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महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने के संबंध में अपने सुझाव दें

आरंभ करने की तिथि :
Mar 25, 2018
अंतिम तिथि :
May 08, 2019
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

25 मार्च, 2018 को अपने 'मन की बात' के संबोधन के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र ...

25 मार्च, 2018 को अपने 'मन की बात' के संबोधन के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से विचार और सुझाव आमंत्रित किए और कहा कि महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने के संबंध में अपने सुझाव व विचार MyGov पर भेजें। देश में यह उत्सव कैसे मनाया जाए? क्या नये-नये तौर-तरीक़े अपनाए जाएं? इस संबंध अपने विचार यहाँ साझा करें!

फिर से कायम कर देना
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PRAJAPATI MEHULKUMAR NARAYANBHAI
PRAJAPATI MEHULKUMAR NARAYANBHAI 7 साल 10 महीने पहले
Maintaining that the event should serve to increase awareness about Gandhiji globally as well, PM Narendra Modi said it is important that this occasion be celebrated in a manner that ensures Mahatma Gandhi continues to be an inspiration for future generations.mr.prajapati
varsha kisan Chopade
varsha kisan Chopade 7 साल 10 महीने पहले
इस साल गाँधी जयंती के अवसरपर स्वच्छ भारत अभियान के साथ साथ स्वच्छ और सुन्दर लाइब्रेरी हर गांव गांव में खुलना जरुरी है. ग्रामपंचयायत को यह जिम्मेद्दारी देनी चाहिए. बच्चो को किताबे और अख़बार पढ़ने मिलेंगे तो विचारो और ज्ञान में वृद्धि होगी.देश महिलाओको सुरक्षित माहौल मिले.दूसरी बात बच्चो को एकता का महत्व समझाकर अनेक प्रतियोगिताओंका आयोजन करे. तीसरी बात शिक्षा का महत्व समझाकर देश के हर बच्चे को स्कुल में दाखिला मिले. बच्चो को रट्टा मार पढाई से ज्यादा प्रैक्टिकल पर जोर दे. सायंस को बढ़ावा दे.
Vikas Kumar
Vikas Kumar 7 साल 10 महीने पहले
Mahatama Gandhi the Bapu,one of the great personalities of our country India. This year we have to celebrate his birthday by eradicating unemployment from our country. Government should take an initiative to goto every doorstep and provide employment to those who are sitting unemployed at home.
Rohit kumar
Rohit kumar 7 साल 10 महीने पहले
परम् आदरणीय यशस्वी प्रधानमन्त्री मोदी जी को मैं नमन करता हूं। इस बार गांधी जयंती के सुअवसर पर एक कानून बनाया जाये। जिसके तहत प्रत्येक गांव के प्रधान का काम प्रति वर्ष प्रभावी रूप से जांचा जाय। भारत वर्ष जहां ६०% ग्रामीण हैं का विकास गांव के विकास के विना संभव नहीं है। और गांव के विकास के लिए जारी किया गया फंड ग्रामप्रधान और सचिव मिलकर पी जाते हैं। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मेरा गांव आज से 3 साल पहले जैसा था वैसा ही है जबकि मेरे द्वारा planplus.nic.in पर देखने पर करोड़ों रुपए आया हुआ ह
Udai ram mamgain
Udai ram mamgain 7 साल 10 महीने पहले
महोदय क्या कभी किसी ने विचार किया कि स्वतंत्रता आंदोलन में कई बड़े बड़े महापुरुषों ने अपना सर्वस्व बलिदान किया लेकिन सारा श्रेय गांधी जी को ही क्यों, मैं उनके खिलाफ नही हूँ लेकिन जिनके सहारे वो राष्ट्रपिता की उपाधि पाए हैं उनके साथ उनको भी बराबर का संम्मान क्यों नही, क्या नोटों पर गांधी जी का छाया चित्र उचित है अगर हां तो कहीं न कहीं उन वीर सपूतों को भी जगह दे दो जिनके बिना गांधी जी का अस्तित्व ही न था, वो महान थे स्वीकार परन्तु जिन्होंने उनको महान बनाया उन सभी महान वीरों को बराबर का सम्मान मिले,
Udai ram mamgain
Udai ram mamgain 7 साल 10 महीने पहले
महोदय क्या यह सम्भव नही की समाज को जातीय आधार पर न बांटकर आर्थिक आधार पर सरकारी सहायता हो, जो लोग निम्न वर्ग के नाम पर सरकारी तंत्र का फायदा उठाते हैं वही तन्त्र अगर किसी अन्य वर्ग द्वारा दलित सम्बोधन किया जाय तो ये नया sc/st कानून के सहारे उसका दुरपयोग करते हैं, जब आप उस वर्ग का होने का फायदा उठा रहे हो तो स्वीकार भी करना चाहिए, जातिगत भेदभाव के लिए सरकारी नीति जिम्मेदार हैं, सर्व धर्म समान संघ में कभी भी सर नाम सम्बोधन क्यों नही होता इसीलिए की सब एक हैं, सबका साथ सबका विकास तभी सम्भव होगा
Udai ram mamgain
Udai ram mamgain 7 साल 10 महीने पहले
परम् आदरणीय यशस्वी प्रधानमंत्री श्रधेय मोदी जी, जिस प्रकार वर्तमान में भारत की स्तिथि जातिगत संघर्ष से जूझ रही है उस स्तिथि अनुसार "सर्वधर्म समाभाव" की अगर बात हो तो शायद समाज से द्वेष घृणा कम हो सके, सभी राजनीतिक पार्टियों ने हमेशा वोट बैंक के चक्कर मे जातीय समीकरण खेलें हैं जिससे आपसी प्रेम मिटता चला गया, पिछली सरकारों ने भी दलित दलित कह कर एक समुदाय को मुख्य धारा से किनारा किया तो आज हम भी दलितों के मसीहा बनने के चक्करों में सवर्णों के मन मे अपनी नीतियों के कारण द्वेष उतपन्न कर रहे हैं।
chaudhary pirabhai
chaudhary pirabhai 7 साल 10 महीने पहले
150 " व्यसन छोडो भारत महात्मा गांधी जन अभियान " सरकार चलाऐ, प्रधानमंत्री ने आग्रह किया था सबसिडी छोडो परिणाम आया 1 करोड परिवार गेस कनेक्शन की सब्सिडी छोड देते हे तो , प्रधानमंत्री देशवासियो से अपील करो व्यसन छोड़ो भारत कितने करोड नागरिक छोडते हे व्यसन । तमाकु की आवक हे उन से दो गुना नुकसान हे, केन्सर की बीमारी के पीछे अस्पताल , डॉक्टर, दवाई, ओपरेशन मशीनरी, के पीछे कितने खर्च होते हे । युवा पीढ़ी व्यसन मे डुब जाते है, गरीबी हटाओ नारे से नही व्यसन हटाओ से गरीबी कम होगी।