Minakshi bhardwaj
6 months 3 weeks ago
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,
सादर प्रणाम।
मैं एक साधारण भारतीय नागरिक हूँ। यह पत्र किसी आग्रह, अपेक्षा या परिचय के लिए नहीं है। केवल एक अनुभव साझा करने का मन हुआ,इसलिए लिख रही हूँ।
वर्ष 2008 के आसपास,जब डिजिटल माध्यम अभी सामान्य जीवन का हिस्सा नहीं बने थे,तब मैंने घर बैठे ही हिंदी में गीत लिखना प्रारंभ किया। न किसी रिकॉर्डिंग स्टूडियो में गई, न किसी गायक या संगीतकार से व्यक्तिगत मुलाक़ात हुई। सीमित संसाधनों के बीच केवल लेखन और तकनीक के सहारे आगे बढ़ती रही।समय के साथ इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और आत्मनिर्भर प्रयासों ने यह संभव किया कि बिना किसी नेटवर्किंग तंत्र का हिस्सा बने, लगभग पचास गीत रचे जा सकें। यह यात्रा न शोरगुल वाली रही, न मंचों की रोशनी से भरी—बल्कि एक शांत साधना की तरह रही।आज जब “डिजिटल इंडिया” की बात होती है, तो मुझे लगता है कि देश में ऐसे असंख्य अनदेखे प्रयास होंगे—जहाँ साधारण लोग तकनीक के माध्यम से अपने हुनर को जीवित रखे हुए हैं, बिना किसी दिखावे के।
यह पत्र उसी भावना से लिखा गया है—कि परिवर्तन हमेशा बड़े मंच से ही नहीं, कई बार एक कमरे में बैठकर, लैपटॉप
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