SachchidaNandKumar
3 years 3 months ago
माननीय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम,
आजकल जाति गत जनगणना का शब्द बहुत चर्चा में है।जो विपक्ष का 75साल पहले के गलती को दोहराये जाने का प्रयास है।
संविधान प्रदत जाति गत आरक्षण हीं समाज के जातियों में बंटे होने को वैधता प्रधान करता है और संविधान प्रदत समानता के अधिकार के विपरीत है।साथ हीं जातिगत आरक्षण संविधान के मुल भावना के विरुद्ध संदेश देता है।
समाज के विभिन्न जातियों में बंटे होने को मान्यता देने वाला एक मात्र दस्तावेज भी संविधान हीं है क्योंकि पुर्व काल में लोगों को उनके व्यवसाय के आधार पर नामंकित ही किया गया था और व्यवसाय बदलने के साथ नामांकन भी बदल जाता था।
साथ हीं यह समाज में भेदभाव करने के लिये राजनीतिक पार्टियों द्वारा प्रयोग किये जाने वाला मुख्य अस्त्र है ।इसका सबसे ज्यादा फायदा राजनीतिक दलों को ही है न कि समाज को ।
अतः जातिगत जनगणना के स्थान पर आर्थिक स्तर पर गणना कराया जाय और उस आधार पर कमजोर वर्ग को विशेष सुविधा दी जाय उनके उत्थान के लिये न कि जातिय आधार पर।
संविधान संशोधन द्वारा हमेशा के लिये समाज का यह भेदभाव समाप्त किया जाय।उम्मीद है पहल होगी।
सच्चिदानंद
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