PUSHPENDRA SINGH
4 महीने 5 दिन पहले
नमस्ते प्रधानमंत्री जी, मैं पुष्पेन्द्र विद्यार्थी!
दिल्ली के नंद नगरी इलाके में रहता हूं। दिल्ली विश्वविद्यालय के महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में पढ़ता हूं।
मोदी जी जैसा कि हम जानते हैं दिल्ली एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है और इसलिए यहां बहुत बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है नतीजा कचरे का ढेर। मैंने इस विषय में जांच पड़ताल की तो पता चला कि उत्पन्न कचरे का 60 से 65% ही पुनर्नवीकरण हो पाता है और लगभग 1.5 लाख टन कचरा प्रतिमाह कचरे का पर्वत बनने में योगदान देता है। इसका मुख्य कारण है कि लोग कूड़ा वर्गीकरण को लेकर जागरूक नहीं है। गली मोहल्लों में कचरा लेने जो वहां आता है उसमें गीले और सूखे कचरे के लिए अलग कनस्तर होते है बावजूद इसके पर्याप्त जानकारी और जागरूकता के अभाव में मिश्रित कचरा इक्कठा हो जाता है। इसकी छटनाई करने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों को अतिरिक्त समय और श्रम व्यर्थ करना पड़ता है।यदि हर घर से गीला और सूखा कचरा अलग अलग स्वीकार किया जाए तो और ऐसा करने वाले लोगों को कुछ reward points दिए जाए तो हम दिल्ली से कचरे के पहाड़ कम कर सकते हैं।उस गीले कचरे से कंपोस्ट भी मिलेगा।
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