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वित्तीय क्षेत्र में बजट प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अपने विचार साझा कीजिए

आरंभ करने की तिथि :
Feb 25, 2021
अंतिम तिथि :
Mar 31, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 26 फरवरी 2021 को वित्तीय ...

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 26 फरवरी 2021 को वित्तीय क्षेत्र में केंद्रीय बजट प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन पर वेबिनार को संबोधित करेंगे।

वित्तीय क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय बजट में प्रमुख घोषणाएं निम्न हैं और हम जनता और अन्य हितधारकों से विचार और सुझाव आमंत्रित कर रहे हैं

• राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 9.5% है जोकि 2021-22 में 6.8% अनुमानित है
• राज्यों को इस वर्ष जीएसडीपी का 4% तक उधार लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव
• सेबी अधिनियम, डिपॉजिटरी अधिनियम और दो अन्य कानूनों के प्रावधानों को समेकित करते हुए एक यूनिफाइड सिक्योरिटीज मार्केट कोड का निर्माण
• एफडीआई सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% करने का प्रस्ताव
• स्ट्रेस्ड लोन लेने के लिए एक परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी की स्थापना की जाएगी
• बैंक जमाकर्ताओं के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस 1 लाख रुपये से बढ़कर 5 लाख रुपये
• 2008 की सीमित देयता भागीदारी अधिनियम को डिक्रिमिनलाइज करने का प्रस्ताव
• इस वर्ष दो पीएसयू बैंक और एक सामान्य बीमा कंपनी का विनिवेश किया जाएगा
• इस वित्तीय वर्ष के लिए एलआईसी का एक आईपीओ
• बीपीसीएल, आईडीबीआई बैंक, एयर इंडिया की रणनीतिक बिक्री

सुझाव भेजने अंतिम तिथि 31 मार्च 2021 है।

फिर से कायम कर देना
914 सबमिशन दिखा रहा है
Sudhali Sandeep kalia
Sudhali Sandeep kalia 5 साल 5 महीने पहले
दाले तो उसे 25/22%प्रॉफिट होगा उसका हळद याने 11%भी बँक कस्टमर को fd पे बँक दे तो लोग क्या बँक अमीर हो जयेनगे ऑर पैसा बँक के पास आयेगा. बँक लोन भी दे पयेगा , लोग भी सहुकर के बाह्य बँक से लोन लेंगे ,ऑर अलग mf मे इंवेस्त करणेसे mf भी पूर स्टार्ट अप वेंचर्स को फायनान्स कर सकते है .हमारे पैसे खर्च करने नही लोगोको स्सेविंग्ज की लालाच देनि होगी. क्यू की लोग आल्सी है वो mf पे भरोसा नाही करते.fd जितना सेफ नही बँक या इंडिया ऑर अमेरिकन बाँड ले पायेगा . हमे हमारे पास पोर्ट को जपान जितना स्ट्राँग करना होगा.
Sudhali Sandeep kalia
Sudhali Sandeep kalia 5 साल 5 महीने पहले
आंदोलन,मोर्चा इस से सरकार का नुकसान होता है इस लिये ऐसे स्टंट के पेहलें सरकारने कूच नियम लागू करने चाहिए १)सरकारी जगाह use करणेपे fine. शहरमे गलात जगह पार्किंग पे जैसे फी देनी पडती है २)मोर्चा एक हफ्ते तक ही चलेगा अगर ज्यादा दीन ह्या तो ऑर fine. ३)सरकारी खर्च कम होणे चाहिए जैसे मंत्रियोकी एक्सट्रा due ऑर कम रेंट पे मकान, कार,बिजली बिल, ऑर संसद मे हांगामा करणे वलो पे fine. बँक ने पब्लिक का पेसा mutual फंड मे डाळ देना चाहिए ऑर %जितना आये उसका half customer को ex अगर कोई बँक आदित्य बिर्ला mf मे पैस
ARJUN SASI
ARJUN SASI 5 साल 5 महीने पहले
I don't think that privatisation of government sector may good it may be affect the all convenient procedures that helps the poor people and by thinking that this is a nation of one king for one million citizens when the privatisation occur the whole sectors goes to some people and may make them more advantages to make money but the poor one cannot the advantage so bring more money to poor and middle class people to attain their goals otherwise it is impossible to make a financial powerfull nati
KAMLESH J KAMDAR
KAMLESH J KAMDAR 5 साल 5 महीने पहले
Privatisation of Bank may not help achieving government targets for poor and needy and rural area developments too. Also foreign investor can grab the total assets of lacs of crore by buying shares in lacs. e.g. Indian overseas bank shares are listed at 10 , to buy one lac shares one has to pay 10 lacs only but he shall be owner of all deposits / CASA which shall be in crores of rupees.and like enron grant loans which turned out as N P A and tomorrow I O B shall be with NIL assets.
KAMLESH J KAMDAR
KAMLESH J KAMDAR 5 साल 5 महीने पहले
I found one ridiculous thing, that if i avail a loan against my deposit / F D , bank charges me interest more than the rate of F D and the same is recognized as income of the bank. but to me it is not allowed as expenses , on the contrary F D interest is considered as my income and i have to pay tax on it though actually there is no income at all. Can you allow either interest paid as expenses or no interest to be consider on that particular F D . Thanks.
PRAVEENVISHWKARMA
PRAVEENVISHWKARMA 5 साल 5 महीने पहले
सर पूरे भारत में लगभग 80% बैंक अकांट्स हैं। जिनमे गरीबों, किसान और स्टूडेंट समिल हैं। क्यों न गरीबों और स्टूडेंट को छोड़कर हर व्यक्ति से मासिक दस रुपए टैक्स या (डोंशन) के नाम पर लिया जाय और वही रुपए देश को आत्मनिर्भर बनाने व देशहित में लगाए जाए। ऐसा करके आप हर महीने कम से कम सौ करोड़ रूपए हर महीने ले सकते हैं। जिसे आप लोन, व देश हित में लगाकर। देश को आत्मनिर्भर तथा देश की तरकी में लगाकर आगे बढ़ाए। Please approve this post 🙏