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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 27 फ़रवरी 2022 को मन की बात सुनने के लिए, जुड़े रहे!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 27 फ़रवरी 2022 को मन की बात सुनने के लिए, जुड़े रहे!

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Ajeet Kumar Sharma
Ajeet Kumar Sharma 4 साल 6 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी आप निवेदन करता है कि हमारे पास कोई रोजगार नही है सर कब तक हम दूसरे के सहारे जियेगा सर मदत करने का कृपा करे |Ac 33401497252 SBIN0002909 ग्राम शिवनगर पो0 मसुदनपुर थाना बलिया जिला बेगूसराय बिहार पि0 न0 851211 8986946002
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Chandra Bhan Jat
Chandra Bhan Jat 4 साल 6 महीने पहले
मेने दोनों बार अपने देश के लिए एक ईमानदार प्रधानमंत्री चुना है, उम्मीद है मेरी बात का ज़िक्र आप मन की बात में अवश्य करेंगे🙏
1.नयी पेन्शन वाले कर्मचारियों की पेन्शन सिस्टम को आप एक बार किसी कॉमेटी से रिव्यू करवायें, इससे आपको भी इसके हालात पता चल जाएँगे, इसके साइडइफ़ेक्ट अब सामने आने लगे है, आप देश भर के कर्मचारियों के बुढ़ापे को नज़रअंदाज़ नहीं करेंगे। आपसे उम्मीद है तभी आपको लिखा है प्रधानमंत्री जी, उम्मीद है आप नयी पेन्शन स्कीम को बंद करवा कर पुरानी पेन्शन लागू करने बारे में ऐतिहासिक फ़ैसला लेंगे।
धन्यवाद प्रधानमंत्री जी
चंद्र भान जाट
व्याख्याता, राजस्थान
MANIKANTA KADIDELA
MANIKANTA KADIDELA 4 साल 6 महीने पहले
Hai sir i really don't know about this programme but i believe that you can build up a change in India because u are the only one who can change entire system which is going in India,my suggestion is that every child should go to govt schools and every private schools and colleges should be colabrate with govt schools and colleges so that there will be no problem to students as well as private schools which are running with high fees
Chandra Bhan Jat
Chandra Bhan Jat 4 साल 6 महीने पहले
मेने दोनों बार अपने देश के लिए एक ईमानदार प्रधानमंत्री चुना है, उम्मीद है मेरी दो बातों का ज़िक्र आप मन की बात में अवश्य करेंगे🙏 1. नयी पेन्शन वाले कर्मचारियों की पेन्शन सिस्टम को आप एक बार किसी कॉमेटी से रिव्यू करवायें, इसके साइडइफ़ेक्ट अब सामने आने लगे है, आप देश भर के कर्मचारियों के बुढ़ापे को नज़रअंदाज़ नहीं करेंगे। आपसे उम्मीद है तभी आपको लिखा है प्रधानमंत्री जी, उम्मीद है आप NPS सिस्टम हटाकर कर पुरानी पेन्शन लागू करने का इतिहासिक फ़ैसला लेंगे। 2. आप गायों की दुर्दशा देखें, जब से बिकना बंद हूयी है किसानों ओर अन्य लोगों ने पालना बंद कर दिया है, मेरे अकेले के गाँव में लगभग 700-800 गायें दिन रात भूकी प्यासी रहती है हालात ख़राब है, आप उन बेज़ुबान जानवरों का सोचें, यदि आप कुछ ना कर पायें तो उनको पुराने सिस्टम में जाने दें, क्यों की एक बार मरना हज़ार बार भूक प्यास सर्दी से मरने से बेहतर होता है, मेरे लिये भी पशुओं का जीवन भी जीवन है लेकिन ये हालात देखे नहीं जाते। धन्यवाद प्रधानमंत्री जी चंद्र भान जाट व्याख्याता, राजस्थान
Ranjeet singh
Ranjeet singh 4 साल 6 महीने पहले
श्रीमान माननीय प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार नई दिल्ली महोदय, मेरे सुझाव पर ध्यान देने का कष्ट करें आत्म निर्भर अभियान के तहत क्या सरकार को भी आत्मनिर्भर नहीं होना चाहिए सरकार है फ्री बांटने के लिए टैक्सपेयर्स पर निर्भर क्यों रहती है मेरी बात बुरी लगे या भली आखिर में सच तो बोलना ही पड़ेगा महोदय, दो बच्चों का कानून नहीं तो हम ज्यादा बच्चे बालों के लिए टैक्स का बोझ क्यों सहेंगे कृपया करके इस बात पर विचार करें या समस्या समस्त देशवासियों की है आपसे अनुरोध करते हैं कि आप इस समस्या पर एक बार स्वयं विचार करें
