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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
सर,
बहुत सी निर्जीव योजनाओं को बंद करिए,जिससे उन पर खर्च होने वाले देश के धन का दुर्पयोग रोका जा सके।
निर्जीव कानूनों को समाप्त करिए, एवम् कानून का लघुकरण करिए,जिससे निर्दोष को सजा न हो,और दोषी सजा से बच न सके।
एक योजना आंगनवाड़ी है इस योजना के तहत मिला समान का वितरण प्रायः शून्य है और कार्यकत्री की भैंसे खाती हैं शायद देश में कोई नागरिक हो जिसे इसका लाभ मिला हो तो बताइए?क्योंकि आप सरकार में हैं।
सूचना अधिकार का समावेश पूर्व में ही धारा 76साक्ष्य अधिनियम में है तो अलग से कानून की क्या जरूरत ...
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
Honourable Modiji, Namaskaar
In my view, our vibrant Indian youth can play a pivotal role in bringing about Cultural Integration in India which will surely strengthen our Unity, integrity and Solidarity. This can be done with an Educational programme combined with contests based on festivals, language, history, Arts and Crafts, literature. This type of education is also necessary for a richly and diversely cultured Nation like ours. With due Regards and High hopes of remarkable accomplishments on the part of our Energetic youth and also best wishes for a Great success ahead.
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
Dear sir, I want to suggest that every student during their graduation should get opportunity to work in different fields like railway, aviation, food processing, etc. according to their graduation course once during their study so it may help them to understand different sectors and may choose their job opportunities in them. Because I see many student after graduation or post graduation, they are confused about their next step to do job and serve for the country and I believe a directionless youth can got contribute in progress of the country.
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
कुछ समय पूर्व आपने मन की बात कार्यक्रम में 'क्षण और कण' के महत्व का जिक्र किया था।
यदि आप इन दोनों के महत्व के बारे में युवाओं के साथ चर्चा करें तो सकारात्मक परिणाम आएंगे ऐसा मेरा मानना है।
अगर निराशा के माहौल से निकलना है तो सकारात्मक सोच रखनी होगी। अंधकार में रोशनी की किरण की तलाश करनी होगी।
बिना क्षण गंवाए आगे बढ़ना होगा। हर कण को राष्ट्र निर्माण में लगाना होगा।
यह सदी भारत की है। राष्ट्र को उन्नत बनाना होगा
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
First of all congratulations for the 25 Youth Festival, According to me , youth is the powerful resource on the earth, which should be managed according to the skills and abilities of an individual person, so that , creation of ideas and development of new sectors emerges and corruption in the society or in the nation can be eliminated, and India be the Super power nation , which leads the world with prosperity and glory.
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
Work from home has gone deep into people's live. Earlier it was said for working persons to keep Office and Home lives separate to remain stress free.
Now, it's all mixed up. It has become habit to remain online always.
This definitely create tension in family and spoils life of younger generation.
One of negative impacts of COVID-19.
Honourable Prime Minister can discuss this issue with the youths
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Vishal Khandelwal
4 साल 9 महीने पहले
आप युवाओं को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का अंतर स्पष्ट करें।
स्वावलंबन का मतलब स्वयं का रोजगार होता है।
आत्मनिर्भरता का मतलब किसी पर निर्भर न होना होता है।
अतः यह जरूरी नहीं है स्वावलंबी व्यक्ति आत्मनिर्भर भी हो क्योंकि उसको बहुत चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है। आज के समय में व्यक्ति स्वावलंबी तो हो सकता है लेकिन उसका आत्मनिर्भर होना मुश्किल है।
यही व्यवस्था राष्ट्र के लिए भी लागू होती है।
देश के नागरिक स्वावलंबी हो सकते हैं। देश भी स्वावलंबी हो सकता है और अपने बलबूते पर संसाधनों को जुटाने का सामर्थ्य रख सकता होगा लेकिन आज के युग में देश पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो जाएगा यह कहना शायद सही नहीं होगा।
आत्मनिर्भरता का आर्थिक स्पष्टीकरण यह होगा जब हमारा निर्यात हमारे आयात से ज्यादा हो जायेगा तब हम आत्मनिर्भर कहलाने के अधिकारी होंगे।
गांधी जी का कुटीर उद्योग नागरिकों को स्वावलंबी बना सकता है लेकिन राष्ट्र को आत्मनिर्भर नहीं बना सकता।
आत्मनिर्भरता बड़े उद्योगों से आएगी। बड़े उद्योग के साथ जुड़े छोटे उद्योगों और सर्विस प्रोवाइडर्स का स्वावलंबन होगा
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DrMPSaravanan
4 साल 9 महीने पहले
Talk to the youngsters to take up the sports as their profession, and give guarantee for their livelihood. When you compare to western countries our participation in the world Sports is lesser. 40 crores youth can show the world India can do anything . Even crimes of India also will come down if the youngsters involve themselves in the sports
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