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शिक्षा क्षेत्र में बजट पहलों के कार्यान्वयन के लिए विचारों का आमंत्रण

आरंभ करने की तिथि :
Mar 03, 2021
अंतिम तिथि :
Mar 31, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा क्षेत्र में बजट के ...

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा क्षेत्र में बजट के कार्यान्वयन पर एक वेबिनार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देश के युवाओं को आत्मविश्वास की आवश्यकता है जो उनकी शिक्षा, ज्ञान और कौशल से सीधे जुड़ा हुआ है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को इसी महत्वपूर्ण सोच के साथ विकसित किया गया है।

शिक्षा क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय बजट में प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार हैं और हम जनता और अन्य हितधारकों से विचार और सुझाव आमंत्रित कर रहे हैं:
• राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सभी घटकों को शामिल करने के लिए 15,000 से अधिक स्कूलों को गुणात्मक रूप से मजबूत किया जाएगा। ये स्कूल शिक्षा नीति के आदर्शों को प्राप्त करने के लिए अपने क्षेत्रों में अनुकरणीय स्कूलों के रूप में उभरेंगे और अन्य स्कूलों को हैंडहोल्डिंग और सलाह देंगे।
• नेशनल प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स फॉर टीचर्स –एनपीएसटी के रुप में सभी स्कूल शिक्षकों के लिए मानक विकसित किए जाएंगे। इन मानकों का पालन सार्वजनिक और निजी स्कूल प्रणाली के 92 लाख शिक्षकों द्वारा किया जाएगा तथा इससे शिक्षकों की क्षमता वृद्धि भी होगी।
• खिलौने मनोरंजन के भी साधन हैं और इससे हम सीखते भी हैं। एक यूनिक स्वदेशी खिलौना आधारित शिक्षा सभी स्तरों की शिक्षा के लिए विकसित किया जाएगा। यह कक्षा को रटने की पद्धति से एक आकर्षक और आनंदपूर्ण अनुभव में बदल देगा।
• एक राष्ट्रीय डिजिटल शैक्षिक आर्किटेक्चर (NDEAR) डिजिटल फर्स्ट माइंडसेट के साथ स्थापित किया जाएगा जहां डिजिटल आर्किटेक्चर न केवल शिक्षण और सीखने की गतिविधियों का समर्थन करेगा, बल्कि शैक्षिक योजना, केंद्र और राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की प्रशासनिक गतिविधियों की भी मदद करेगा। । यह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए एक विविध शिक्षा इकोसिस्टम आर्किटेक्चर तथा एक फेडरेटेड लेकिन इंटरऑपरेबल सिस्टम प्रदान करेगा जो सभी हितधारकों, विशेष रूप से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की स्वायत्तता सुनिश्चित करेगा।
• श्रवण दोष वाले बच्चों के लिए सरकार देशभर में भारतीय सांकेतिक भाषा के मानकीकरण पर काम करेगी और उनके द्वारा उपयोग के लिए राष्ट्रीय और राज्य पाठ्यक्रम सामग्री और डिजिटल सामग्री विकसित करेगी।
• वरिष्ठ और सेवानिवृत्त शिक्षकों का उपयोग स्कूल के शिक्षकों के व्यक्तिगत परामर्श (ऑनलाइन/ऑफलाइन) के लिए किया जाएगा।
• अब तक छात्रों का यूनिडाइमेंशनल पैरामीटर्स पर मूल्यांकन किया है। अब शिक्षार्थी के संज्ञानात्मक स्तरों का आकलन करने से बदलाव होगा। अब छात्रों की विशेष प्रतिभा तथा बच्चे की क्षमता की पहचान की जाएगी। इससे छात्रों को उनकी ताकत, रुचि के क्षेत्रों, जिन क्षेत्रों में फोकस की आवश्यकता हो और कैरियर विकल्प जानने में मदद करने की परिकल्पना की गयी है।
• संसाधनों की बढ़ती पहुंच को सक्षम करने के लिए वयस्क शिक्षा को कवर करने वाले ऑनलाइन मॉड्यूल पेश किए जाएंगे।
• कोरोना महामारी के बावजूद इस वर्ष हमने 30 लाख से अधिक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को डिजिटल रूप से प्रशिक्षित किया है। इसे आगे बढ़ाते हुए 2021-22 में हम 56 लाख स्कूल शिक्षकों को नेशनल इनिशिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स फॉर होलिस्टिक एडवांसमेंट (NISTHA) के माध्यम से प्रशिक्षित करेंगे।
• पिछले कुछ वर्षों से हमारे प्रधानमंत्री चिंता और तनाव को दूर करने में मदद करने के लिए बोर्ड परीक्षा से पहले हर साल छात्रों के साथ संवाद करते हैं। इस दिशा में हम 2022-23 शैक्षणिक सत्र से प्रभावी होने के लिए चरणबद्ध तरीके से सीबीएसई बोर्ड परीक्षा सुधारों की शुरुआत करेंगे। परीक्षा रटने की संस्कृति की बजाय छात्रों को उनकी वैचारिक स्पष्टता, विश्लेषणात्मक कौशल और जीवन में ज्ञान के उपयोग के आधार पर किया जाएगा।

