Home | MyGov

Accessibility
ऐक्सेसिबिलिटी टूल
कलर एडजस्टमेंट
टेक्स्ट साइज़
नेविगेशन एडजस्टमेंट

लोक प्रापण विधेयक पर अपने विचार साझा करें

Share your views on Public Procurement Bill
आरंभ करने की तिथि :
Mar 30, 2015
अंतिम तिथि :
Apr 21, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

लोक प्रापण विधेयक, 2012 पिछली लोक सभा में पेश किया गया था और माननीय ...

लोक प्रापण विधेयक, 2012 पिछली लोक सभा में पेश किया गया था और माननीय अध्य_क्ष द्वारा मई, 2012 में उसे संसदीय स्थाभयी वित्त समिति को भेज दिया गया था। स्थाियी समिति द्वारा कोई रिपोर्ट नहीं दी गई थी और बिल अब व्यंपगत हो गया है।

वित्त् मंत्री ने 2015 के अपने बजट भाषण (पैरा 72) में घोषणा की थी कि संसद को लोक प्रापण कानून पर शीघ्र ध्याीन देने की आवश्येकता है।

इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए हितधारकों से परामर्श शुरू करने का निर्णय लिया गया है। लोक प्रापण विधेयक, 2012 की प्रति वित्तू मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्धा है और इसे निम्नकलिखित लिंक पर देखा जा सकता है: http://finmin.nic.in/the_ministry/dept_expenditure/ppcell/58_2012_LS_EN.pdf

सभी हितधारकों से लोक प्रापण विधेयक के विद्यमान प्रावधानों की समीक्षा करने और अपनी टिप्पिणियां देने का अनुरोध किया जाता है।

आप अपनी टिप्पणियां 20 अप्रैल 2015 तक भेज सकते हैं।

फिर से कायम कर देना
327 सबमिशन दिखा रहा है
Pardeep Singh_2
Pardeep Singh_2 11 साल 5 महीने पहले
Respected PM Sir, I have 2 of my views that can be very helpful. One, i would like to share is to completely ban any version 15 year old LMV/MYCL and make it scrap. by this we can have more steel growth and relief for heavy traffic jam and parking. we can offer owner of a car amount while giving their car for scrap. Second, I have seen many of young guys least interested casting their vote one thing we can do is to start making of voter id at every school for senior secondary students.
Achyutha_1
Achyutha_1 11 साल 5 महीने पहले
Dear Sir, Common man should have the knowledge on what is going on. to have the holistic view we should have a good Media coverage on the same. Like 24X7 television. It will create a lot of awareness with the same minded people and corruption will definitely come down. It will help in developing a new vendor and business opportunity. Thanks
S K Shrivastava
S K Shrivastava 11 साल 5 महीने पहले
फसल उगाने वाले किसानों द्वारा आत्महत्या करना बड़ा दुर्भाग्य पूर्ण है। इसे रोकने के लिए पर्याप्त उपाय करने की जरूरत है। चुनाव के समय प्रधान मंत्री जी ने गोहत्या बंदी पर बहुत ज़ोर दिया था लेकिन एक साल में कुछ खास नहीं हुआ। बल्कि रिपोर्ट हास कि एक साल में मांस का निर्यात बढ़ गया है। इस पर जल्द ध्यान दें। बिना गोधन के देश की कल्पना कर के मन सिहर जाता है।
Premjith Prabhakaran
Premjith Prabhakaran 11 साल 5 महीने पहले
Public procurement system is worst in case of purchase through MHRD. Every educational institution is getting cheap quality learning aids and machines at a higher price. Government should form public companies to manufacture such things. UGC and AICTE are getting a lot of funds. but they are wasted by purchasing underquality things.
Raman Brajesh
Raman Brajesh 11 साल 5 महीने पहले
योजनायें बनाते हैं उसके लिए जनता पर टैक्स बढ़ाते हैं और साल में करीब 5.5 लाख करोड़ रु. की छूट पूंजीपतियों को देते हैं। वोट मांगने के लिए अपने को मजदूर-किसान का आम बेटा या बेटी बताते हैं लेकिन इनका शपथ ग्रहण हो या पार्टी व परिवारिक समारोह उसमें सभी खास (नेता, अभिनेता, पूंजीपति, खिलाड़ी) लोग ही नजर आते हैं यानी ‘मुंह में राम और बगल में छुरी’। सभी राष्ट्रवादी आर्थिक रुप से संपन्न लोग गैस-सब्सिडी छोड देंगे लेकिन नेताओं एवं सरकारी अधिकारियों को दी जाने वाली सब्सिडी (यथा- संसद कैन्टीन सब्सिडी)कब बन्द
Raman Brajesh
Raman Brajesh 11 साल 5 महीने पहले
सांसदों को वातानुकूलित कैन्टीन में दाल 1.5 रु., डोसा 4 रु. और चाय व सूप 1 रु. व 5.50 रुपये में मिल जाता है ‘चुने हुए जनप्रतिनिधियों’ के लिए वाशिंगटन, पेरिस, लंदन नजदीक हैं जहां आये दिन यह जाते रहते हैं लेकिन इनका अपना संसदीय क्षेत्र दूर हो जाता है जहां साल या पांच साल में एक दो बार चले जाते हैं। ‘लोकतंत्र का गुण’ सीखने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका जाते हैं लेकिन ‘जनप्रतिनिधि’ के नाते जनता को सुनने और समझने के लिए उनके पास जाना मुनासिब नहीं समझते। भाषणों में गरीबों के लिए घडि़याली आंसू बहाते हैं,
Raman Brajesh
Raman Brajesh 11 साल 5 महीने पहले
सांसद ही नहीं विधानसभाओं में भी करोड़पति-अरबपति विधायकों की संख्या बढ़ी है। हरियाणा, महाराष्ट्र के हालिया विधानसभाओं में करोड़पति-अरबपति विधायकों की संख्या ने सांसदों को भी पीछे छोड़ दिया है। हरियाणा के 83 प्रतिशत (90 में से 75) वहीं महराष्ट्र के 88 प्रतिशत (288 में से 253) विधायक करोड़पति-अरबपति हैं। आम-आदमी से खाद, पानी, बिजली से सब्सिडी छीनी जा रही हैं, वहीं इन करोड़पति-अरबपति सांसदों के कैन्टीन में भारी सब्सिडी दी जाती है। आम आदमी के लिए फुटपाथ पर 8-10 रु. में चाय मिल रही है वहीं इन सेहतमं
Raman Brajesh
Raman Brajesh 11 साल 5 महीने पहले
आदरणीय Narendra Modi जी, PMO India ताली कभी भी एक हाथ से नही बजती एक हाथ से सिर्फ और सिर्फ तमाचा लगता है ॥ क्या माननीय सांसदों / विधायको को इतनी तनख्वाह एवं सुविधाएं नही मिलती जो उन्हे अलग से सब्सिडी भी दी जा रही हैं..... अर्जुन सेन गुप्ता रिपोर्ट के अनुसार भारत के 77 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं वहीं भारत के 82 प्रतिशत सांसद करोड़पति-अरबपति हैं। 15 वीं लोकसभा में 300 सांसद करोड़पति-अरबपति थे, 16 वीं लोकसभा में इनकी संख्या बढ़कर 442 हो गई है। सांसद ही नहीं विधानसभाओं