rajan jaiswal
11 साल 2 महीने पहले
मैं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में अकाउंटेंट के पोस्ट पर हूँ। यह विद्यालय ड्राप आउट बालिकाओ को पुनः समाज के मुख्यधारा में जोड़ने हेतु 6 से 12वीं तक पूर्णता निशुल्क आवासीय व्यवस्था करती है। एक आदिवासी बच्ची जिसका नाम मधु तैसुम है इस विद्यालय में नामांकन करवाई पर कुछ दिनों के पश्चात वो किसी कारण से घर जाने के बाद दुबारा विद्यालय द्वारा बार बार प्रयास करने के बाद भी विद्यालय नहीं आ रही थी। एक बार मेरी नज़र उस बच्ची पर पड़ी जो लकड़ी का बण्डल अपने सर पर लिए शायद अपने घर जा रही थी।
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