Prafullha Kumar
8 years 3 months ago
मेरे भाई ने बैंक ऑफ बड़ोदा से वर्ष 2011 में ऋण किया था, इसी दौरान ऋण धारक की पत्नी ब्लड कैंसर से पीड़ित हो गई और वर्ष 2014 में देहांत भी हो गया
बैंक वाले ने मानवता को भी ध्यान में न रखते हुये ऋण धारक को NPA के द्वारा पीड़ित करना चालु कर दिया और हमारे पापा जिनकी 85 वर्ष की आयु है जो कि जमानतदार उनकी एकमात्र घर को बेचने में हाहाकार मचा रखी है
जबकि बैंक के पास घर के अलावा बचे ऋण के एवज में 3 गुना की संपत्ति है फिर भी बैंक पापा को मानसिक और शारिरिक परेशान कर रही है
सेटलमेंट करने को भी तैयार नहीं हैं
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