Chander Dhingra
8 years 4 months ago
प्रतिरक्षा विभाग से लम्बे सेवा कार्यकाल के बाद मैंने एक अस्पताल के साथ हाथ मिलाया और वहां एक वालंटियर के रूप में जाना शुरू किया ताकि रोगियों और उनके परिवारजनो की यथासंभव सहायता की जा सके। मैंने पाया कि जो पीड़ा में हैं वे सिर्फ सहानुभूति और हौसला चाहते हैं। उनसे बात करिये, उनकी बात सुनिए। उन्हें कोई किस्सा या कविता सुना दीजिये या उनसे सुन लीजिये। उनके साथ बीते आपके कुछ मिनिट या घंटे, उनका पूरा दिन सुखद बना सकते हैं। जहाँ तक संभव हो सहायता या भरोसा दीजिये। ये कार्य हमें भी आत्मतुष्टि देता है।
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