anirban Debnath
11 साल 2 महीने पहले
india should install automated xray checking system to its international chelk point and automated computer should moniter,verify and preserved all record.in the case of drug recovery all information should preserved digitally that can't be changed.last but not in the list, india should increase human intel for durg producing plants,chemecals.
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Uday Kumar_2
11 साल 2 महीने पहले
सभी प्रकार के मादक पदार्थों जैसे— शराब, गुटखा, सिगरेट आदी के प्रचार—प्रसार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।
उत्पाद के कवर पर भी सिर्फ नाम, कंपनी का विवरण, संरचना व उत्पाद का विवरण लिखा होना चाहिए, न की कोई भ्रामक शब्द या वाक्य।
बैनर छापकर भी दुकानों के आगे लगाकर प्रचार प्रतिबंधित होना चाहिए।
गुटखा आदी के प्रचार—प्रसार के लिए दुकान के सामने लटकाना भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। ग्राहक के मांगने पर दुकानदार द्वारा अंदर से निकाल कर दिया जाये, न की सामने दिखता रहे। न दिखेगा न बिकेगा
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DHARAM PARMAR
11 साल 2 महीने पहले
किसान एसा नर्माता है जो अपनी चीज की किमत खुद तय नही करता जबकी बाकि नर्माता लागत+लाभ के आधार पर खुद किमत तय करते हे ।
अगर अभी का समय देखा जाए तो कुदरत भी लागत नही निकलने देती ।
ओर उपर से कँपनिया फसय का बीमा नहीँ देती ॥
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Dasari venkata jayaram prasad prasad
11 साल 2 महीने पहले
For Swachh Barath say no for Drugs
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Dasari venkata jayaram prasad prasad
11 साल 2 महीने पहले
Consumption of Drugs is injurious to Helth
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Dasari venkata jayaram prasad prasad
11 साल 2 महीने पहले
Heathy Life - Happy Life
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Amit_11
11 साल 2 महीने पहले
They should be able to earn enough money by farming, so they can be satisfied with the profession they have, so they do not think about selling their lands, how can we save the farming land, what can we do to motivate the farmers, so we can grow our own food & we do not have to depend on other country in the world, it also should be Make In India project.
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Amit_11
11 साल 2 महीने पहले
In India the value of land has increased such a high level that farmers have started selling their farm land to builders & businessmen .They earn more money by selling their valuable lands than by farming & growing foods for the second largest population in the world, by selling their lands, very few farmers grow up & diversify in the business or better life , but majority of them & their future generation end up using all the money, which is not the solution, farmer of India should be proud.
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