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Inviting Ideas for Non-Institutionalised Rehabilitation of Divyaang Children

आरंभ करने की तिथि :
Oct 01, 2025
अंतिम तिथि :
Nov 30, 2025
17:30 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
In 2025, the Central Adoption Resource Authority (CARA) is placing special focus on promoting family-based care for children with special needs (Divyaang children). In ...
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टिप्पणियाँ (3)
777 सबमिशन दिखा रहा है
Hemant Kumar Ujjwal
1 year 6 दिन पहले
My Views for this imp. topic is trivial and needs to be addressed on priority:
Strengthen early identfn: train frontline health workers, AWWs, and school teachers to screen and refer Divyaang children early for spcl. care and family placement.
Family-first pathways: develop fast‑track assessment and matching protocols that prioritise family-based placements over long-term institutionalisatn.
Supportive adoptn ecosystem: offer post‑adoption support packs — counselling, tailored therapy vouchers, and peer‑mentor families — to reduce placement disruptions.
Capacity building for SAAs and AWWs: mandatory training on special‑needs care, child‑centred assessment, and inclusive parenting techniques.
Incentivise foster and adoptive families: time‑bound financial support, respite care, education subsidies, and linkage to local health/therapy services.
Inclusive comm. prog.: awareness drive to reduce stigma; community‑led respite circles; accessible early intervention centres in districts.
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Akshay Jain
1 year 6 दिन पहले
Kindly make the compulson of all Indian Social Media App in Goverment & Private Offices & for the Goverment Work & Goverment Employees.
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Neha Sharma
1 year 6 दिन पहले
हर एक दिव्यांग बालकों भी को उचित शिक्षा का अधिकार है। अतः सभी स्कूलों में एक विशेष शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। ताकि उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।
" उचित शिक्षा दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा तोहफा है।"
"हर बच्चा खास होता है। दिव्यांग बच्चे हमें सिखाते हैं कि सीखने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सीखने का अधिकार नहीं।"
"विकलांगता जीवन की बाधा नहीं, बल्कि एक अलग तरह की क्षमता है। शिक्षा उस क्षमता को निखारने का माध्यम है।"
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Km Heeresh
1 year 6 दिन पहले
मेरा टॉपिक है दिव्यांग बच्चे
इस देश हर बच्चे को परिवार पाने का अधिकार है । चाहे वो बच्चा दिव्यांग हो । या सही कुछ लोगों को लगता है । बच्चा दिव्यांग होने से अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता है । लेकिन दिव्यांग बच्चे की जब एक इंद्री काम सही करती है तो उसकी बाकी इंद्री मजबूत हो जाती है । जिससे बच्चा किसी कम को करने में माहिर हो जाता है । हमे और दिव्यांग बच्चे के परिवार को बच्चों की हिम्मत बननी चाहिए अगर हम बच्चे का साथ देंगे तो बच्चा अपने आप को सक्षम महसूस करेगा। हमे हर उस बच्चे का हौसला बनना चाहिए जो । जो खुद को कमजोर महसूस करे । ये बच्चे दिव्यांग नहीं बल्कि स्पेशल चाइल्ड होते है । हमे इन बच्चों की शिक्षा एक अनोखे तरीके से करनी चाहिए जैसे अगर कोई बच्चा आंखों से नहीं देख सकता तो उसकी जो उसकी महसूस करने की जो सकती होती है । वो अधिक बढ़ जाती है इन बच्चों के स्पेशल स्कूल होते है । जिनमें इन्हें आंखों से नहीं हाथों से महसूस करके पढ़ाया जाता है । हर बच्चा स्पेशल होता है । हमे बच्चों का हौंसला बढ़ाना है । हमे बच्चों की हिम्मत बनना है । हमे मिलजुलकर बच्चों को काबिल बनाना है ।
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Shiv Shankar Uikey
1 year 6 दिन पहले
गांव या वार्ड स्तर पर सामुदायिक सहायता समूह (Community Support Groups) बनाए जाएं।
प्रमुख बिंदु:
स्थानीय शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी को प्रशिक्षण दिया जाए।
महीने में एक बार “Divyaang Bal Mela” आयोजित किया जाए।
बच्चों को कला, संगीत, खेल, योग जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाए।
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Shiv Shankar Uikey
1 year 6 दिन पहले
ऐसे दिव्यांग बच्चों के लिए, जो संस्थागत सहायता (जैसे स्कूल या केंद्र) तक नहीं पहुंच सकते, उनके घर पर ही शिक्षा, थेरेपी और काउंसलिंग की सुविधा दी जाए।
प्रमुख बिंदु प्रत्येक गांव में एक “Divyaang Mitra Volunteer” नियुक्त किया जाए।
मोबाइल ऐप के माध्यम से उनकी प्रगति और ज़रूरतें ट्रैक हों।
Physiotherapy और Speech Therapy ऑनलाइन/वीडियो कॉल से दी जाए।
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Dhananjay Pratap Singh
1 year 6 दिन पहले
सरकार द्वारा दिव्यांग बाल दत्तक सहायता नीति जारी की जाए, जिसमें परिवार आधारित पुनर्वास के स्पष्ट दिशा-निर्देश हों।
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Dhananjay Pratap Singh
1 year 6 दिन पहले
प्रत्येक राज्य में इन्क्लूसिव डे-स्कूल मॉडल विकसित किया जाए, ताकि दिव्यांग बच्चे सामान्य शिक्षा प्रणाली में शामिल रह सकें।
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Dhananjay Pratap Singh
1 year 6 दिन पहले
दिव्यांग बच्चों को अपनाने वाले परिवारों के लिए 24x7 हेल्प डेस्क बनाई जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सहयोग मिल सके।
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Dhananjay Pratap Singh
1 year 6 दिन पहले
दिव्यांग बच्चों की विशेष जरूरतों पर आधारित पेरेंटिंग मोबाइल ऐप विकसित किया जाए, जिससे परिवारों को सलाह और संसाधन तुरंत मिलें।
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