भेजने की अंतिम तिथि - 31 मार्च 2021 है।

फिर से कायम कर देना
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UMA SHANKAR MEENA
UMA SHANKAR MEENA 5 साल 6 महीने पहले
शिक्षा जगत के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुधार जरूरी है १. सरकारी विद्यालयों में अधिकारियों के द्वारा समय-समय पर जांच करना और वर्तमान हालात को पब्लिक के सामने प्रदर्शित करना। २. शिक्षकों का हर 2 वर्ष में एक परीक्षा होनी चाहिए जो उस शिक्षक के विषय तथा कक्षा से संबंधित होना चाहिए उसी के आधार पर शिक्षक का वेतन वृद्धि होना चाहिए।तथा शिक्षकों के दस्तावेजों में विवरण करना चाहिए। ३.विधालय का एक आनलाइन शिकायत सिस्टम होना चाहिए जिसमें विधालय की कमियों को जनता सरकार के सामने अवगत करा सकें।
Krishna23304506
Krishna23304506 5 साल 6 महीने पहले
जब सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा में सुधार नहीं हो सकती तो सरकारी स्कूलों बंद कर दिया जाए या प्रवेट्ट कर दे। और रही बच्चों कि पढ़ाई के लिए सीधे बैंक खातों में पैसे दे। जितने पैसे सरकारी स्कूलों में टीचर और स्कूल पे खर्च होती है हमारी बहुत गरीबी स्थिती फिर भी सरकारी स्कूलों में नही भेजते कर्ज़ लेकर पैरावेट स्कूल में पढ़ाते हैं। जो स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा देगा वहीं तो लोग पढ़ायेंगे फिर सरकारी स्कूलों फालतु पैसे क्यू बरवाद करें। सरकारी स्कूलों में आरक्षण लेने वाले छात्र चोरी या घुस
Ashish Jindal
Ashish Jindal 5 साल 6 महीने पहले
All school & colleges, even government or private holdings should inticiate the process of learning by smart class education. because Smart Class is the easy way of learning with proper diagrams and examples of all initials courses. Today our students are studing for the basic operating systems, uses of computers and tool of paints, word & excel sheet. but the times goes very fast, because today there are not more need to read the tools of excel sheets, these are outdated now. they must know tab
Sai Prasana
Sai Prasana 5 साल 6 महीने पहले
3 MAJOR CHANGE I WOULD SUGGEST IS ON: 1)VIRTUES OF SIMPLICITY MINIMALISM AS REVERED IN SPIRITUALITY. BUT INDULGES PEOPLE AT AGE 30. BE APPLIED IN SCHOOL STRUCTURE ITSELF BY AVOIDING {CONCRETE}, HI RISE DESIGNS. 2) TRY NOT TO BURDEN CHILDREN UNTILL 5TH CLASS.. WITH SUBJECTS OTHER THAN 3 SELECT LANGUAGE, EPIC ETHICS & MATHS. THERE IS NO NEED TO LEARN SCIENCES AT ALL. 3) INTRODUCE STUDIES ON FINANCIAL INDEPENDENCE & INFRASTRUCTURE ON WHICH YOU ASK SUGGESTION NOW & ALSO DETECT DECEPTIVE LEFTS FAGERY.
Shravan M
Shravan M 5 साल 6 महीने पहले
The logo of this topic with a graduation cap itself shows education is westernized. Anyways my suggestion is prioritize Sanskrit, & focus on hands-on learning & creativity, not just memorizing, for this govt should provide funds to students so that they can work on projects, currently they are spending money of their parents with no support from college or govt. And also fund colleges heavily to do real world research. Ask companies to use colleges for research.