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26 जनवरी 2015 तक सभी परिवारों को प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत लाने के लिए अपने सुझाव साझा करें

आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Dec 26, 2014
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
15 अगस्त 2014 को स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष पर माननीय प्रधानमंत्री ...
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टिप्पणियाँ (1)
2011 सबमिशन दिखा रहा है
Sarvesh Kumar Gupta
11 साल 8 महीने पहले
JAN-DHAN YOJNA:
.Passbook issued by Bank must evidence that the account is under "JAN-DHAN YOJNA ACCOUNT"
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SUKHWINDER SINGH GILL
11 साल 8 महीने पहले
I have two suggestions for getting more people to open JanDhan Yojana accounts.
1. All existing account holders should be required to introduce at least one, may be more than one, Jan Dhan Yojana account.
2. It should be made mandatory for all registered firms or corporate bodies to ensure that all of their employees hold accounts, especially Building construction, other labour intensive companies and labour providing companies since it is here that most migrant labourers are employed.
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Bibhu Chandan Jena
11 साल 8 महीने पहले
Awareness programmes should be made by the SARAPANCH in villages and by councillors in MUNICIPALITY or CORPORATIONS,with the help of the nearest bank, That without having an bank account the people are not able to get any govt facilities. Also the misconceptions should be cleared that the account can open with zero balance. By opening an account they are paying nothing but getting many things till life ends and also it helps to the generation. A reward declare for 100% scored villages/wards .
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Sucharita Das
11 साल 8 महीने पहले
garib logo ne bank mein account khola but zada paisa jma nahi Kor pate uske upar bank walo ne 112/- yearly for ATM and 4 times SMS charges nikal lete hai.isliye o logo ka banking ka interest chala jata hai.
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Sucharita Das
11 साल 8 महीने पहले
garib logo ne bank mein account khola but zada paisa jma nahi Kor pate uske upar bank walo ne 112/- yearly for ATM and 4 times SMS charges nikal lete hai.isliye o logo ka banking ka interest chala jata hai.
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naveen singh
11 साल 8 महीने पहले
labour department in city, gram pradhan in village should be the nodal officer or should be given responsibility for opening account as villagers and labours lack bank account most.
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PRABHAKAR OJHA
11 साल 8 महीने पहले
1. Focus on remote backward rural areas.
2. In remote rural areas easy way to open accounts under PMGJDY is not being followed. Cumbersome paper works and several documents are being sought to open the accounts.
3. Illiterate and weaker section of society are denied to be included in Banking system.
4. Third party monitoring is necessary.
5. Bankers are not behaving properly with poor people.They think them worthless for bank.
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Narasingha Patro
11 साल 8 महीने पहले
Very Good step. Excellent. Govt should find out house holds without bank account from each village across India. And responsibility to open accounts for each village should be allocated to a particular bank branches, so that it can be achieved in realty and in ground. Presently many family opens double or triple accounts.
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sandy choudhary
11 साल 8 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
सर्वप्रथम भारत का प्रधानमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई !
मैं सरकारी बैंक का एक मुलाजिम हूं, , अगर आप सच में इस पोस्ट को देख रहें हैं तो आप से कुछ निवेदन करना चाहता हूं जो निम्न प्रकार हैं :-
1. क्या हम बैंकरों को आम जीवन जीने का हक नहीं है हम लोग ग्राहक को भगवान समझ कर पूरे तन मन से काम करते हैं, हम लोग बैंक मे आ तो जाते हैं लेकिन यह नही पता होता कि वापिस घर कितने बजे पहुंचेगे.....शाम के 7 बजेंगे या 9 ।
2. किसी प्रकार की गलती ना हो इसलिए दिमाग को पूरी तरह कंट्रोल मे रख कर काम करते हैं। लेकिन फिर भी कोई गलती हो जाए तो बङे अधिकारी बिना कुछ सुने सस्पेंड कर देते हैं।
3. आप की महत्वाकांक्षी योजना "जन धन योजना" को पूरी लगन से निर्धारित अंजाम तक पहुंचाया, चाहे इसके लिए हमें रविवार को काम करना पङा हो और जिसका मेहनताना हमें अभी तक नही मिला।
4. हमें यह तो पता है कि हमारे परिवार में कितने लोग हैं लेकिन पोस्टिंग इतनी दूर होती है कि उनकी शक्ल तक भूल जाते हैं क्योंकि बैंकर्स को छुट्टियां कहां मिलती हैं।
5. बैंकर्स का कार्य और विभागों की तुलना में ज्यादा रिस्क वाला होता है इतना तो आप जानते ही हैं ।
6. कोई ग्राहक लोन की किस्तें नही चुका रहा तो इसका जिम्मेदार भी हमें ही ठहराया जाता है जबकि नियत तो ग्राहक की खराब होती है , ऊपर से रिकवरी करने जाएं जान का रिस्क क्योकि ग्राहक कई बार हम बैंकर्स पर जान लेवा हमला कर देते हैं।
7. बैंक सरकार को लगातार साल दर साल मुनाफा देते आ रहे हैं लेकिन बैंक कर्मचारी को कभी बोनस नहीं मिलता जबकि रेलवे लगातार घाटे में जा रहा है लेकिन उसके कर्मचारियों को हर साल बोनस मिलता है।
प्रधानमंत्री जी हम बैंकर उपरोक्त परिस्थितियों में भी काम करने को तैयार है लेकिन हमारी तनख्वाह इतनी कम है कि लगता है जैसे हम बंधुआ मजदूर हों जिनके आगे दो वक्त की रोटी डाल दी जाती है और पूरे दिन काम करवाया जाता है। जैसा कि आप जानते हैं हमारा वेतन समझौता दिसम्बर 2012 से लंबित है , जिस पर सरकार बिल्कुल भी गंभीर दिखाई नही देती, क्या हमने कोई गुनाह कर दिया। जहां एक और 7 वां वेतन आयोग लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारीयों में क्लर्क की आय लगभग 30000 होने का अनुमान है वहीं 10 वेतन समझौता लागू होने के बाद भी बैंक क्लर्क की आय 16000 के आस पास होगी और ऊपर से सप्ताह में 6 कार्य दिवस। अब आप ही सोचिए इतना रिस्क होने बावजूद हमें केवल इतना कम वेतन ।
अत: आपसे निवेदन है कि या तो 10 वें वेतन समझौते में उचित वेतन वृद्धि करें या हम सरकारी बैंकर्स को भी वेतन आयोग में शामिल करें।
प्रार्थी- एक आम बैंकर
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Ayush Gupta
11 साल 8 महीने पहले
Dear sir, I dont think that you have so much time to give emphasis on our suggestion.And i think if your department is reading our suggestions then also don't take it important. Because some time some suggestion need to be understand first then we can think its is really ok or usless. please call once i ve great idea to change india. but i and satisfied with this suggestion box.
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