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महिला-पुरूष और सामाजिक अंतराल का सेतु बनाना

Bridging gender and social gaps
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

जबकि उच्चतर शिक्षा में सामान्य भागीदारी दर धीरे-धीरे बढ़ रही है और ...

जबकि उच्चतर शिक्षा में सामान्य भागीदारी दर धीरे-धीरे बढ़ रही है और आज हमारा उच्चतर शिक्षा सकल नामांकन अनुपात 21.5 प्रतिशत है, इसका सामाजिक समूहों और महिलाओं के मध्य समान विस्तार नहीं हो रहा है। उच्चतर सकल नामांकन अनुपात दरों को कायम रखने के लिए समतुल्य वृद्धि आवश्यक है और अतः उच्चतर शिक्षा में महिला-पुरूष और सामाजिक असमानताओं को कम करने के लिए किस प्रकार की सकारात्मक कार्यवाही का सुझाव दिया जा सकता है।

फिर से कायम कर देना
719 सबमिशन दिखा रहा है
Sakshi_10
Sakshi_10 11 साल 4 महीने पहले
राग- द्वेष दोनों ही समाज के लिये कैंसर और कोढ़ हैं जिससे हर किसी को ही सदा ही बचना-बचाना चाहिये अन्यथा समाज कुकृत्य से ग्रसित हो भ्रष्टाचार से गुजरता हुआ तहस-नहस-विनाश को प्राप्त हो जाया करता है-करेगा ही ।
Sakshi_10
Sakshi_10 11 साल 4 महीने पहले
वेद, उपनिषद , रामायण, गीता, पुराण, जैन-बौद्ध साहित्य, बाइबिल, र्कुआन, गुरुग्रन्थ साहेब आदि आदि का समन्वयवादी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में प्रविष्ट करना-कराना चाहिये
Milan Kumar_2
Milan Kumar_2 11 साल 4 महीने पहले
राग- द्वेष दोनों ही समाज के लिये कैंसर और कोढ़ हैं जिससे हर किसी को ही सदा ही बचना-बचाना चाहिये अन्यथा समाज कुकृत्य से ग्रसित हो भ्रष्टाचार से गुजरता हुआ तहस-नहस-विनाश को प्राप्त हो जाया करता है-करेगा ही ।
Milan Kumar_2
Milan Kumar_2 11 साल 4 महीने पहले
वेद, उपनिषद , रामायण, गीता, पुराण, जैन-बौद्ध साहित्य, बाइबिल, र्कुआन, गुरुग्रन्थ साहेब आदि आदि का समन्वयवादी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में प्रविष्ट करना-कराना चाहिये
Milan Kumar_2
Milan Kumar_2 11 साल 4 महीने पहले
वेद, उपनिषद , रामायण, गीता, पुराण, जैन-बौद्ध साहित्य, बाइबिल, र्कुआन, गुरुग्रन्थ साहेब आदि आदि का समन्वयवादी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में प्रविष्ट करना-कराना चाहिये
Jay Chan
Jay Chan 11 साल 4 महीने पहले
The crime rate in India is something that has to be thought about. Why should there be crime at all on this soil which gave birth to great souls like Gandhiji and Buddha. Publish the crime rates district wise and publish them in local newspapers. Ask and encourage general public to think themselves why there is crime rate at all in their districts and what should be done to bring crime to zero. Create awareness in people show statistics negative issues statistics like gender ratio and many more.
Milan Kumar_2
Milan Kumar_2 11 साल 4 महीने पहले
राग- द्वेष दोनों ही समाज के लिये कैंसर और कोढ़ हैं जिससे हर किसी को ही सदा ही बचना-बचाना चाहिये अन्यथा समाज कुकृत्य से ग्रसित हो भ्रष्टाचार से गुजरता हुआ तहस-नहस-विनाश को प्राप्त हो जाया करता है-करेगा ही ।
Milan Kumar_2
Milan Kumar_2 11 साल 4 महीने पहले
वर्ग-जाति एवं सम्प्रदाय को कुछ तुच्छ स्वार्थियों एवं संकुचित विचार धाराओं वाले नासमझ व्यक्तियों से उत्पन्न एवं संचालित समाज विरोधी कार्यों को यह घृणित कार्य है प्रभावी रूप में ऐसी मान्यता देनी दिलानी चाहिये ।
Milan Kumar_2
Milan Kumar_2 11 साल 4 महीने पहले
"विद्या का क्षेत्र सदा ही नीच-ऊँच, गरीब-अमीर, लिंग-जाति-वर्ग- सम्प्रदाय आदि भेद मूलक दूषित विधान से सर्वथा रहित और ऊपर सद्भाव, सद्विचार, सद्व्यवहार और सत्कार्यरूप विधानों से युक्त होना चाहिये ।"