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आरंभ करने की तिथि :
Sep 30, 2020
अंतिम तिथि :
Oct 14, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
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टिप्पणियाँ (1)
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V K TYAGI
6 साल 3 सप्ताह पहले
हमारा स्वतन्त्रता इतिहास बहुत ही संघर्षों भरा रहा है इसमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेज़ो के खिलाफ 200 वर्षों तक संघर्ष किया अनेक लोगो ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया किसी ने अपनी जान दी किसी ने अपना पति खोया किसी ने भाई खोया किसी ने अपना बेटा खोया सभी ने कुछ न कुछ खोया लेकिन इस आन्दोलन को सभी आगे बढ़ाते रहे अंग्रेजो को हमारे सेनानियो ने चैन से बैठने नहीं दिया उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा अंत में अंग्रेज़ो को हमसे हार माननी पड़ी, भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी देनी पड़ी यह हमारी जीत थी
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sujit lotlikar
6 साल 3 सप्ताह पहले
How invaders enter India, who & why some anti national of those days supported invaders with truth ,what invader looted ?,from India,where they taken loot, why our culture is manipulated,why and how Hindus get divided under invaders agenda
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Abdul Rahman
6 साल 3 सप्ताह पहले
After the shooting, Vanchinathan ran along the platform and took cover in the latrine. Sometime later he was found dead, having shot himself in the mouth. The pistol recovered from him was empty without any bullets as he just planned to kill himself after killing Ashe and had no intention to hurt anyone other than Ashe.
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Abdul Rahman
6 साल 3 सप्ताह पहले
As the Ashes sat facing each other in the first class carriage, waiting for the Boat Mail to arrive, a neatly dressed man with tufted hair and another young man wearing a dhoti approached the carriage. The former boarded the carriage and pulled out a Belgian-made Browning automatic pistol. The bullet hit Ashe in the chest and he collapsed. The sound of the pistol shot was absorbed by the howling wind.
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Abdul Rahman
6 साल 3 सप्ताह पहले
On 17 June 1911, Ashe boarded the 9:30 am Maniyachi Mail at Tirunelveli Junction. With him was his wife, Mary Lillian Patterson, who had arrived from Ireland only a few days earlier. They were on their way to Kodaikanal where their four children, Molly, Arthur, Sheila, and Herbert, lived in a rented bungalow. At 10:38 am, the train pulled in at Maniyachi. The Ceylon Boat Mail was due to arrive at 10:48 am.
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Pandya Shyam Vipulkumar
6 साल 3 सप्ताह पहले
feel proud and gratitude whenever we talk or recall our heroes of freedom fight..their sacrifice has given us human life n rights as well They laid down their life just for wellfare of we people. Not only we people but also whole human race will remain indebted to them..
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Dolphy Dmello
6 साल 3 सप्ताह पहले
We should develop more ports, airports marine dry docks and fishing jetty to attract more business n revenue in shipbuilding and dry docking.
More more container cargo boats should be manufactured in india to get jobs for the young generation.
Future plan... so that infrastructure, road and communications plus raw material is kept ready for to make industrial city, manufacturing city, health city and many more sectors.
Dear sirjii,
Keep the future plan to be ready.
thanking you.
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Vinayaka E N
6 साल 3 सप्ताह पहले
Abdul Kalam vision
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Janani Pandian
6 साल 3 सप्ताह पहले
Lakshmi bai, the Rani of Jhansi, was an Indian queen of the Maratha princely state of Jhansi in North India currently present in Jhansi district in Utter Pradesh, India. She was one of the leading figures of the Indian Rebellion of 1857 and became a symbol of resistance to the British Raj for Indian nationalists.
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Loknath
6 साल 3 सप्ताह पहले
हमारे देश की आजादी में अपितु देश को भाईचारे का पाठ पढ़ाने वाले बहुत से महान पुरुष थे। लेकिन समयानुसार इन दो महान आत्माओं के बहादुरी और महानता के चर्चे हुए। बात उन दिनों की करता हूं जब देश में यूरोपियों, डचों और मुगलों की जड़े कमजोर हो रही थीं और ब्रिटिश जड़ें मजबूत कर चुकी थी। लेकिन भारत में कुछ शक्तियां भी थीं जो उनका लड़खड़ाते कदमों से सामना कर रहे थे। उसी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का इतिहास गौरवान्वित कर देने वाला था। इसी क्रम में महात्मा गांधी जोकि दुनिया को भाईचारे का पाठ सीखा गए..........!
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