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भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन की क्या भूमिका होनी चाहिए, इससे संबंधित सुझाव दें

Suggestions on the role of the voluntary consumer organisations in tackling the menace of Misleading Advertisements
आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 24, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

देशभर में व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों का ...

देशभर में व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों का प्रयोग किया जा रहा है। पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर वर्ग पर इसका दुष्प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ा है। इन क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनो की एक अहम भूमिका हो सकती है। देश के विभिन्न भागों में कार्य कर रहे स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन जिन्हें उपभोक्ता संबंधी मामलों से निपटने का अनुभव है, वह उपभोक्ताओं, राज्य सरकार, स्थानीय स्व-शासन की इन भ्रामक विज्ञापनों को पहचानने और उनपर उचित कार्रवाई करने में मदद कर सकते हैं।

भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन की भूमिका क्या होनी चाहिए इससे संबंधित सुझाव दें।

आप अपनी टिप्पणियां 23 जनवरी 2015 तक भेज सकते हैं।

भ्रामक विज्ञापनों के बारे में अधिक जानकारी यहाँ से प्राप्त करें-http://cdn.mygov.nic.in/bundles/frontendgeneral/pdf/brief-on-misleading-...

फिर से कायम कर देना
513 सबमिशन दिखा रहा है
sangeet sharma
sangeet sharma 11 साल 7 महीने पहले
पूरे भारत मेंयह नियम लागूकिया जाना चाहिएकिजो भी व्यक्तिसरकारी नौकरी में है।चाहेवो कलेक्टर होया SPया कोई अन्य कर्मचारी।सभी के बच्चेसरकारी स्कूल में ही पढेंगेऔर जिनके बच्चेसरकारी स्कूल मेंन पढते होउन्हें सरकारी नौकरियों सेनिकाल दिया जाए।सभी लोगसमझ सकते है किजब जिले केकलेक्टर और SPतथाअन्य अधिकारीयों के बच्चे सरकारी स्कूल मेंपढ़ना आरम्भ कर देंगे,तो उन स्कूल मेंशिक्षा का स्तरक्या होगाऔरशिक्षक किस तरह कीपढाई वहाँ करवाएँगे।सभी शिक्षक स्कूलसमय पर आएँगेऔरअपना कार्यपूरी ईमानदारी से करेंगे।
sangeet sharma
sangeet sharma 11 साल 7 महीने पहले
पूरे भारत मेंयह नियम लागूकिया जाना चाहिएकिजो भी व्यक्तिसरकारी नौकरी में है।चाहेवो कलेक्टर होया SPया कोई अन्य कर्मचारी।सभी के बच्चेसरकारी स्कूल में ही पढेंगेऔर जिनके बच्चेसरकारी स्कूल मेंन पढते होउन्हें सरकारी नौकरियों सेनिकाल दिया जाए।सभी लोगसमझ सकते है किजब जिले केकलेक्टर और SPतथाअन्य अधिकारीयों के बच्चे सरकारी स्कूल मेंपढ़ना आरम्भ कर देंगे,तो उन स्कूल मेंशिक्षा का स्तरक्या होगाऔरशिक्षक किस तरह कीपढाई वहाँ करवाएँगे।सभी शिक्षक स्कूलसमय पर आएँगेऔरअपना कार्यपूरी ईमानदारी से करेंगे।
Dinesh Kumar
Dinesh Kumar 11 साल 7 महीने पहले
The major contribution to nurture this menace is from our MEDIA. They advertise anything nonsense in the the name of raising funds.Time has come to question the media. Their job is not just fault finding in every matter .They should scrutinise anything before slapping it on the viewers/reader.
Manaswini Parida
Manaswini Parida 11 साल 7 महीने पहले
There should be a single uniform platform (online as well as direct complaint registry through bank accounts) available for all consumers to post their complaint so that legal actions against the advertising body could be made feasible. No third party should be entertained, not even voluntary organizations however, VCO can help transfer complaints to the single online/offline government database. People should have clarity as to where they can register their complaints.