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समर्थनकारी समावेशी शिक्षा – बालिकाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पासंख्यकों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा

Enabling Inclusive Education – education of Girls, SCs, STs, Minorities and children with special needs
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

सामाजिक पहुंच और साम्यता का मामला काफी जटिल है। हालांकि, लाभवंचित ...

सामाजिक पहुंच और साम्यता का मामला काफी जटिल है। हालांकि, लाभवंचित समूहों जैसे अ.जा., अ.ज.जा., मुस्लिमों, बालिकाओं और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों तथा सामान्य जनसंख्या के बीच औसत नामांकनों के अंतरालों में कमी आई है, ऐतिहासिक दृष्टि से लाभवंचित और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के अधिगम स्तरों, जिनमें सीखने की समझ बहुत कम होती है, में अभी तक बड़ा अंतराल है। व्याोपक और बढ़ते हुए अधिगम अंतरालों ने नामांकन क्षेत्र में प्राप्त समानता के लाभों को खतरा पहुंचाया है क्योंकि अधिगम के कम स्तरों वाले बच्चों के पढ़ाई बीच में छोड़कर जाने की संभावना अधिक रहती है। हमें स्त्री-पुरूष और सामाजिक अंतराल कम करने के मौजूदा हस्तक्षेपों की जांच करने तथा प्रभावकारी समावेश के लिए केन्द्रित कार्यनीतियों को पहचानने की आवश्यकता है।

फिर से कायम कर देना
802 सबमिशन दिखा रहा है
KRANTHI KIRAN
KRANTHI KIRAN 11 साल 6 महीने पहले
The education in India has a great influence of British Introduced style. The British introduced English medium. Since then our education has given focus on English Medium. Education in mother tongue plays a vital role in child's intellectual development as it teachers can communicate effectively with students. India should give importance to mother tongue as Medium of instruction. We can still learn English as a language.
mukesh pareek
mukesh pareek 11 साल 6 महीने पहले
अगर हमारे देश में शिक्षा पद्धति हमारी भाषा हिन्दी में हो जाए तो मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता का मुकाबला पूरे विश्व में कोई भी नहीं कर सकता ।
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