Ankit Jain
11 साल 6 महीने पहले
कहा जाता है कि "जल ही जीवन है"
दिल्ली की यमुना नदी दिल्ली के लगभग 1.5 करोड़ लोगों की जीवनरेखा है। हमारा जीवन इसपर निर्भर है. यह किसी से छुपा नहीं है के वर्तमान में यमुना की क्या दुर्दशा हो चुकी है ।
जब भी हम यमुना के आस-पास से गुजरते हैं तो यमुना की गंदगी के लिए सरकार को भला-बुरा कहकर अपने कर्तव्यों के इतिश्री कर लेते हैं । परन्तु क्या हमारे जीवन की रक्षा के जिम्मेदारी क्या सिर्फ सरकार की है।
अगर हमारे घर में कूड़ा-कचरा जमा हो जाए तो क्या उसे साफ़ करने के लिए हम सरकार का इन्तजार करते हैं???
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