SUMAN SHUKLA
5 साल 4 महीने पहले
रोग पाप कर्म का हो दूर चित्त चर्म का ।
अतीव गूढ़ भावना का मर्म है सनातनी।
विकास का प्रयास करो,विश्व में प्रवास करो।
पर चरित्र ह्रास ! हाय शर्म है सनातनी।
सारे सम्प्रदाय आयें,पंथ बिन बुलाये आयें।
सारी ही प्रजातियो पे नर्म है सनातनी।
जो आस्था से चूर हो तो व्याधियां भी दूर हों।
विश्वास की विजय पताका धर्म है सनातनी।
जय हिन्द।
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