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समर्थनकारी समावेशी शिक्षा – बालिकाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पासंख्यकों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा

Enabling Inclusive Education – education of Girls, SCs, STs, Minorities and children with special needs
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

सामाजिक पहुंच और साम्यता का मामला काफी जटिल है। हालांकि, लाभवंचित ...

सामाजिक पहुंच और साम्यता का मामला काफी जटिल है। हालांकि, लाभवंचित समूहों जैसे अ.जा., अ.ज.जा., मुस्लिमों, बालिकाओं और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों तथा सामान्य जनसंख्या के बीच औसत नामांकनों के अंतरालों में कमी आई है, ऐतिहासिक दृष्टि से लाभवंचित और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के अधिगम स्तरों, जिनमें सीखने की समझ बहुत कम होती है, में अभी तक बड़ा अंतराल है। व्याोपक और बढ़ते हुए अधिगम अंतरालों ने नामांकन क्षेत्र में प्राप्त समानता के लाभों को खतरा पहुंचाया है क्योंकि अधिगम के कम स्तरों वाले बच्चों के पढ़ाई बीच में छोड़कर जाने की संभावना अधिक रहती है। हमें स्त्री-पुरूष और सामाजिक अंतराल कम करने के मौजूदा हस्तक्षेपों की जांच करने तथा प्रभावकारी समावेश के लिए केन्द्रित कार्यनीतियों को पहचानने की आवश्यकता है।

फिर से कायम कर देना
802 सबमिशन दिखा रहा है
SUSHEEL DUBEY
SUSHEEL DUBEY 11 साल 2 महीने पहले
विद्या का क्षेत्र सदा ही नीच-ऊँच, गरीब-अमीर, लिंग-जाति-वर्ग- सम्प्रदाय आदि भेद मूलक दूषित विधान से सर्वथा रहित और ऊपर सद्भाव, सद्विचार, सद्व्यवहार और सत्कार्यरूप विधानों से युक्त होना चाहिये ।" "वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता, पुराण, जैन-बौद्ध साहित्य, बाइबिल, र्कुआन, गुरुग्रन्थ साहेब आदि आदि का समन्वयवादी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में प्रविष्ट करना-कराना चाहिये जिसमें विद्यार्थियों को किसी भी वर्ग-जाति-सम्प्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये ।"
SUSHEEL DUBEY
SUSHEEL DUBEY 11 साल 2 महीने पहले
विद्या का क्षेत्र सदा ही नीच-ऊँच, गरीब-अमीर, लिंग-जाति-वर्ग- सम्प्रदाय आदि भेद मूलक दूषित विधान से सर्वथा रहित और ऊपर सद्भाव, सद्विचार, सद्व्यवहार और सत्कार्यरूप विधानों से युक्त होना चाहिये ।" "वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता, पुराण, जैन-बौद्ध साहित्य, बाइबिल, र्कुआन, गुरुग्रन्थ साहेब आदि आदि का समन्वयवादी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में प्रविष्ट करना-कराना चाहिये जिसमें विद्यार्थियों को किसी भी वर्ग-जाति-सम्प्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये ।"
arti pandey
arti pandey 11 साल 2 महीने पहले
"`विद्या का क्षेत्र सदा ही नीच-ऊँच, गरीब-अमीर, लिंग-जाति-वर्ग- सम्प्रदाय आदि भेद मूलक दूषित विधान से सर्वथा रहित और ऊपर सद्भाव, सद्विचार, सद्व्यवहार और सत्कार्यरूप विधानों से युक्त होना चाहिये ।" "वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता, पुराण, जैन-बौद्ध साहित्य, बाइबिल, र्कुआन, गुरुग्रन्थ साहेब आदि आदि का समन्वयवादी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में प्रविष्ट करना-कराना चाहिये जिसमें विद्यार्थियों को किसी भी वर्ग-जाति-सम्प्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये ।"
Bhedbhav_2
arti pandey
arti pandey 11 साल 2 महीने पहले
‘‘वेद, उपनिष्षद्, रामायण, गीता, पुराण बाइबिल, र्कुआन को विभिन्न भाष्षाओं के ‘अन्तर्गत एक ही धर्म की शिक्षा-दीक्षा है’’-- ऐसा ही भाव भरना सभी के लिये अनिवार्य होना चाहिए । वर्ग-जाति एवं सम्प्रदाय को कुछ तुच्छ स्वार्थियों एवं संकुचित विचार धाराओं वाले नासमझ व्यक्तियों से उत्पन्न एवं संचालित समाज विरोधी कार्यों को यह घृणित कार्य है प्रभावी रूप में ऐसी मान्यता देनी दिलानी चाहिये ।
Ankur Kumar_5
Ankur Kumar_5 11 साल 2 महीने पहले
"वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता, पुराण, जैन-बौद्ध साहित्य, बाइबिल, र्कुआन, गुरुग्रन्थ साहेब आदि आदि का समन्वयवादी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में प्रविष्ट करना-कराना चाहिये जिसमें विद्यार्थियों को किसी भी वर्ग-जाति-सम्प्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये ।"
Ankur Kumar_5
Ankur Kumar_5 11 साल 2 महीने पहले
"`विद्या का क्षेत्र सदा ही नीच-ऊँच, गरीब-अमीर, लिंग-जाति-वर्ग- सम्प्रदाय आदि भेद मूलक दूषित विधान से सर्वथा रहित और ऊपर सद्भाव, सद्विचार, सद्व्यवहार और सत्कार्यरूप विधानों से युक्त होना चाहिये ।"
Ankur Kumar_5
Ankur Kumar_5 11 साल 2 महीने पहले
वर्ग-जाति एवं सम्प्रदाय को कुछ तुच्छ स्वार्थियों एवं संकुचित विचार धाराओं वाले नासमझ व्यक्तियों से उत्पन्न एवं संचालित समाज विरोधी कार्यों को यह घृणित कार्य है प्रभावी रूप में ऐसी मान्यता देनी दिलानी चाहिये ।