Vikas Sharma Daksh
7 साल 8 महीने पहले
अमृतसर की घटना से हमें सीख मिलती है कि आयोजक सचेत हों ! हर वर्ष कितने ही मासूम दिवाली के दिन पटाखों से घायल होते है, अधिकांश मामलो में बच्चे बिना किसी व्यसक की निगरानी के पटाखे चलाते वक़्त घायल होते हैं! सामूहिक आतिशबाजी आयोजन से ऐसी संभावना कम होगी ना मात्र एक परिवार अपितु सभी पडोसी मिलकर बच्चों पर नियत्रण रख पायेंगे! कृपया देश को इसके लिए प्रेरित करें !
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