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Tune in to 120th Episode of Mann Ki Baat by Prime Minister Narendra Modi on 30th March 2025

Tune in to 120th Episode of Mann Ki Baat by Prime Minister Narendra Modi on 30th March 2025

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BajrangSingh
BajrangSingh 1 year 5 months ago
श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय प्रणाम, में पिछले चार वर्षों से खाटूश्यामजी मेला मार्ग में जाकर श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश लिखे हुए जुट के कैरी बैग देकर सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने का तथा अपने घर पर आयोजित किसी भी शुभ कार्य पर एक पौधा लगाकर उसको पेड़ बनाने की अपील करता हूं इस बार फाल्गुन मेले में श्रद्धालुओं से बाबा श्याम के दर्शन करने के बाद एक पौधा लगाने की अपील के साथ ही एक भंडारा स्थल पर जाकर आयोजकों से डिस्पोजल का उपयोग न करने की अपील कर उनको वॉशेबल बर्तन दिए जिससे उनके 20 से 22 हजार रुपए की बचत हुई और हर वर्ष से इस वर्ष स्वच्छता भी 60% अधिक रही इस कार्य के लिए मैं 8-10 अन्य भंडारा संचालकों से भी अपील की तो उन्होंने अगले फाल्गुन मैले में वॉशेबल बर्तनों का उपयोग करने का मुझे आश्वासन दिया क्योंकि मैले मे लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन को आते है और भंडारों मे डिस्पोजल मे ही प्रसादी ग्रहण करते है जिससे डिस्पोजल कचरा बहुत ज्यादा हो जाता है इससे मैला के बाद स्थानीय लोगों को काफी परेशानी होती है इसलिए मैंने भंडारा संचालकों से बर्तनों का उपयोग का निवेदन किया
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
आज भी गाँव के वैदजी का शिष्य जो पिछले 30-40 वर्षों से नुस्खों को कूट रहा है डॉक्टर कहलाता है और विदेशी चिकित्सक उसके व्यावहारिक ज्ञान का मुकाबला नहीं कर सकता प्राचीन चिकित्सा पद्धतिओं का सम्मान कीजिये जिनकी वजह से हम भारतीओं की इम्मुन पावर हार्ड है कोरोना काल ने साबित भी किया है विदेशी चिकित्सा ने भी सिर्फ इसी का सहारा लिया सूर्य स्नान कराया / काढ़ा पिलाया / गर्म पानी पिलाया चिकित्सा के नाम पर सिर्फ ओक्सीजन का सहारा लिया निष्कर्ष क्या निकला ?= डॉ अनुराग कपिल १३/०१/२०२४
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
मनुष्य को अब तो समझ जाना चाहिए कि एलोपैथी सिर्फ एमरजैंसी की चिकित्सा विधि है, अनुशासित संयमित प्राकृतिक जीवन शैली एवं भारतीय संस्कृति ही एक मात्र तरीका है स्वास्थ प्राप्ति का || डॉ अनुराग कपिल
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
खाली पड़े अपने प्लॉट्स मैं पेड लगाएं फलदार पौधा जरूर लगाएं प्रकृति का क़र्ज़ चुकाएँ -डॉ कपिल
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
रोगी के कुछ प्रश्न आदरनिये सफ़ेद कोट टाई वाले डॉ साहब से ! सर मैं २० साल पहले आपके पास आया था कुछ लक्षण थे आपको अपनी तकलीफ बताई थी आपने एक पुड़िआ और २-३ गोलियां दी थी आराम आ गया था ! ८ महीने बाद वही लक्षण तीव्र हो गए आपने पुड़िआ और गोलिओं के साथ एक कैप्सूल जोड़ दिया था आराम तो आ गया था पर शरीर मैं लगा कुछ ठीक सा नहीं है ! लगभग २ साल बाद कई प्रकार के अन्य लक्षण के साथ मैं फिर आपकी शरण मैं आया था ! आपका क्लिनिक अब काफी बड़ा बन गया था फीस भी बढ़ गई थी आपका नाम भी शहर मैं गूँज रहा था ! आपने पुराणी दवा के साथ साथ इंजेक्शन भी लगाया था आराम आ गया लेकिन शरीर कुछ गिरा गिरा सा रहने लगा था ! १० साल पहले फिर आपकी सेवाओं की जरुरत पड़ी एंटीबीओटिक दवाओं का बड़ा शोर था ! बड़ी बड़ी फार्मा कंपनी बहुत शानदार स्ट्रिप्स पैकिंग इतनी मनोहारी की लगा बस रोग के लिए रामबाण मिल गया ! आपका रुतबा भी शानदार था खर्चा काफी था लेकिन रिसेप्शन पर ही जमा हो जाता था ! वो २ दिन मैं ही अपनी दूकान प
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
