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स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी गौरव गाथाएं साझा करें

आरंभ करने की तिथि :
Sep 30, 2020
अंतिम तिथि :
Oct 14, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

मन की बात के 27 सितंबर के एपिसोड में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ...

मन की बात के 27 सितंबर के एपिसोड में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहानी कहने की कला पर चर्चा की है। उन्होनें इस बात का भी उल्लेख किया कि हमारे देश में कहानी कहने की कला उतनी ही पुरानी है जितनी की मानव सभ्यता, जहां भी कोई इंसान होता है वहां पर कोई न कोई कहानी जरुर होती है।

हम आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने की तरफ बढ़ रहे हैं, प्रधानमंत्री ने पूरे देश के कहानी कहने वालों से आग्रह किया है कि हमारे गुलामी के काल की संघर्ष गाथाओं को सबके सामने लायें। विशेषकर 1857 से लेकर 1947 तक की गाथाएं। इस कालखंड की छोटी-बड़ी सभी गाथाएं हमारी नयी पीढ़ी को मालूम होनी चाहिए। हमारे देश के कहानीकारों को कहानी कहने की कला को फिर से जीवित करना होगा, इसके लिए हमें प्रयास करते रहना होगा। : प्रधानमंत्री मोदी

क्या आप 1857 से 1947 के बीच की किसी ऐसी प्रेरणादायी कहानी को जानते हैं जो कभी कही न गयी हो? शायद किसी ऐसे स्वतंत्रता सेनानी की कहानी जिसके बारे में लोगों को उतना न पता हो जितना पता होना चाहिए। शायद कोई छोटी सी ही घटना जिसका योगदान स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण हो? वह कहानी जो शायद आपने अपने घर के बड़े-बुजुर्गो से सुनी हो?

आप हमें वो कहानियां बताइये हम उसे समस्त भारतवासियों तक पहुचायेंगे!

अपनी कहानियां हमें वीडियो, ऑडियो, फोटो या फिर लिखकर भेज सकते हैं।

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फिर से कायम कर देना
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KIRUTHIVASAN D
KIRUTHIVASAN D 6 साल 2 सप्ताह पहले
🙏 Freedom fighter in Tamilnadu Vanchinathan (1886 – June 17, 1911) , popularly known as Vanchi, was an Indian Tamil independence activist. He is best remembered for having shot dead Ashe, the Collector of Thirunelveli and having later committed suicide in order to evade arrest.
NOORUDDIN MD SALEEM
NOORUDDIN MD SALEEM 6 साल 2 सप्ताह पहले
नसीम मिर्ज़ा चंगेज़ी स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेज़ अधिकारी सांडर्स की हत्या के जुर्म में शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके दो साथियों को 23 मार्च, 1931 को लाहौर जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया था। इससे पहले लाला लाजपत राय की मौत के लिए जिम्मेदार सांडर्स की हत्या के बाद भगत सिंह लाहौर से दिल्ली के लिए निकल गए थे। वह कई स्थानों पर भेष बदल कर रहे। इस कड़ी में दिल्ली भी उनका अहम पड़ाव रहा। वे यहां पुरानी दिल्ली में भी रहे। यहां पर जिस व्यक्ति ने शहीद भगत सिंह को आश्रय दिया था, वे अभी जिंदा हैं। उम्र है 106 साल