Inviting Ideas for Shri Parshurameshwar Pura Mahadev Temple Mahashivratri as Zero Waste Mahotsav – Baghpat

आरंभ करने की तिथि :
May 05, 2026
अंतिम तिथि :
Jun 30, 2026
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
The District Administration Baghpat invites citizens, youth, innovators and institutions from across India on MyGov to share innovative and practical ideas to transform the Shri ...
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kale Purushottam Namdev
2 महीने 2 सप्ताह पहले
aosbisw
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Shruthi
2 महीने 2 सप्ताह पहले
1) organise pavements for walking with carpets. Structured movement of people keeps the place in control of activities that affect peace of mind and conduct in the environment.
2) establish closed bins in and around the temple. With a warning sign to use only bins. This is governments responsibility to implement civic sense through awareness and laws.
3) keep the surroundings aesthetically respectful by adding walls around trees, implementing sitting benches or floor sit mats, boards with warning to not be louder. Establishing all the these in appropriate places guides people what is allowed to do in the environment by also protecting dignity of the temple.
4)establish water sheds, shade sheds, keeping shops in and around in a hygienic manner with same rules as in temple can attract more of tourists.
5)ensure enough security guards and surveillance are there to prevent crimes, and crowding, even during important days. Crowding must be two feet gap between each or family.
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ifixxxxxcf
2 महीने 2 सप्ताह पहले
उत्तराखंड का सबसे बड़ा दुख सिर्फ पलायन नहीं, बल्कि वो नेता हैं जो चुनाव जीतने के बाद देहरादून भाग जाते हैं।
जो नेता चुनाव के समय गाँव-गाँव घूमते हैं, वही जीतने के बाद पहाड़ भूल जाते हैं।
एक आम आदमी 10 साल नौकरी करके भी गाड़ी, बंगला और बड़ी प्रॉपर्टी नहीं बना पाता,
लेकिन कई नेता सिर्फ 1-2 साल में करोड़पति बन जाते हैं। आखिर ये पैसा आता कहाँ से है?
अगर नेताओं के बच्चे भी पहाड़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ें,
अगर उनके परिवार भी गाँव में रहें,
तो सड़क, अस्पताल, स्कूल और रोजगार अपने आप सुधर जाएंगे।
पहाड़ का विकास भाषणों से नहीं,
पहाड़ में रहकर काम करने से होगा।
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2 महीने 2 सप्ताह पहले
उत्तराखंड का सबसे बड़ा दुख सिर्फ पलायन नहीं, बल्कि वो नेता हैं जो चुनाव जीतने के बाद देहरादून भाग जाते हैं।
जो नेता चुनाव के समय गाँव-गाँव घूमते हैं, वही जीतने के बाद पहाड़ भूल जाते हैं।
एक आम आदमी 10 साल नौकरी करके भी गाड़ी, बंगला और बड़ी प्रॉपर्टी नहीं बना पाता,
लेकिन कई नेता सिर्फ 1-2 साल में करोड़पति बन जाते हैं। आखिर ये पैसा आता कहाँ से है?
अगर नेताओं के बच्चे भी पहाड़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ें,
अगर उनके परिवार भी गाँव में रहें,
तो सड़क, अस्पताल, स्कूल और रोजगार अपने आप सुधर जाएंगे।
पहाड़ का विकास भाषणों से नहीं,
पहाड़ में रहकर काम करने से होगा।
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2 महीने 2 सप्ताह पहले
उत्तराखंड का सबसे बड़ा दुख सिर्फ पलायन नहीं, बल्कि वो नेता हैं जो चुनाव जीतने के बाद देहरादून भाग जाते हैं।
जो नेता चुनाव के समय गाँव-गाँव घूमते हैं, वही जीतने के बाद पहाड़ भूल जाते हैं।
एक आम आदमी 10 साल नौकरी करके भी गाड़ी, बंगला और बड़ी प्रॉपर्टी नहीं बना पाता,
लेकिन कई नेता सिर्फ 1-2 साल में करोड़पति बन जाते हैं। आखिर ये पैसा आता कहाँ से है?
अगर नेताओं के बच्चे भी पहाड़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ें,
अगर उनके परिवार भी गाँव में रहें,
तो सड़क, अस्पताल, स्कूल और रोजगार अपने आप सुधर जाएंगे।
पहाड़ का विकास भाषणों से नहीं,
पहाड़ में रहकर काम करने से होगा।
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2 महीने 2 सप्ताह पहले
उत्तराखंड मे पलायन का मुख्य कारण रोजगार के साधन का आभाव अगर रोजगार हो तो लोग पहाड़ो मे रुकेंगे फिर स्कूल स्वास्थ्य की व्यवस्था भी तभी होंगी जब पब्लिक होंगी जंगल भी बच्चे रहेंगे देसी खाध्यान भी होगा भैंस पालन भी होगा जानवर भी बस्तयों मे नहीं आएंगे जब gaun मे चार परिवार है तो वो कैसे जंगल जायेंगे घास के liye भालू बाग दिन दोपहर मे घुमते है पहाड़ो मे इसलिए सबसे पहले रोजगार के साधन पैदा करने चाइये गवर्नमेंट को तभी पहाड़ बच सकता है वरना यहाँ भालू बाग के सिवा कुछ नहीं मिलेगा चार बच्चे स्कूल जाते है inter class मे उनके साथ गार्जन को जाना पड़ता है रास्ते मे भालू बाग के डर से
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उत्तराखंड मे पलायन का मुख्य कारण रोजगार के साधन का आभाव अगर रोजगार हो तो लोग पहाड़ो मे रुकेंगे फिर स्कूल स्वास्थ्य की व्यवस्था भी तभी होंगी जब पब्लिक होंगी जंगल भी बच्चे रहेंगे देसी खाध्यान भी होगा भैंस पालन भी होगा जानवर भी बस्तयों मे नहीं आएंगे जब gaun मे चार परिवार है तो वो कैसे जंगल जायेंगे घास के liye भालू बाग दिन दोपहर मे घुमते है पहाड़ो मे इसलिए सबसे पहले रोजगार के साधन पैदा करने चाइये गवर्नमेंट को तभी पहाड़ बच सकता है वरना यहाँ भालू बाग के सिवा कुछ नहीं मिलेगा चार बच्चे स्कूल जाते है inter class मे उनके साथ गार्जन को जाना पड़ता है रास्ते मे भालू बाग के डर से
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kruthika
2 महीने 2 सप्ताह पहले
In this occasion, try to use indian culture. use leaves, nd keep some shower points for people who comes for bath and don't use any plastic items nd don't allow any plastic items into the temple or outside of temple nd near by area use steel glass nd keep water tanks
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Andaluri Srinivas
2 महीने 2 सप्ताह पहले
Also not to pollute Yamuna . During such Utsavs , usually tons of waste is dumped into water bodies.
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