Pravin Keshri
9 साल 12 महीने पहले
असमानता, भेदभाव व शिक्षित बेरोजगारों की लम्बी-लम्बी कतार के दौर में साधन-सम्पन्न पढे-लिखे शिक्षावीद का आयोग गठन कर शिक्षा नीति पर पुर्नविचार कराया जाता रहा है। वातानुकूलीत कमरों में या नामी-गरामी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में बैठकर कर आयोग शिक्षा नीति पर पुर्नविचार कर लेती थी। तब और अब में बड़ा अन्तर यह है कि अंतिम व्यक्ति के जरूरतों के हिसाव से शिक्षा का विकास करना सरकार की प्राथमिकता है। इसलिए शिक्षा नीति पर पुर्नविचार डीजिटल माध्यम से करना चाह रही है।
mygov_14735214371458939.pdf
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