क्या आप फुंसी फोड़ा जुकाम खांसी बुखार सर दर्द को भी आपातकालीन अवस्था मानते हैं ? क्या शरीर का नुक्सान कराकर भी एलॉपथी जहर को शरीर मैं डालना छाते हैं ? आप ऐसा करते हैं क्युकी आपको पता ही नहीं चलता है की दवा शरीर मैं जाकर कितना नुक्सान कर रही है कितने साइड इफ़ेक्ट पैदा होते हैं आपको पता नहीं चलता है जब पता चलता है तब तक देर हो चुकी होती है डॉ साहब की भी कोई जिम्मेवारी नहीं रहती है कोई गवाह या सबूत नहीं होता है ! काश हमारे शरीर के पास भी अपनी आवाज होती भाषा होती सभी अंग अपने ऊपर होने वाले अत्याचार को ब्यान करा पते तो मनुष्य को पता होता की वो अपने अमूल्य शरीर एवं उसके कोमल अंगों पर कितना अत्याचार कर रहा है कृपया अब पूरा सत्य आपके सामने है सिर्फ जान बचने के लिए ही एलॉपथी का सहारा ले बाकि जैसा आपको ठीक लगे आपको सत्य बताना मेरा काम उसे उपयोग मैं लाना आपका कर्तव्य =स्वस्थ रहें खुश रहें डॉ अनुराग कपिल स्वास्थ शिक्षक
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
एलॉपथी मैं तात्कालिक आराम की व्यवस्था की जाती है अगर किसी विशेष अंग मैं इन्फेक्शन है तो तात्कालिक आराम के लिए पेनकिलर दिया जाता है ताकि शरीर को दर्द का अनुभव ना हो दर्द शरीर मैं है बस महसूस नहीं होता है ! इन्फेक्शन के लिए एंटीबीओटिक दी गई यानी इन्फेक्शन के जीवाणु से लड़ने के लिए उसे समाप्त करने के लिए उससे बड़ा जहर दिया गया जिसका प्रभाव शरीर पर जरूर होगा लेकिन आपातकाल मैं सिर्फ देखा जाता है फोरि तौर पर आराम लाना है शरीर पर उसका दुष्परणाम नहीं देखा जाता है अगर इन्फेक्शन ज्यादा है तो उस अंग को या उसके टुकड़े को काट कर निकाल दिया जाता है ये इलाज नहीं है सिर्फ लक्षण से मुक्ति दिलाने का उपकर्म मात्र है ! कोई भी रोग है उसकी तीव्रता की एक समय अवधी होती है ३ दिन से लेकर ७ दिन तक आप इस दौरान दवा ले या ना ले ३ या ७ दिन मैं रोग स्वयं चला जाएगा लक्षण चले जायेंगे दवा सिर्फ वेदना को कम करने के लिए दी जाती है क्या आप फुंसी फोड़ा जुकाम खांसी ब
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
न दुखी करो मन को न ज़ख़्मों को छीलें। ज़िन्दगी जैसी भी है बस! सुकून से जी लें। गिर न जाना गश खा कर कहीं सहरा में शिकार समझ कर झपट लेंगी यहाँ चीलें। सच् सुनने को होती नहीं तैयार यह दुनिया चढ़ा कर सूली पर ठोक देती है फिर कीलें। जीवन के झमेलों ने यूँ जकड़ा है जंजीरों में टूट जाते हैं सपने काम आती नहीं दलीलें। रोज़ रोज़ घुट कर मरने से तो अच्छा है कर के हौसला एक बार घूंट कड़वा पी लें।
nidhi jain
nidhi jain 1 year 5 months ago
Respected Prime Minister, All the bangladeshi household maids must be taken out of our country. because they provide cheap services everyone in Delhi NCR is hiring them as help. the nexus have all the data of our citizens as they are penetrating through services and bogus Aadhar cards. Action against people or employees who issue such Aadhar cards. with best regards, nidhi
dr anurag kapil
dr anurag kapil 1 year 5 months ago
कोई भी चिकित्सा पध्दति तब तक कामयाब नहीं हो सकती जबतक उसका सम्बन्ध प्रकृति के साथ ना हो ।।प्रकृति के नियमों के अधीन ही सभी जड़ चेतन का विकास हो रहा है ।जीवन चक्र चाहे वो मनुष्य का हो या पशु /पक्षी/जीवाणु /कीटाणु समस्त जीवों का प्रकृति हमेशा सभी की सहायता करती है प्रकृति ने सभी को जीवित रखना है और उनका पालन पोषण करना है बिना किसी भेदभाव किये हुए । एलॉपथी इस बात का जीता जाता प्रमाण है इस पध्दत्ति मैं प्रकृति का साथ नहीं लिया जाता बल्कि प्रकृति के विरुद्ध जाकर अप्राकृतिक साधनो का प्रयोग किआ जाता है मैं एलॉपथी के विरोध मैं नहीं हूँ अगर मेरा एक्सीडेंट हो जाये तो मैं भी एलॉपथी की शरण मैं ही जायूँगा । क्युकी एलॉपथी ही इमरजेंसी मैं जीवन बचा सकती है क्युकी एलॉपथी पद्दत्ति है ही इमरजेंसी के लिए ना की साधारण इलाज के लिए ॥एलॉपथी सिर्फ और सिर्फ जीवन बचने के लिए ही प्रयोग की जानी चाइये ।साधारण रोगो एवं व्यादिओं का उपचार प्राकृतिक तरीकों से ही होना चाहिए मैं आपको समझाता हूँ कुछ वर्षो पहले तक घर के बाहर स्मोक जल