DILIP JAKHAR
8 years 4 months ago
आज पूरे विश्व में शांति के भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। वैज्ञानिक व राजनीतिज्ञ बाहरी प्रयासों व हथियारों से शांति स्थापित करने में लगे हुए हैं। अशांति उतनी ही तेज गति से बढ़ रही है। वर्तमान मानव शांति का प्रयास बाहर ढूँढ़ रहा है जबकि असीम शांति का अकूट भण्डार तो मानव के भीतर है। और यह कार्य भारतीय सिद्धयोग दर्शन से ही संभव है। भारतीय योग वेद रूपी कल्पतरू का अमर फल है जिससे साधक के त्रिविद्ध ताप (आदि भौतिक, आदि दैहिक व आदि दैविक) शांत होते हैं। हे सत्पुरूषों! इसका सेवन करो।
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