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लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) में सुधार

Improving the Targeted Public Distribution System (TPDS)
आरंभ करने की तिथि :
Feb 01, 2015
अंतिम तिथि :
Mar 04, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित निम्नलिखित महत्वपूर्ण ...

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दों पर नागरिकों के सुझाव आमंत्रित हैं:

I लाभभोगियों की सही पहचान

(i) लाभभोगियों की पहचान हेतु व्यमक्तिवयों को सूची में शामिल करने/सूची से निकालने के मानदंड
(ii) लाभभोगियों की अनंतिम सूची बनाना, सूची को अंतिम रूप देना, इसका सत्याचपन करना एवं इसका प्रयोग करना
(iii) डिजिटीकृत लाभभोगियों/राशन कार्डों के डाटाबेस का प्रयोग और इनका सत्या पन
(iv) जाली/अपात्र राशन कार्डों को समाप्तड करने और पात्र लाभभोगियों को कार्ड जारी करने के लिए निरंतर समीक्षा
(v) राशन कार्ड सेवाओं के माध्यरम से डाटाबेस का स्वनचालित इलेक्ट्रॉ निक अपडेशन

II आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण

(i) राज्यों अथवा उनकी एजेंसियों द्वारा द्वार पर सुपुर्दगी (डोर स्टेप डिलीवरी) अर्थात एफसीआई/ मध्यवर्ती गोदामों से उचित दर दुकानों तक खाद्यान्नों की ढुलाई
(ii) आपूर्ति श्रृंखला में खाद्यान्नों की ट्रैकिंग के लिए नई पहलों का प्रयोग
(iii) उचित दर दुकानों पर खाद्यान्नों् की प्राप्तिक और वितरण की पुष्टिन और परवर्ती आवंटनों के लिए
इसका प्रयोग
(iv) सभी स्त रों पर जवाबदेही और जिम्मेोवारी निर्धारित करना
(v) आपूर्ति श्रृंखला प्रचालनों के प्रबंधन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग – गोदाम
प्रचालन (इनवेंटरी प्रबंधन, रिलीज़ आदेश, ट्रक चालान आदि) – उचित दर दुकान डीलरों द्वारा भुगतान (इलेक्ट्रॉ निक चालान, पेमेंट गेट-वे का प्रयोग आदि)

III अंतिम छोर तक सुपुर्दगी

(i) डीलरों को समुचित मार्जिन, गैर-पीडीएस वस्तुओं की बिक्री, प्रोत्साहनों आदि के माध्यम से उचित दर दुकानों की व्यवहार्यता में वृद्धि
(ii) कार्य कुशलता और कवरेज बढ़ाने के लिए एफ पी एस नेटवर्क, बुनियादी ढांचे तथा कार्य निष्पादन आदि में सुधार करना
(iii) उचित दर दुकानों के स्वामित्व का क्रमशः डी-प्राईवेटाइजेशन
(iv) वितरण में नई पहलें – थोक वितरण, निर्धारित तारीख को वितरण, सतर्कता समिति/पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों की उपस्थिति में वितरण, वितरण का मासिक प्रमाणन आदि
(v) उचित दर दुकानों पर लाभभोगियों की पहचान तथा खाद्यान्नों की सुपुर्दगी की पुष्टि हेतु सूचना प्रौद्योगिकी आधारित साधनों का प्रयोग
(vi) उचित दर दुकान की सभी प्रक्रियाओं का स्वचालन – बिक्री का ब्यौरा दर्ज करना, अगले आवंटन, निरीक्षण आदि के लिए रिकार्ड अद्यतन करना
(vii) लाभभोगी की पसंद के अनुसार किसी भी उचित दर दुकान पर पात्रता का उपयोग (पोर्टेबिलिटी)
IV सहभागी निगरानी और कार्यान्वयन

(i) सतर्कता समितियों को मजबूत बनाना और उनका प्रभावी कार्यचालन सुनिश्चित करना
(ii) पंचायती राज संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों, सिविल सोसाईटी की भूमिका में वृद्धि करना
(iii) लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित समस्त सूचना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना
(iv) लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रचालनों की सम्पूर्ण निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉ निक प्लैटफॉर्म का प्रयोग करना
(v) प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना – जिला शिकायत निवारण अधिकारी, राज्य खाद्य आयोग, कॉल सेंटर, टोल फ्री हेल्पलाईन आदि।
(vi) लाभभोगियों को उनकी पात्रताओं के बारे में जागरूक करना
(vii) चूक कर्ताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई – प्रशासन तथा प्रवर्तन मशीनरी को सुदृढ़ बनाना।

आप अपनी टिप्पणियां 28 फ़रवरी 2015 तक भेज सकते हैं।

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Shrikant Hoskote
Shrikant Hoskote 11 साल 7 महीने पहले
There seems to be a total lack of quality control on foods distributed thro the system.State machinery is totally indifferent to the quality aspect. Please treat the recipients with dignity. They have a right to quality food grains as those who are outside the system.Do not administer the system from high ground of distributing favours.Plug all the loop holes and leaks to make it truly worth the effort. Please never forget government is earning good will at the tax payers expense.It is our money
Shrikant Hoskote
Shrikant Hoskote 11 साल 7 महीने पहले
First and foremost is to check and verify beneficiaries correctly. This seems to be most grey and corrupt part of the system. Next please verify the shops authorised under system if they have proper place for storage, do they also own a similar business of dealing in grains. I have seen people queueing up in most hostile places for their share. Administration of state machinery responsible for PDS is pathetic needs to be tightened up firmly.
Harish Jethwa
Harish Jethwa 11 साल 7 महीने पहले
sir.please close all state run Rs2 rice etc scheems.this leads to shortage of labours please dont creat beggers. no one wants to work.rather create small ware house where people buy food grains (bank funding)to be consumed throughout the year through socity. this will help in public participations and responsibility .there will be no wastage no distribution cost. and proper storing.good quality of food etc