ANJU JAIN
6 months 2 weeks ago
एक जैन होने के नाते, कई बार मुझे लगता है कि जैन अब केवल एक जाति बनकर रह गया है, जबकि पहले जैन एक धर्म था। जो जैन धर्म के नियमों का पालन करता था, वही जैन कहलाता था, जन्म से नहीं बल्कि आचरण से।
आज बहुत से लोग जैन कहलाते हुए भी रात का भोजन, नशा, तंबाकू और यहाँ तक कि मांसाहार भी करते हैं, फिर भी खुद को जैन कहते हैं। पहले ऐसे लोगों को मंदिर में अभिषेक की अनुमति नहीं होती थी।
कथनी और करनी के इसी अंतर के कारण जैन धर्म कमजोर होता जा रहा है। ट्रस्टी और प्रबंधन में बैठे कई लोग भी स्वयं नियमों का पालन नहीं करते।
क्यों न ऐसा एक जिनालय हो, जहाँ सभी को समान नियमों के साथ दर्शन, पूजा और अभिषेक की अनुमति हो —
जो मांस, मदिरा और नशे से दूर रहते हों, और जहाँ पूजा केवल जैन विधि से करवाई जाए।
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