Yashwant Kumar sahu
Yashwant Kumar sahu 4 साल 6 महीने पहले
आजकल देखा जाए तो प्रदूषण इतना हद तक बढ गया है कि इससे लडा नहीं जा सकता हैं प्रदूषण से बचने और लड़ने का केवल एक ही कारण है, जितना हो सके हमें पेड लगाने चाहिए। मान लीजिये आप एक गाॅंव में जाते है, वहाॅ। पर आप यह पाएंगे कि जितने अधिक पेड़ है , जंगल है उतनी ही शुद्ध हवा हमें वहां मिलती हैं ऐसा इसलिए कि क्योंकि जंगालों की वजह से जितना प्रदूषण होता है, वह सब पेड़ पौधे अवशोषित कर लेते हैं और हेै हमंे शुद्ध हवा मिलती है। दूसरी ओर देखा जाए तो हम शहरों में आते है हमें उतना ही अधिक प्रदूषण मिलेगा क्योंकि वहां पर पेड़ों की संख्या कम होती जा रहीं जिसकी वजह प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।
Yashwant Kumar sahu
Yashwant Kumar sahu 4 साल 6 महीने पहले
वृक्ष वह है, जिसके बिना मानव का जीवन असंभव है। मान लीजिए अगर पेड़ हमें वाईफाई सिगनल देते है तो हम आज तक कितने पेड़ लगा चुके होते परंतु सबसे बड़ी दुख की बात है कि पेड़ हमें सिर्फ आॅक्सीजन ही प्रदान करते है। हम इतने ज्यादा प्रोघोगिकी के आदि हो गए है कि हम पर्यावरण आदि चीजों के बारे में सोचते ही नहीं है। पर्यावरण का लाभ लेकर उसे ही प्रदूषित कर रहे है। अगर हम सच में जीना चाहते है तो हमें अधिक से अधिक पेड लगाने होगें। पेडों के द्वारा हमें आॅक्सीजन प्राप्त होती हैं और जितनी भी कार्बनडाईआॅक्साइड होती है, वह पेड़ पौधे अवशोषित कर लेते है। जिसकी वजह से हम स्वच्छ वातावरण में रहते हैं। हमें शुद्ध हवा मिलती है। और जितने अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएंगें उतना ही शुद्ध वातावरण मिलेगा। पेड़ पौधे सभी प्रकार की विषैली गैसों को अवशोषित कर लेते है।
MahalaxmiThevar
MahalaxmiThevar 4 साल 6 महीने पहले
GREETINGS PRIME MINISTER SIR THE IDEA OF DIGITIZING MANY ASPECTS OF OUR NATION IS INDEED AN IMPORTANT STEP TOWARDS ACHIEVING THE DREAM OF AMRITKAAL...AND IT IS POSSIBLE BECAUSE OF OUR HONOURABLE FINANCE MINISTER NIRMALA SITARAMANJI...WE THE CITIZENS OF INDIA BELIEVE IN THE IMPLEMENTATION OF ALL THE PLANS MADE FOR INFRASTRICTURE DEVELOPMENT AND EAGERLY WAITING TO SEE INDIA AT 100
Tapan Jani
Tapan Jani 4 साल 6 महीने पहले
My name is Tapan Jani & i am an Advocate by Profession at Bhavnagar(Gujarat) India. My M.No is 8238483838 & Email Id is tapanhjani@gmail.com. Sir Barcouncil of India Rules 47 to 49 restrict the Advocates from doing Business & Job without surrendering their SANAD to their respective Barcouncils. Sir with respect i say that the Advocates should be allowed to do Business & Job without Surrendering their SANAD as the COVID-19 Pandemic has changed everything & it has become almost Impossible for the Advocates (Preactising in District & Taluka Courts) to survive only on their Professional Income. Further the said rules also say that if the Advocates do Business or Job they can't hold the Post of Manager/Secretary (Posts involving Day to Day Business) which also sounds Illogical as doing Business/Job (As An Advocate) Withholding the SANAD has no relation & infact it allows the Advocates to maintain their Professional Identity & Dignity. Regards.