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नई फसल बीमा योजना के लिए नाम सुझाएँ

Suggest Name for Proposed New Crop Insurance Scheme
आरंभ करने की तिथि :
Aug 24, 2015
अंतिम तिथि :
Sep 24, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

कृषि‍ आपदाओं व प्रतिकूल मौसम के कारण संसुचित फसल नष्ट होने, कृषि‍ ...

कृषि‍ आपदाओं व प्रतिकूल मौसम के कारण संसुचित फसल नष्ट होने, कृषि‍ में प्रगतिशील वैज्ञानिक तरीकों, उच्चतर प्रौद्योगिकी का उपयोग को बढावा देने एवं आपदा वर्षों में कृषि‍ आय को स्थिर रखने के लिये, भारत सरकार द्वारा वर्ष 1985 से ही फसल बीमा योजनाओं का क्रियांवयन किया जा रहा है तथा समय समय पर योजनाओं का मूल्यांकन राज्य सरकार के सुझाव एवं योजनाओं के क्रियांवयन के अनुभव के आधार पर बीमा योजनाओं में संशोधन किया जाता रहा है| वर्तमान में कृषि मंत्रालय और किसान कल्याण द्वारा इस देश के कोने-कोने मे "राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम (NCIP)" के तीन घटक अर्थात राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS), मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) और नारियल पाम बीमा योजना (CPIS) राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) के साथ-साथ संशोधित किया जा रहा है।

इन योजनाओं की समीक्षा के बाद, कृषि मंत्रालय और किसान कल्याण एक नई फसल बीमा योजना तैयार करने की प्रक्रिया में है।

इस संदर्भ में, एक नए नाम के लिए सुझाव प्रस्तावित नई फसल बीमा योजना के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख 23 सितंबर 2015 है।

निम्नलिखित प्रविष्टियों के लिए शर्तें हैं:

1. नाम “किसान समुदाय के लाभ के लिए एक नई फसल बीमा योजना के उद्देश्य” को प्रतिबिंबित करना चाहिए

2. प्रविष्टियां हिंदी या अंग्रेजी में होना चाहिए

इस कार्य के लिए प्राप्त हुई प्रविष्टियाँ
2778
कुल
2303
स्वीकृत
475
समीक्षाधीन
फिर से कायम कर देना
2303 सबमिशन दिखा रहा है
Anil yadav
Anil yadav 10 साल 12 महीने पहले
This is reguest to Namo sir there are only 35% farming land in India and other are banjar lands.for devlopement process of in India use this formula 0%FARMING LAND 100%BANJAR LAND. OTHERWISE SITUATION WILL BE VERY CRITICAL IN PRODUCTION OF FOOD GRAINS TO FULFILL THE NEED OF HEAVY POPULATION IN INDIA IN FUTURE.AND NEED TO MAKE STRICT RULE FOR THIS. AND NEED TO ATTRACT FARMERS AND FAMILIES FOR MORE FARMING BY GIVING BETTER FAMILIES FOR FARMING AND HIS FAMILIES