Saroj sharma
1 year 3 months ago
माननीय प्रधानमंत्री जी तेलंगाना के सभी स्कूलों में तेलुगु को द्वितीय भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया गया है। क्या किसी भी सीबीएसई स्कूल में ,किसी भी छात्र को,किसी विशेष भाषा को द्वितीय भाषा के रूप में चुनने के लिए बाध्य किया जाना न्यायपूर्ण है? जिन बच्चों की मातृभाषा तेलुगू नहीं है तथा जिनके अभिभावकों का तबादला भारत में कहीं पर भी होता रहता है, क्या यह उन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा। आज की शिक्षा प्रणाली छात्र केंद्रित है तो हम तेलंगाना के भी किसी बच्चे को तेलुगु को ही दूसरी भाषा के रूप में चुनने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। राज्य सरकार के स्कूलों को छोड़कर बाकी सभी स्कूलों में तेलुगु को दूसरी या तीसरी भाषा के रूप में चुनने की छूट होनी चाहिए। कृपया छात्रों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है उसे रोकिए।
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