Arun Tomar
4 years 11 months ago
आदरणीय महोदय,
युवाओं को संदेश दिया जाना चाहिए कि वे सांस्कृतिक विरासतों पर विशेष ध्यान दें ।हमारे यहाँ अनेक परम्परायें है जो हमें धर्मों से जोड़ती है,उन पर्वो, रीति-रिवाजों और संस्कारों को निभाने में हमारे प्राचीन बुद्धिजीवियों के कुछ ना कुछ विशेष तर्क रहे है ,जो प्रकृति से जुड़े थे। आधुनिक होने का मतलब अपनी संस्कृति और सभ्यता से पलायन कर लेना नहीं है । हमें अपनी आध्यात्मिक संस्कृति की ओर चलना चाहिए ।एकमात्र वही तो हमारे विश्वगुरु होने का आधार है।उनको चल रहे श्राद्ध का महत्व समझाना चाहिए ।🙏🙏🌻
Like
(1)
Dislike
(1)
Reply
Report Spam