माननीय प्रधानमंत्री जी मैं सुनील कुमार पटेल जिला प्रयागराज उत्तर प्रदेश पिन कोड 212507 सर जी आपकी मन कि बात बहुत अच्छा लगता है हम सुनते हैं सर जी हम भी समाज में कि सेवा करना चाहता हूं हम भी युवा है हम अपने देश कि सेवा करना चाहता हूं धन्यवाद सर जी 🙏🙏
नमस्ते माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।
आपसे एक ही अनुरोध है कि जल, जंगल और जमीन पर भारतीयों का स्वामित्व रहने से क्योंकि सरकार जिस गति से जंगल की कटाई और जमीन को कॉरपोरेट को बेच रही है ये बहुत ही चिंताजनक और निराशाजनक है कृपया करके इस बात को अति गंभीरता से ले नहीं तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हवा भी बस मुनाफे का एक साधन बनकर रह जाएगा और कृपया करके सूचना का अधिकार कानून को और पारदर्शी बनाया जाए और इसका समयावधि 1 माह से घटाकर 10 दिन किया जाए।
Respected pm sir, Singapore significantly outperforms India in anti-corruption efforts, consistently ranking as a near-unblemished nation (score 84 in 2024 CPI) versus India's lower-middle ranking (score 38 in 2024 CPI), due to Singapore's robust, autonomous anti-graft bodies (CPIB), high official salaries, strict penalties, digital transparency, and political will, while India struggles with institutional influence, lower pay, fragmented digitization, and societal patronage, despite efforts like Aadhaar. Key Differences in Corruption Perception & Reality:CPI Scores (Transparency International 2024):Singapore: 84/100 (Top-ranked in Asia Pacific).India: 38/100 (Ranked 96th globally).Singapore: Strong, independent Corrupt Practices Investigation Bureau (CPIB), high-ranking officials jailed for corruption (e.g., former minister Iswaran), leading to low discretion. India: Central Bureau of Investigation (CBI) faces political influence; cases often see acquittals or prolonged trials.
आज के समय में शिक्षा को सफलता की कुंजी माना जाता है, फिर भी यह देखने को मिलता है कि डिग्री प्राप्त करने के बाद भी अनेक युवा रोजगार से वंचित रह जाते हैं। दूसरी ओर, कई क्षेत्रों में बिना उच्च शिक्षा के भी लोग प्रभावशाली पदों पर पहुँच जाते हैं। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठता है कि क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था छात्रों को केवल परीक्षा पास करने तक सीमित कर रही है या उन्हें जीवन और रोजगार के लिए वास्तव में सक्षम बना रही है। शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र प्राप्त करना नहीं, बल्कि सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना होना चाहिए। युवाओं के मन में यह जिज्ञासा है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली को कैसे व्यावहारिक, कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुख बनाया जा सकता है, ताकि शिक्षा और जीवन के बीच की दूरी को कम किया जा सके।
जब कोई जनप्रतिनिधि बिना औपचारिक उच्च शिक्षा के मंत्री बन सकता है, तो IAS और IPS जैसे प्रशासनिक पदों के लिए युवाओं को इतनी कठिन परीक्षाएँ क्यों देनी पड़ती हैं। इन परीक्षाओं में सफल होने के लिए वर्षों की पढ़ाई, कठिन चयन प्रक्रिया और लंबा प्रशिक्षण आवश्यक होता है। इसके बाद जब कोई अधिकारी प्रशासनिक पद पर नियुक्त होता है, तब उसे उसी मंत्री के अधीन कार्य करना पड़ता है। ऐसे में कई युवाओं के मन में यह प्रश्न उठता है कि उनकी शिक्षा और मेहनत का वास्तविक महत्व क्या केवल आदेशों के पालन तक सीमित रह जाता है। यह समझना आवश्यक है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी दोनों की भूमिकाएँ अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे से जुड़ी हैं और इसी संतुलन से शासन व्यवस्था चलती है।
समाज में ऐसी व्यवस्था क्यों हैं???
Sir namaskar.jai hind.
Pura bharat me population control karne ke liye pura puri strictly rule follow karna hai.jese ki ek family me sirf 2 bache hi kar sakte hain.2 se jyada bacha peda karna ek crime hona chahiye aur usike liye dand bhi bhogna padega ese koi rule lagu karo pls sir .ese karne se india ka 50% problem solve ho jayega. Isi baat ke liye thoda soche jaurur sir .
Jai jagannath.
विषय: अरावली और पेड़ों की कटाई रोकने हेतु आग्रह
माननीय प्रधानमंत्री जी,
मेरे विचार इस छोटे कमेंट में नहीं आ पा रहे हैं, इसलिए मैं अपने विचारों की इमेज अटैच कर रही हूँ।
कृपया इसे ज़रूर पढ़ें।
अरावली हमारी साँस है — 100 मीटर या 10 मीटर, हर पेड़ और हर मीटर जीवन है।